
- भाजपा नेताओं पर संवाद प्रशिक्षण का भी असर नहीं
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए विवादित बयान से देशभर में भाजपा की किरकिरी हुई। इसके बाद पचमढ़ी में 14 से 16 जून के बीच प्रशिक्षण शिविर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई बड़े नेताओं ने सांसद-विधायकों और मंत्रियों को यह समझाया कि क्या बोलना है, क्या नहीं। हालांकि इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा। अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले बयान थम नहीं रहे हैं। माननीय अपने बिगड़े बोल और उटपटांग हरकतों के कारण पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं।
भाजपा देश की सबसे सुसंस्कृत और शिष्ट पार्टी मानी जाती है। पार्टी की बराबर कोशिश रहती है कि नेता पार्टी गउइड लाइन के अनुसार काम करें। लेकिन भाजपा नेताओं के चाल, चेहरा और चरित्र पर सवाल उठने लगे हैं। इसको लेकर पचमढ़ी में भाजपा ने तीन दिन के संवाद कौशल प्रशिक्षण आयोजित किया था। जिसमें नेताओं को सुशासन का पाठ पढ़ाया गया था, लेकिन ऐसा लगता है प्रशिक्षण वर्ग में मिली सीख का भी पार्टी के जनप्रतिनिधियों पर कोई असर नहीं हुआ। यही वजह है कि आए दिन भाजपा के जनप्रतिनिधि अधिकारियों से अभद्रता करने के साथ सार्वजनिक बयानबाजी करके पार्टी ही नहीं, सरकार की भी जमकर किरकिरी करा रहे हैं।
थम नहीं रही अभद्रता और विवादित बयान
गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष बनते ही हेमंत खंडेलवाल ने दो टूक कहा था कि -दाएं-बाएं होने वाले जनप्रतिनिधियों की खैर नहीं। वह अपने डेढ़ माह के कार्यकाल में संघ की कार्यपद्धति का उदाहरण देकर जनप्रतिनिधियों को बार-बार अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं, लेकिन भिंड जिले में कलेक्टर के साथ भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह द्वारा अभद्रता की गई। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सीखें का जनप्रतिनिधियों पर कोई असर नहीं हुआ है। वहीं गुना के चांचौड़ा से भाजपा विधायक प्रियंका पैची ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि गुना के एसपी अंकित सोनी मंत्री-विधायक की सलाह के बिना ही पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण कर रहे हैं। उन्होंने यह तक कहा कि रोज नई-नई कहानियां गढकऱ एसपी और चांचौड़ा एसडीओपी उन्हें प्रताडि़त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से उन्होंने तुरंत कार्रवाई का अनुरोध किया था। मई में लिखा पत्र सार्वजनिक होने के बाद बड़े नेताओं को दखल देना पड़ा। पैची को पार्टी कार्यालय बुलाकर समझाइश दी थी। दमोह में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी ने सार्वजनिक कार्यक्रम में भाजपा नेता संजय सेन और उनकी पत्नी कविता राय से जमकर बहस की थी। संचालन कर रहे संजय सेन ने प्रीतम लोधी का नाम नहीं लिया, इस बात से विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस बुलानी पड़ी। मामला प्रदेश संगठन तक पहुंचा। 16 जून को हटा विधानसभा क्षेत्र में स्थित एक अस्पताल में विवाद के बाद थाने के घेराव में प्रीतम लोधी ने कहा कि उसी को सासद-विधायक चुनें जो लोधी समाज के साथ खड़ा रहे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि कुछ घटनाएं सामने आई है, उसको लेकर हिदायत दी है हाल ही में एक-दो मामले सामने आए हैं, उनको भी पार्टी गंभीरता से संज्ञान ले रही है। इनमें जो भी निर्णय करना होगा या निर्देश देना होगा, वह करेंगे।