- 4.65 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है मप्र सरकार का बजट

गौरव चौहान
मप्र विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान बजट प्रस्तुत होगा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद में औसत वार्षिक वृद्धि दर 10 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। इस आधार पर 2026-27 का वार्षिक बजट 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। बजट में सरकार का सबसे अधिक फोकस युवा, किसान और कर्मचारियों पर होगा। सरकार इन वर्गों को साधने की कोशिश में बजट में कई सौगातें दे सकती है। बजट के पिटारे से आम जनता, कर्मचारियों, किसानों और युवाओं के लिए कई बड़ी सौगातें निकलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अगले एक साल में 50,000 नई सरकारी नौकरियों का ऐलान कर सकती है। वहीं, राज्य के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 35 लाख रुपए तक की केशलैस स्वास्थ्य बीमा योजना सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक हो सकती है। किसानों की आय दोगुनी करने के मकसद से हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और शहरी परिवहन को सुगम बनाने के लिए सस्ती सहकार टैक्सी सेवा शुरू करने की भी तैयारी है। बता दें कि मोहन सरकार अपने कार्यकाल का तीसरा पूर्ण बजट पेश करने वाली है।
गौरतलब है कि डॉ. मोहन यादव सरकार पहली बार रोलिंग बजट का कॉन्सेप्ट पेश करेगी, यानी इस बार बजट में एक साल की बजाय अगले तीन सालों के फाइनेंशियल रोडमैप की झलक देखने को मिलेगी। ये पारंपरिक बजट से अलग होता है। यह एक निश्चित टाइम पीरियड की बजाय योजनाओं के साथ अपडेट होता रहता है। इस नई व्यवस्था के तहत, सरकार एक साथ तीन वित्तीय वर्ष (2026-27, 2027-28, और 2028-29) के लिए अपनी आय और व्यय की योजना बनाएगी। सरकार का मानना है कि इस कॉन्सेप्ट से 3 अहम फायदे होंगे। योजनाओं पर होने वाले खर्च की लगातार निगरानी संभव होगी, जिससे फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी। योजनाओं की मॉनिटरिंग और समय समय पर इसका इवैल्यूएशन किया जा सकेगा। जरूरत पडऩे पर उनमें बदलाव भी किया जा सकेगा। सरकार अपनी प्राथमिकताओं को लॉन्ग टर्म के लिए निर्धारित कर सकेगी, जिससे विकास परियोजनाओं में स्थिरता आएगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
राजस्व आय बढ़ाना बड़ी चुनौती
मप्र में कर्ज बढ़ते-बढ़ते बजट के आकार से अधिक हो चुका है। मूलधन और ब्याज अदायगी का बोझ और बढ़ेगा। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती आमदनी बढ़ाने की है, क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य के पास कर लगाने के क्षेत्र सीमित हो गए हैं। आवश्यकता बेहतर वित्तीय प्रबंधन की है। इसी वजह से पहली बार रोलिंग बजट तैयार किया जा रहा है। इसमें एक साथ तीन वर्ष की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन कराया जा रहा है, ताकि वित्तीय वर्ष 2028-29 तक की कार्य योजना अभी से तैयार की जा सके। बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान (लगभग 1.31 लाख करोड़ रुपए) पर खर्च होगा। इसके बाद, लाड़ली बहना योजना (सालाना 20,000 करोड़) और बिजली सब्सिडी (सालाना 30,000 करोड़) सरकार पर सबसे बड़ा वित्तीय बोझ हैं। इन सभी योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए विकास के लिए धन जुटाना वित्त विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार आबकारी और खनिज क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। निवेश को आकर्षित करने और कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की भी योजना है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार पूंजीगत व्यय यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर को 90,000 करोड़ रुपए से ज्यादा करने की तैयारी में है। यह सड़कों, पुलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण पर खर्च होगा, जिससे न केवल विकास को गति मिलेगी, बल्कि बाजार में मांग बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे।
कर्मचारियों केशलैस इलाज की सौगात
डॉ. मोहन यादव सरकार इस बजट में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य आश्वासन योजना शुरू कर सकती है। इसमें कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 35 लाख रुपए तक का केशलैस कवर मिलेगा। वर्तमान में, कर्मचारियों को पहले अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाना पड़ता है और बाद में विभाग से प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करना होता है, जिसमें अक्सर पूरी राशि नहीं मिलती। नई योजना के तहत, हरियाणा और राजस्थान की तरह, कर्मचारी और उनके परिवार के लोग योजना के कार्ड के जरिए सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में केशलैस इलाज करा सकेंगे। योजना में सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए और गंभीर बीमारियों (जैसे कैंसर, हृदय रोग, अंग प्रत्यारोपण) के लिए 35 लाख रुपए तक का कवर मिलेगा। इस योजना से लगभग 5 लाख से ज्यादा नियमित कर्मचारी और करीब 5 लाख पेंशनभोगियों सहित 10 लाख से अधिक लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। योजना के लिए कर्मचारियों के वेतन से पद के अनुसार 250 रुपए से 1 रुपए तक का मासिक अंशदान काटा जाएगा, जबकि एक बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी। पेंशनरों को आजीवन फायदे के लिए एकमुश्त 1.75 लाख रुपए जमा करने का विकल्प दिया जा सकता है। योजना का फायदा कर्मचारी, उनके पति/पत्नी, बच्चों और माता-पिता को भी मिलेगा। सभी के लिए अलग-अलग कार्ड बनाए जाएंगे।
