सरकार ने आउटसोर्स नियुक्ति का तीन साल पुराना फैसला पलटा

  • चतुर्थ श्रेणी में अब नहीं होगी आउटसोर्स भर्ती, नियमित नियुक्ति पर पहले से है प्रतिबंध

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी के पदों को आउटसोर्स से भरने के लिए राज्य शासन द्वारा पौने तीन साल पहले जारी किया गया आदेश निरस्त कर दिया गया। आदेश निरस्त होने के बाद अब किसी भी विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जा सकेगी। सरकार चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पहले ही बंद कर चुकी है। पौने तीन साल पहले जारी आदेश में कहा गया था कि नियमित पदों के लिए भर्ती होने तक आउटसोर्स के रूप में यह सेवाएं ठेकेदारों के माध्यम से ली जा सकेंगी। वित्त विभाग द्वारा 31 मार्च 2023 को विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की सेवाएं आउटसोर्स के माध्यम से रखने को लेकर नीति-निर्देश जारी किए थे। यह निर्देश नियमित कर्मियों की उपलब्धता में हो रही देरी और तात्कालिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए थे। इसमें कहा गया था कि जिन रिक्त पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर पद पूर्ति जरूरी है, उन्हें पहले संबंधित विभागाध्यक्ष द्वारा चिह्नित किया जाएगा। आदेश में कहा गया था कि आउटसोर्स एजेंसी का चयन विभागाध्यक्ष या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा किया जाएगा। वित्त विभाग ने यह भी निर्देश दिए थे कि आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं केवल उन्हीं बजटीय योजनाओं के अंतर्गत ली जाएंगी, जहां योजना में ऐसा व्यय अनुमति में शामिल हो। इसके लिए बजट की उपलब्धता अनिवार्य होगी तथा बजट प्रावधानों के अभाव में आउटसोर्स एजेंसी से सेवाएं नहीं ली जाएंगी। आदेश में यह भी कहा गया था कि आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं नियमानुसार केवल ठेकेदार एजेंसी के माध्यम से ली जाएंगी।
सरकार आउटसोर्स सेवा दे रहे कर्मचारियों को नियमित करे
मध्य प्रदेश अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा है कि चतुर्थ श्रेणी के शासकीय पद समाप्त कर उन पर आउटसोर्स से कर्मचारी भर्ती किए जाने के पौने तीन साल पुराने सरकार के निर्णय को निरस्त कर संवेदनशीलता दिखाई है, हमारा संगठन लगातार सभी विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सवालों को उठाते हुए मांग कर रहा था कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती आउटसोर्स से नहीं करके सरकार खुद इनकी नियुक्ति की जिम्मेदारी उठाए। सरकार से हमारी मांग है कि ग्राम पंचायत, स्कूल शिक्षा, आदिम जाति के स्कूल छात्रावासों, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, बिजली विभाग, फारेस्ट, नगरीय निकाय, सहकारिता, कोऑपरेटिव एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत, अंशकालीन, अस्थाई, आउटसोर्स जैसे सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तत्काल नियमित किया जाना चाहिए, जिससे उनके साथ 15-20 साल से होता आ रहा अन्याय खत्म हो और वे भी निश्चितता का जीवन व्यतीत कर सकें।

Related Articles