- मोहन सरकार का विजन 2030
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर वर्ग का समुचित विकास हो। इसके तहत सरकार का सबसे अधिक फोकस जनजातियों पर है। सरकार ने उनके उत्थान के लिए योजनाओं की भरमार कर दिया है, वहीं उनके वनाधिकार पट्टों की रजिस्ट्री का खर्च भी अब सरकार उठाएगी।
गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। मप्र में आदिवासियों और उनके गांवों के विकास के लिए विजन 2030 बनाया है। इसके तहत सरकार ग्रामों के विकास की कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसी के तहत मप्र सरकार ने वनवासियों को बड़ी राहत देते हुए वनाधिकार पट्टों को राजस्व पट्टों में बदलने और उनकी रजिस्ट्री का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। इसके लिए 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये का यह खर्च सरकार वहन करेगी, ताकि पट्टाधारकों को बिना किसी निजी खर्च के जमीन का मालिकाना हक मिल सके। इस प्रक्रिया के तहत, रजिस्ट्री में भाई और बहन दोनों का नाम शामिल किया जाएगा, जिससे उन्हें संपत्ति पर पूर्ण स्वामित्व मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य वन भूमि पर काबिज लोगों को स्थायी मालिकाना हक प्रदान करना और उन्हें जमीन से संबंधित वित्तीय बोझ से बचाना है। यह निर्णय हाल ही में बुरहानपुर के नेपानगर में आयोजित एक जनजातीय सम्मेलन में लिया गया, जहां सीएम ने इस आशय की घोषणा की। यह कदम विशेष रूप से आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने और वन अधिकार अधिनियम के तहत मिले अधिकारों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है।
गौरतलब है कि वन अधिकार पट्टा वनवासियों और आदिवासियों को उनकी पारंपरिक वन भूमि पर खेती या निवास का कानूनी अधिकार (भूमि स्वामित्व) देता है, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक अन्याय को दूर करना है। यह व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता देता है। प्रदेश में भू-अधिकार पट्टाधारी किसान अब जमीन के मालिक बनने जा रहे हैं। मप्र सरकार के बड़े फैसले का फायदा करीब 50 लाख किसान परिवारों को मिलेगा। भू-अधिकार पट्टाधारी किसान अब पट्टे की जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे और रजिस्ट्री का पैसा मप्र सरकार देगी। सीएम मोहन यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के 50 लाख परिवारों को भू-अधिकार के पट्टे दिए हैं। जिन किसानों के पास भू-अधिकार पट्टे हैं, क्योंकि ये किसान कल्याण वर्ष है, इसलिए हमने बड़ा निर्णय लिया है। हम लगभग 3500 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च करने वाले हैं। सारे भू-अधिकार के पट्टे पंजीयन विभाग में रजिस्ट्री का रूप लेंगे। पंजीयन विभाग में जाएंगे तो रजिस्ट्री होगी। रजिस्ट्री का पैसा सरकार ही देगी, किसान को नहीं देना है। जब रजिस्ट्री हो जाएगी, बाद में किसान को लोन लेना हो या प्रॉपर्टी में उपयोग करना हो। इतना बड़ा अधिकार हमने दिया है। ये बहुत बड़ा निर्णय है। ये फैसला लेने वाला देश का पहला राज्य है। गरीब, किसान वर्ग के विकास के लिए बड़ा काम किया है। मप्र में मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना उन परिवारों के लिए है जिनके पास रहने के लिए अपना घर या जमीन नहीं है। इसमें सरकार मुफ्त में भू-अधिकार पत्र (पट्टा) देती है। आवेदक के पास रहने के लिए खुद का आवास नहीं होना चाहिए। उसके पास 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन नहीं होना चाहिए। परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए और इनकम टैक्स पेयर नहीं होना चाहिए। आवेदक पीडीएस राशन दुकान से राशन के लिए पात्र होना चाहिए।
क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान
एमपी में 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने आदिवासी क्षेत्रों में गांवों के समग्र विकास के लिए एक नया प्लान बनाया है। इसके तहत भाजपा आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 विधानसभा सीटों पर तीन-चार गांवों का क्लस्टर बनाकर तमाम पैरामीटर्स पर बिना सरकारी मदद के डेवलपमेंट पर काम करेगी। इसे संकुल विकास परियोजना नाम दिया गया है। भाजपा जनजातीय मोर्चा ने गांवों को विकसित करने के लिए संसदीय संकुल विकास परियोजना की शुरुआत एमपी के आदिवासी क्षेत्रों में की है। इसमें हर आदिवासी विधानसभा क्षेत्र में तीन-चार गांवों को मिलाकर एक क्लस्टर (संकुल) बनाया जाएगा। इस क्लस्टर में आपस में एक-दूसरे से जुड़ी ग्राम पंचायतें शामिल होंगी। इससे आने-जाने में आसानी होगी। क्लस्टर में आने वाली ग्राम पंचायतों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जलसंकट, आजीविका और पलायन जैसे मुद्दों पर बिना सरकारी मदद के ट्राइबल सिविल सोसाइटी काम करेगी।