किसानों को मिलेगी कई सौगातें
सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, और इसकी झलक बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का बजट 70,000 करोड़ रुपए के आसपास हो सकता है। पिछली बार भी कृषि विभाग के बजट में 13 हजार करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी कर इसे 58 हजार करोड़ किया था। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन के लिए प्रत्येक जिले में एक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी। 7.5 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन की सिंचाई का टारगेट तय किया है। इसके लिए जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास की परियोजनाओं के लिए बजट को 17,214 करोड़ से बढ़ाकर लगभग 20,000 करोड़ रुपए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (2500 करोड़), शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण (750 करोड़), और किसान कल्याण योजना (6000 करोड़) जैसी योजनाओं को जारी रखा जाएगा। सोयाबीन के बाद सरसों को भी भावांतर भुगतान योजना में शामिल किया जा सकता है। जैविक खाद बनाने और प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
नौकरियों की भरमार
सरकार बजट में 50,000 से अधिक रिक्त सरकारी पदों को भरने की घोषणा कर सकती है। यह भर्तियां मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से की जाएंगी। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने और उन्हें समय पर पूरा करने के लिए परीक्षाओं के पैटर्न में भी कुछ बदलाव का ऐलान हो सकता है। युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए युवा उद्यमी योजना जारी रहेगी। इसके अतिरिक्त, कृषि स्नातक युवाओं को कृषि-आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष छूट और अनुदान देने का प्रावधान किया जाएगा, ताकि वे जॉब सीकर के बजाय जॉब क्रिएटर बन सकें। इसके अलावा, कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की गणना के लिए एक नई प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते की गणना 74 प्रतिशत, 84 प्रतिशत, 94 प्रतिशत के हिसाब से होगी। साथ ही, कर्मचारियों के लिए उपहार लेने की 50 साल पुरानी सीमा को 500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए किया जा सकता है, ताकि वे बिना किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर के छोटे-मोटे उपहार स्वीकार कर सकें।
सुगम यात्रा के लिए सहकार टैक्सी
शहरी क्षेत्रों में परिवहन को सुगम और सस्ता बनाने के लिए सहकार टैक्सी सेवा शुरू करने की घोषणा की जा सकती है। सहकारिता विभाग की यह योजना ओला और उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों का एक सहकारी विकल्प प्रदान करेगी। इसका संचालन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) और अन्य बड़ी सहकारी समितियों के जरिए होगा। चूंकि यह एक सहकारी मॉडल होगा, इसलिए ड्राइवरों को किसी कंपनी को कमीशन नहीं देना होगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा और राइड्स मौजूदा टैक्सियों की तुलना में सस्ती होंगी। कमीशन मुक्त होने से ड्राइवरों की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। योजना की शुरुआत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से होगी, और सफलता के बाद इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा। इस सेवा के तहत बाइक-टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और कैब, तीनों को पंजीकृत किया जाएगा, जिससे यात्रियों को कई विकल्प मिलेंगे।
सरकार की प्राथमिकता में ये भी
बजट में सरकार कई और क्षेत्रों में प्राथमिकता से ध्यान देगी। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत 22 आदिवासी जिलों में 1039 किमी सडक़ और 112 पुलों के निर्माण के लिए 795 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जाएगा। वहीं 450 नए सांदीपनि विद्यालय खोले जाएंगे और मौजूदा स्कूलों-कॉलेजों में सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त राशि दी जाएगी। 2030 तक राज्य की 50त्न बिजली खपत को सौर, पवन और जल ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य है, जिसके लिए संयंत्र लगाने वालों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
