वित्तीय वर्ष में मप्र में कम हुए जीएसटी कलेक्शन

जीएसटी कलेक्शन
  • केंद्र सरकार द्वारा किए गए जीएसटी स्लैब में बदलाव का असर

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। केंद्र सरकार द्वारा किए गए जीएसटी स्लैब में बदलाव का असर मप्र में देखने को मिला है। इस बदलाव के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में मप्र में जीएसटी कलेक्शन कम हुआ है। इस कारण मप्र में जीएसटी कलेक्शन में इस वित्तीय वर्ष में 0.75 प्रतिशत तक कमी आई है। मप्र माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 68 के अंतर्गत चलित वाहनों की जांच से जुड़े 2350 प्रकरणों में 2827.94 रुपये लाख जमा कराए गए हैं।  सरकार द्वारा हाल ही में खत्म हुए विधानसभा के बजट सत्र में दी गई जानकारी से ये खुलासा हुआ।
    गौरतलब है कि 22 सितम्बर 2025 से केंद्र ने जीएसटी में अहम बदलाव करते हुए चार की जगह दो स्लैब ही रख दी थी। बदलाव के मुताबिक 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के स्लैब खत्म कर दिए गए थे। विलासिता और सिन गुड्स वाले उत्पादों पर 40 प्रतिशत की नई स्लैब बना दी गई थी। ऑटोमोबाइल, ऐसी, फ्रिज जैसी चीजों पर इसका असर पड़ा था। कर सलाहकार पलाश खुरपिया ने कहा कि उत्पादों के दाम उतने कम नहीं हुए जितना उपभोक्ताओं को उम्मीद थी। ऐसा लगता है कि कंपनियों ने जीएसटी में कमी का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया, जिससे खपत उतनी नहीं बढ़ी।
    400 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पकड़ी गई
    उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कांग्रेस विधायक अजय सिंह द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में जानकारी दी है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूरे प्रदेश में 437 व्यापरियों की 400.92 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी गई। इसमें से 234.49 करोड़ जमा हुए हैं। जवाब के मुताबिक जीएसटी अधिनियम की धारा 67 के तहत इंस्पेक्शन, सर्च और जब्ती की कार्रवाई की गई है। सरकार ने ये भी जानकारी दी कि आयरन, स्टील, सुपारी और गुटखा से जुड़े 127 ऐसे मामले हैं जिनमें 129.51 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी सामने आई और 46.97 करोड़ रुपए विभाग के पास संबंधित व्यापारियों -फर्मों ने जमा कर दिए हैं। विभाग के मुताबिक स्टील, सुपारी -गुटखा के जिन मामलों में 50 लाख से अधिक की टैक्स चोरी पकड़ी गई, उनमें से सिर्फ एक में ही राशि सरेंडर हुई। कटनी में पीएस ट्रेडर नाम की फर्म पर कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद फर्म ने 56 लाख की राशि सरेंडर की थी। बाकी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में हुईं कार्रवाई में कहीं भी कोई राशि सरेंडर नहीं हुई। इन टैक्स चोरी के मामलों में कुल 54 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी सामने आई है। भोपाल में 4.63 करोड़, ग्वालियर में 1.92 करोड़, इंदौर 26 करोड़ और जबलपुर में लगभग 10 करोड़ की टैक्स चोरी सामने आई है। स्टील, सुपारी -गुटखा सेक्टर में टैक्स चोरी के कुल 21 बड़े मामले सामने आए हैं।
    सबसे ज्यादा फर्जी फर्म ऑपरेटरों की संख्या इंदौर में
    मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा फर्जी फर्म ऑपरेटरों की संख्या इंदौर में सामने आई है। दूसरे नंबर पर जबलपुर है। इंदौर में फर्जी फर्म की संख्या 10 तो जबलपुर में चार है। भोपाल, गुना, ग्वालियर से लेकर भिंड और कटनी में भी फर्जी फर्म ऑपरेटर सामने आए हैं।  उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 437 करदाताओं पर मध्य प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 67 के अंतर्गत निरीक्षण सर्च एवं सीजर की कार्यवाही की गई। इसमें आयरन स्टील, सुपारी-गुटखा जैसे क्षेत्रों से संबंधित 127 करदाता शामिल हैं। इनसे 4697.64 लाख रुपये जमा कराए गए हैं। 50 लाख से अधिक कर अपवंचन के 140 प्रकरणों में जीएसटी अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गईं हैं। जहां इंदौर को प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी का तमगा मिला हुआ है, वहीं, टैक्स चोरी के बड़े मामलों में भोपाल ने इंदौर को पीछे छोड़ दिया है। भोपाल में इस वित्तीय वर्ष में टैक्स चोरी के 21 मामलों में कुल राशि 12 हजार 394 करोड़ है, वहीं इंदौर में ऐसे 56 मामले पकड़ में आए पर टैक्स चोरी की कुल राशि 10 हजार 699 करोड़ ही है। 32 जिलों में 140 मामलों में अब तक विभाग के अधिकारियों ने कुल 339 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी है , जिसमें से 159 करोड़ से अधिक राशि विभाग के पास जमा हो चुकी है।

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