भाजपा ने क्लस्टर लेवल की प्रोफाइल तैयार कराई है। इसमें संकुल के नाम के साथ जिला, ब्लॉक और संकुल में शामिल ग्राम पंचायतों के नाम, तहसील मुख्यालय से दूरी, पंचायत में शामिल गांवों की संख्या, पंचायत की जनसंख्या और कुल परिवारों की संख्या की जानकारी तैयार कराई है। एक कलस्टर में अधिकतम 8 ग्राम पंचायतें शामिल की जा सकती हैं। संकुल विकास परियोजना के लिए बनने वाली कमेटी में उस क्षेत्र के भाजपा विधायक, संबंधित पंचायतों के सरपंच, जिला पंचायत, जनपद पंचायत अध्यक्ष शामिल किए जाएंगे। जहां भाजपा के विधायक नहीं हैं वहां पूर्व विधायकों या हारे हुए विधानसभा प्रत्याशी समिति में लिए जाएंगे। बागली से भाजपा विधायक मुरली भंवरा ने बताया कि संकुल विकास परियोजना का उद्देश्य है कि गांवों का समग्र विकास हो उस विकास में गांव की समिति सहभागी हो। उस समिति के माध्यम से लोगों की मांगों को शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन उस माध्यम से करना है। पंचायत स्तर पर समिति गठित होगी। लोग सक्रियता के साथ इसमें सहभागी होंगी। इसमें वर्तमान विधायक, पूर्व विधायक, जिला पंचायत अध्यक्षों को इसमें शामिल किया गया है। एमपी में आदिवासी वर्ग के लिए 47 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। इनमें से 25 सीटों पर भाजपा, 21 सीटों पर कांग्रेस और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी का कब्जा है। आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा गांवों के समग्र विकास का मॉडल प्रस्तुत करके कांग्रेस के विकास और भाजपा के डेवलपमेंट मॉडल को बताना चाहती है। एमपी की मोहन सरकार में आदिवासी वर्ग के 5 मंत्री हैं। इनमें विजय शाह, नागर सिंह चौहान, निर्मला भूरिया, संपतिया उईके, राधा सिंह मंत्री हैं।
जल, जंगल, जमीन के रक्षक
प्राचीनकाल से आदिवासियों का जंगल एवं वन प्राणियों से गहरा लगाव रहा है। आदिवासी प्राचीनकाल से वन क्षेत्रों में निवास करते हुए जल, जंगल, जमीन और वन प्राणियों की रक्षा करते रहे है। इसे देखते हुए भारतीय संस्कृति में आदिवासियों को धरती पुत्र कहा गया है। आदिवासी बाहुल्य मप्र राज्य में 43 जनजाति समूह निवास करते है। जो मप्र की कुल जनसंख्या का 5वां हिस्सा है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में एक करोड़ 53 लाख के करीब जनजाति वर्ग की आबादी है। देश में स्वतंत्रता के पश्चात केन्द्र सरकार ने आदिवासी वर्ग के उत्थान के लिये संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की और संविधान में उनकी समस्याओं को दूर करने के लिये अनेक प्रावधान भी किये। इसी के अनुरूप मप्र में आदिवासी वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिये आदिवासी उपयोजना की रणनीति अपनाते हुए विभिन्न विकास विभागों के माध्यम से आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक उत्थान एवं अनेक विकास कार्यक्रम संचालित किये जा रहे है। प्रदेश में जनजाति जनसंख्या के अनुपात में 21.09 प्रतिशत से अधिक बजट प्रावधान करके आदिवासी उपयोजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों के माध्यम से योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को दिया जा रहा है। आदिवासी वर्ग के शैक्षणिक विकास के लिये छात्रवृत्ति वितरण व्यवस्था को सुगम बनाया गया है। पिछले वर्ष 2019-20 में प्रदेश के करीब 25 लाख आदिवासी विद्यार्थियों को 465 करोड़ रूपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गयी। इस वर्ष छात्रवृत्ति का लाभ 27 लाख 57 हजार आदिवासी विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। इसके लिये राज्य सरकार ने अपने विभागीय बजट में 475 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है। आदिम जाति कल्याण विभाग की 34 हजार 440 शैक्षणिक संस्थाओं में 25 लाख 64 हजार विद्यार्थी अध्यनरत् है। आदिवासी वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के मकसद से आवासीय सुविधा के साथ 2629 छात्रावास आश्रम संचालित किये जा रहे है। इनमें डेढ़ लाख विद्यार्थियों की रहने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में संचालित 126 विशिष्ठ संस्थाओं में करीब 27 हजार 586 अनुसूचित जनजाति विद्यार्थी अध्ययन प्राप्त कर रहे है। प्रदेश में इस वर्ष नवीन छात्रावास और उच्चत्तर माध्यमिक शाला के उन्नयन के लिये बजट में प्रावधान किया गया है। प्रदेश में वर्ष 2020-21 में अनुसूचित जनजाति के 24 सीनियर छात्रावास और 15 महाविद्यालयीन छात्रावास प्रारंभ किये जाएंगे। इस वर्ष आदिवासी बहुल्य क्षेत्र के 50 हाई स्कूलों को उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में उन्नयन कर संचालित किया जाएगा।
