उच्च न्यायालय ने कंप्यूटर शिक्षकों को आउटसोर्स करने पर लगाई रोक

  • स्कूल शिक्षा विभाग और आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय को नोटिस

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षकों को आउटसोर्स करने पर मप्र उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायाधीश एमएस भट्टी की एकलपीठ ने स्कूल शिक्षा विभाग, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय और समग्र शिक्षा अभियान को नोटिस जारी किया है। न्यायाधीश एमएस भट्टी की एकलपीठ ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
दरअसल, मंडला निवासी अरजीत नामदेव सहित 118 शिक्षकों ने याचिका दायर कर बताया कि वे लंबे समय से सरकारी स्कूलों में संविदा के रूप में कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर की सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश के करीब 92 हजार सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षक व्यवस्था के तहत मेरिट के आधार पर उनकी नियुक्ति हुई थी। याचिका में कहा गया है कि एकेडमिक सेशन 2025-26 के बीच अचानक आदेश जारी कर सरकार ने भर्ती में ड़बडिय़ों का हवाला दिया। कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर्स की सेवाओं को आउटसोर्सिंग में लाने का निर्णय लिया, जिससे हजारों शिक्षकों का भविष्य खतरे में पड़ गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि कि भर्ती प्रक्रिया पोर्टल के जरिए की गई थी, जिसमें मेरिट के आधार पर सिलेक्शन, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और जॉइनिंग सहित पूरी प्रक्रिया शामिल थी। टीचर्स ने लगभग ढाई एकेडमिक सेशन पूरे कर लिए हैं। 200 वर्किंग डे और 3 सेशन पूरे करने के करीब हैं। इन शक्तों के प्रत्यक्ष भर्ती में 50 फीसदी आरक्षण का लाभ मिल सकता था, जो आउटसोर्सिंग लागू होने से समाप्त हो जाएगा। बता दें कि प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में एक या दो कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर कार्यरत हैं, जिनके भविष्य पर इस निर्णय का सीधा असर पड़ सकता है।

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