
- संगठन मजबूती में जुटी कांग्रेस सेक्टर और बाल कांग्रेस को भूली
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने और सत्ता में वापसी के लिए संगठन सृजन अभियान चला रही है। लेकिन विडंबना यह है कि पिछले एक साल में पार्टी संगठन सृजन अभियान में इस कदर व्यस्त है कि वह अपने पुराने अभियानों को भूल गई है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि संगठन सृजन का अभियान कैसे साकार हो पाएगा। दरअसल, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने संगठन को मजबूत करने के लिए वर्ष 2025 से संगठन सृजन अभियान शुरू किया है। अभियान की गाइडलाइन के अनुसार मप्र के साथ ही सभी राज्यों में संगठन में विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। इस अभियान के तहत कांग्रेस के संगठन के स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया गया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस में साल भर से संगठन सृजन अभियान की खूब चर्चा है। पार्टी की लगभग हर बैठक इस अभियान पर केंद्रित रहती है। संगठन सृजन अभियान के तहत मप्र कांग्रेस के स्ट्रक्चर में संशोधन किया गया है। मप्र कांग्रेस संगठन से सेक्टर के पद को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर मंडलम से नीचे पंचायत और वार्ड कमेटियों का गठन किया जा रहा है। कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता दीपक बावरिया को वर्ष 2017 में मप्र कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया था। बावरिया संगठन को मजबूत करने के लिए ब्लॉक के नीचे मंडलम और सेक्टर का कॉन्सेप्ट लेकर आए थे। प्रदेश भर में मंडलम सेक्टर का गठन किया गया था। बावरिया के संगठन के मजबूत करने के प्रयास रंग लाए और वर्ष 2018 में 15 साल बाद कांग्रेस ने प्रदेश की सत्ता में वापसी की। मप्र में वर्ष 2021 में बाल कांग्रेस का गठन किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने बाल कांग्रेस को पूरी तरह से भुला दिया।
सेक्टर का पद समाप्त कर दिया
मप्र कांग्रेस के संगठन में सेक्टर का पद समाप्त कर दिया गया है, जबकि मंडलम का पद अभी बरकरार है। पार्टी की ओर से मंडलम के पद पर नियुक्तियां की जा रही हैं। मप्र कांग्रेस ने गत जनवरी में 20 फरवरी तक पंचायत कमेटियों के गठन की डेडलाइन तय की थी, लेकिन अब तक पार्टी न के बराबर पंचायत कमेटियों का गठन कर पाई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश के सभी गांवों में पंचायत कमेटियों का गठन करना आसान काम नहीं है। सभी पंचायत कमेटियों के गठन में कम से कम छह महीने लग जाएंगे। मप्र कांग्रेस की ओर से जिला कार्यकारिणी की सूची भी चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही है। अब तक सिर्फ 17 जिलों की कार्यकारिणी घोषित की गई हैं। इस तरह अभी 54 जिला कार्यकारिणी के गठन की घोषणा होना शेष है।
बाल कांग्रेस को पार्टी ने भुला दिया
तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने वर्ष 2021 में बाल कांग्रेस के गठन का कॉन्सेप्ट लेकर आए थे। बाल कांग्रेस में 16 से 20 साल के युवाओं को स्थान दिया गया था। इंदौर के लक्ष्य गुप्ता को बाल कांग्रेस का स्टेट कैप्टन बनाया गया था। इसके अलावा बाल कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारियों और जिलों में पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद जैसे ही कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटे, बाल कांग्रेस को पार्टी ने भुला दिया। दरअसल, बाल कांग्रेस के गठन का उद्देश्य नवयुवकों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाना और कांग्रेस की विचारधारा से अवगत कराना था। विधानसभा चुनाव 2023 आते-आते प्रदेश में बड़े स्तर पर बाल कांग्रेस के संगठन का गठन हो चुका था। बाल कांग्रेस के स्टेट कैप्टन लक्ष्य गुप्ता फिलहाल दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि बाल कांग्रेस का गठन पूर्व सीएम कमलनाथ का अलग तरह का कॉन्सेप्ट था। ऐसा कर वे कांग्रेस भविष्य के ऐसे नेता तैयार करना चाहते थे, जो कांग्रेस की विचाराधारा से ओतप्रोत हों। लक्ष्य ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से प्रदेश भर में बाल कांग्रेस की टीम खड़ी कर ली थी। इस टीम ने विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए काम भी किया था। कांग्रेस को चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसके बाद वे पढ़ाई करने इंदौर से दिल्ली आ गए।