आदिवासी वर्ग के ऐसे विद्यार्थी जिन्हें छात्रावासों में स्थान नहीं मिल पाता है। उनके लिये आवास सहायता योजना संचालित की जा रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन नगरों में प्रति विद्यार्थी प्रतिमाह 2 हजार रूपये, जिला मुख्यालय पर प्रति विद्यार्थी प्रतिमाह 1250 एवं तहसील विकासखण्ड मुख्यालय पर प्रति विद्यार्थी एक हजार रूपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पिछले वर्ष आवास सहायता योजना में करीब 69 हजार विद्यार्थियों को 110 करोड़ रूपये की राशि वितरित की गयी। इस योजना में इस वर्ष आदिवासी वर्ग के 70 हजार विद्यार्थियों को 165 करोड़ रूपये वितरित किये जाएंगे। आदिवासी वर्ग के विद्यार्थी विदेशों में प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश कर अध्ययन कर सकें। इसके लिये विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना चलाई जा रही है। योजना में चयनित विद्यार्थियों को दो वर्ष के लिये अधिकतम 75 लाख रूपये की राशि उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान रखा गया है। पिछले वर्ष 4 विद्यार्थियों को इस योजना में करीब 198 लाख रूपये की मदद दी गई। इस वर्ष योजना में 2 करोड़ 20 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। आदिवासी वर्ग के विद्यार्थी यूपीएससी की कोचिंग प्राप्त कर सकें इसके लिये नई दिल्ली में 100 विद्यार्थियों कोचिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस वर्ष 100 विद्यार्थियों की कोचिंग पर 5 करोड़ रूपये का विभाग द्वारा प्रावधान किया गया है। प्रदेश में रहने वाले आदिवासियों की संस्कृति के संरक्षण और उनके कुल एवं ग्राम देवी-देवता के स्थानों में निर्मित देवठान के निर्माण और जीर्णोद्धार पर विशेष व्यवस्था किये जाने के लिये 8 करोड़ 40 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि से इन स्थानों पर सामुदायिक भवन, सभाकक्ष, पेयजल, विद्युत व्यवस्था आदि की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा आदिवासी वर्ग के लिये चलाई जा रही योजनाओं का कम्प्यूटरीकरण कर ऑनलाइन लाभ देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रोफाईल पंजीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 9 लाख 40 हजार आदिवासी हितग्राहियों का ऑनलाइन प्रोफाइल पंजीकरण किया गया है। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में डीव्हीटी द्वारा उनके आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान किये जाने की व्यवस्था की गयी है। आदिवासी वर्ग के 78 हजार 688 विद्यार्थियों को उनके बैंक खातों में 115 करोड़ रूपये की राशि ट्रांसफर की गयी है। शिक्षक प्रोफाईल पंजीकरण में अध्यापक संवर्ग के 55 हजार अध्यापकों का विभाग में ऑनलाइन संविलियन आदेश जारी किये गये है। छात्रावास योजना में विभाग के 1563 छात्रावासों में 57 हजार 274 विद्यार्थियों को करीब 75 करोड़ रूपये की राशि ऑनलाइन भुगतान के लिये ऑनबोर्ड की गई है। आकांक्षा योजना में आदिवासी वर्ग के विद्यार्थी जेईई, नीट और क्लेट की प्रवेश परीक्षा की तैयारी प्रदेश के चार महानगरों जबलपुर भोपाल ग्वालियर इंदौर में कर सकें। इसके लिये इस वर्ष एक हजार विद्यार्थियों को कोचिंग दिये जाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिये 11 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।
आदिवासी बहुल गांवों की बदलेगी तकदीर
प्रदेश में 11 हजार 294 आदिवासी बहुल ग्रामों की तस्वीर अब बदलेगी। सबकुछ योजना के तहत हुआ तो आदिवासी खुद ही ग्रामों में विकास का नया ढांचा तैयार करेंगे। इसके लिए 3 लाख आदि कर्मयोगी तैयार किए जाएंगे। दरअसल केंद्र सरकार ने आदि कर्मयोगी योजना बनाई है। इस योजना में देशभर में 29462 ग्रामों में बीस लाख आदि कर्मयोगी तैयार किए जाएंगे। केंद्र सरकार आदिवासी बहुल गांवों की गलियों को चमकाने के लिए आदि कर्मयोगी योजना लेकर आई है। इसकी शुरूआत दो अक्टूबर से करने की तैयारी है। प्रारंभिक चरण में योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है। इसमें सिविल सोसाइटी संगठन ( सीएसओ ) की मुख्य भूमिका होगी। योजना के प्रारंभिक चरण में पांच विभागों के अधिकारी प्रशिक्षण लेकर भी लौट आए हैं। जो जिला व ब्लॉक स्तर के गांव में कर्मयोगी तैयार करेंगे। ग्रामों को विकसित करने 18 विभागों को जिम्मेदारी सौंपी है। जनजातीय कार्य विभाग, पंचायत, महिला बाल विकास,, स्वास्थ्य, वन, पीएचई समेत अन्य विभागों की 25 स्कीम शामिल हैं। आदि कर्मयोगी अभियान के तहत रेस्पॉन्सिव गवर्नेंस प्रोग्राम में स्टेट स्तर पर पांच विभाग जनजाति कार्य, पंचायत, महिला बाल विकास, स्वास्थ्य, पीएचई व वन के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। एक सितंबर से जिला, ब्लाक व ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण की तैयारी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गतदिनों नईदिल्ली के विज्ञान भवन में आदि कर्मयोगी अभियान पर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में मप्र को सम्मानित किया। प्रदेश के प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा ने मप्र के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार ग्रहण किया। उन्होंने जनजातीय समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुति दी। मप्र को आदि कर्मयोगी अभियान के क्रियान्वयन में देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम पांच राज्यों में स्थान मिला है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय द्वारा आदि कर्मयोगी अभियान जनजाति समुदायों के सामाजिक आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य जनजाति क्षेत्र में ग्राम स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना, योजनाओं का प्रभावी अमल सुनिश्चित करना और शासन को और ज्यादा जवाबदेह बनाना है। यह अभियान सेवा, संकल्प और समर्पण जैसे मूल्यों पर आधारित है जो जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रमुख सचिव जनजाति कार्य गुलशन बामरा ने मप्र में जनजातीय विकास की स्थिति की पर जानकारी देते हुए कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान में 1 लाख 41 हजार आदि सहयोगी काम कर रहे हैं। इसके साथ एक लाख 92 हजार आदि साथी और 1210 अशासकीय संगठन जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसका लक्ष्य तीन लाख चेंज लीडर्स तैयार करना है जो निचले स्तर पर जनजातीय विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद कर रहे हैं। जनजातीय बंधुओं की मदद के लिए 13,000 आदि सेवा केंद्र बनाए गए हैं। जनजाति क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शाला छोडऩे वाले बच्चों पर निगरानी रखी जा रही है। वर्तमान में माता शबरी आवासीय बालिका शिक्षा कंपलेक्स, हॉस्टल, आदर्श आवासीय स्कूल, एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल, आश्रम स्कूल, खेल परिसर मिलाकर 2,913 संस्थाएं संचालित है जिनमें 2 लाख 30 हजार विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। मलेरिया, टीबी, एनीमिया की रोकथाम के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। पीएम जनमन योजना के अंतर्गत हितग्राही मूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में मप्र में उत्कृष्ट कार्य हुआ है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराने में 100त्न उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड जारी करने में शिवपुरी, मैहर, रायसेन, कटनी और भिंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उल्लेखनीय है कि आदि कर्मयोगी अभियान में 14 हजार गांवों के विलेज एक्शन प्लान बन चुके हैं। ग्राम सभा से इनका अनुमोदन कराया गया है। इन गांवों में 13 हजार से ज्यादा आदि सेवा केंद्र स्थापित हो चुके हैं। आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पीएम किसान, जन धन, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, राशन कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज जारी किए गए है।
खंडवा में बनेगा आदिवासी लोक
जनजातीय कार्य विभाग ने खंडवा जिले में लगभग 500 एकड़ भूमि पर आदिवासी लोक के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है। यहां आदिवासी समाज की परंपराएं, रीति-रिवाज, लोक जीवन, कला, साहित्य और इतिहास को एक ही परिसर में सहेजा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि आदिवासी संस्कृति सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी उसे देखे, समझे और महसूस करे। मप्र में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए सरकार निरंतर बड़े कदम उठा रही है। उज्जैन में महाकाल लोक, इंदौर में अहिल्या लोक और सागर में संत रविदास लोक के बाद अब खंडवा को एक और महत्वपूर्ण सौगात मिलने जा रही है। खंडवा में प्रदेश का पहला आदिवासी लोक बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 100 करोड़ रुपये होगी। यह आदिवासी लोक न सिर्फ मप्र बल्कि पूरे देश में आदिवासी संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। जनजातीय कार्य विभाग ने खंडवा जिले में लगभग 500 एकड़ भूमि पर आदिवासी लोक के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है। यहां आदिवासी समाज की परंपराएं, रीति-रिवाज, लोक जीवन, कला, साहित्य और इतिहास को एक ही परिसर में सहेजा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि आदिवासी संस्कृति सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी उसे देखे, समझे और महसूस करे। प्रस्तावित आदिवासी लोक में आदिवासी समाज से जुड़े महापुरुषों और नायकों की गाथाओं को विशेष रूप से दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही यहां एक भव्य कला और संस्कृति संग्रहालय विकसित किया जाएगा, जिसमें आदिवासी चित्रकला, मूर्तिकला, हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।। इसके अलावा एक औषधीय उद्यान भी बनाया जाएगा। जहां आदिवासी समाज द्वारा उपयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियों और पारंपरिक औषधियों का संरक्षण और शोध किया जाएगा।
आदिवासी लोक सिर्फ निमाड़ अंचल तक सीमित नहीं रहेगा। यहां देशभर के विभिन्न आदिवासी समुदायों की जीवनशैली, पहनावा, आभूषण, नृत्य, लोकगीत और परंपराओं को भी शामिल किया जाएगा। इसके जरिए आमजन को आदिवासी मान्यताओं से रूबरू कराया जाएगा और पर्यटकों के लिए भी यह एक बड़ा आकर्षण बनेगा। इस आदिवासी लोक में शोध केंद्र की स्थापना की जाएगी, जहां आदिवासी ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और जीवनशैली पर अध्ययन किया जाएगा। वहीं प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं को पारंपरिक कला के साथ आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर भी मिल सकेंगे। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने आदिवासी लोक को लेकर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ के साथ चर्चा कर ब्लू प्रिंट को अंतिम रूप दे दिया है। करीब दो माह पहले इसकी रूपरेखा तैयार हो चुकी थी और अब भूमि आवंटन की कागजी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। खंडवा के समाजसेवी और प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि यह परियोजना भारतीय संस्कृति और आदिवासी विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की मंशा है कि आदिवासी समाज के महापुरुषों के जीवन और योगदान को हर व्यक्ति जाने और समझे, इसी उद्देश्य से आदिवासी लोक की परिकल्पना की गई है। सुनील जैन के अनुसार, खंडवा का चयन विशेष रूप से किया गया है, क्योंकि यह शहर दादाजी धूनीवाले की नगरी के रूप में जाना जाता है। आदिवासी लोक में दादाजी धूनीवाले की स्मृति के साथ-साथ खंडवा के गौरव, महान गायक किशोर कुमार की स्मृति को भी स्थान दिया जाएगा। समाजसेवी सुनील जैन का कहना है कि आदिवासी लोक बनने से खंडवा को पर्यटन, रोजगार और पहचान-तीनों स्तर पर बड़ा फायदा होगा। करीब 500 एकड़ क्षेत्र में बनने वाला यह आदिवासी लोक न सिर्फ खंडवा बल्कि पूरे निमाड़ और मप्र के लिए एक नई पहचान बनेगा। 100 करोड़ की लागत से बनने वाला यह आदिवासी लोक आने वाले समय में आदिवासी समाज की संस्कृति, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक बनेगा। साथ ही यह परियोजना खंडवा को प्रदेश के सांस्कृतिक नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करेगी। खंडवा के लिए यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आदिवासी विरासत को सहेजने और दुनिया तक पहुंचाने की ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
