
- गेंहू उपार्जन की तारीख बढ़ाकर फंस गए अफसर
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर मध्य प्रदेश के किसानों पर भी दिखाई दे रहा है। गेहूं खरीदी के लिए जरूरी पीपी बैग की कमी की वजह से मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद को लगातार टाला जा रहा है। प्रदेश में गेहूं खरीद की तारीख 3 बार बढ़ाई जा चुकी है। अब समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की नई तारीख 10 अप्रैल तय की गई है। लगातार गेहूं खरीद की तारीख बढ़ाए जाने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए किसानों को खुले बाजार में गेहूं बेचना पड़ रहा है, जहां उन्हें समर्थन मूल्य से 400 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे किसानों में नाराजगी है। किसानों की नाराजगी के कारण सरकार के निशाने पर अफसर आ गए हैं।
जानकारी के अनुसार, गेहूं खरीदी की तारीख तीसरी बार बढ़ाने की सिफारिश करके राज्य के कई वरिष्ठ अफसर बुरे फंस गए हैं। ये मुख्यमंत्री व मंत्री के निशाने पर हैं। वजह, मैदानी स्तर पर किसानों की भारी नाराजगी है। जिम्मेदार अफसरों ने खरीदी के लिए संसाधनों की कमी बताकर तारीखें तीन बार आगे बढ़वा ली, लेकिन पूर्व से पता होने के बावजूद इंतजाम जुटाने पर जोर नहीं दिया। यहां तक कि कई जिलों में तो 100 प्रतिशत खरीदी केंद्र तक तय नहीं किए। इससे राज्य सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन की तैयारियों की पोल खुल गई। सारे दावे उलट पड़ रहे हैं। इस बीच प्रदेश भर के किसानों की मांग है कि हर हाल में खरीदी 10 अप्रैल के पहले शुरू की जाए, ऐसा नहीं किया तो वे बर्बाद हो जाएंगे। किसान संगठनों के प्रमुख जल्द ही मुख्यमंत्री और मंत्री से मुलाकात की तैयारी कर रहे है। बता दें कि प्रदेश में सबसे पहले 1 फरवरी से गेहूं खरीदी की जानी थी। फिर यह तारीख 16 मार्च की, उसके बाद 1 अप्रेल और अब 10 अप्रैल से खरीदी करने का दावा किया जा रहा है।
किसानों में नाराजगी
बार-बार गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ाए जाने से किसान नाराज हैं। दरअसल, मप्र के 20 से 40 फीसद जिलों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है इसलिए यहां के किसान गेहूं की बौवनी जल्दी कर देते हैं। ऐसे जिलों में मार्च के पहले सप्ताह में तो लगभग कटाई व गहाई पूरी हो जाती है। वे अपनी उपज समर्थन मूल्य में बेचने के इंतजार में बैठे हैं। तीन बार तारीख बढ़ाने के पीछे के कारण नहीं बताए, सिर्फ प्रेसनोट जारी किए। किसानों को लग रहा है कि सरकार एकतरफा निर्णय ले रही है। किसानों ने विभिन्न बैंकों से कर्ज लेकर रखा है, जिसे 31 मार्च तक चुकाना था, लेकिन गेहूं नहीं बिकने के कारण चुका नहीं पाए। उन्हें जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। विवाह व अन्य धार्मिक आयोजनों का मुहूर्त है। एक मुहूर्त तो जनवरी-फरवरी में निकल चुका है, दूसरा अप्रैल में है। ऐसे समय में किसान शादी-विवाह समेत अन्य धार्मिक कार्य करते हैं। इसके लिए फसल बेचने पर ही रुपए आते हैं।
जूट के बोरों का होगा उपयोग
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए सबसे ज्यादा वारदाना यानी पीपी और एचडीपीपी बैग की जरूरत होती है। इसकी मध्य प्रदेश में भारी कमी है। यह प्लास्टिक बैग पेट्रोलियम उत्पादों से बनते हैं। ईरान युद्ध की वजह से प्रभावित हुई पेट्रोलियम सप्लाई की वजह से प्लास्टिक बैग का उत्पादन और इसकी सप्लाई भी प्रभावित हुई है। मध्य प्रदेश में अभी 35 लाख टन गेहूं को रखने के लिए ही वारदानों की व्यवस्था है, लेकिन इससे 3 गुना वारदानों की जरूरत है। हालांकि जूट कमिश्नर द्वारा ढाई करोड़ बोरे मध्य प्रदेश के लिए आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा एक लाख 80 हजार गठान के टेंडर जारी किए गए हैं। एक गठान में 500 बोरे होते हैं। पीपी बैग की कमी को देखते हुए जूट के बोरे का उपयोग किए जाने का निर्णय किया गया है। इसके अलावा एक बार उपयोग हो चुके जूट के बोरों का भी उपयोग करने के लिए कहा गया है।
जीतू करेंगे कृषि मंत्री के बंगले के सामने करेंगे उपवास
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने पीएम को पत्र लिखकर केंद्र और राज्य सरकार में समन्वय और प्रदेश की मंडियों में गेहूं के लिए बारदाने का जल्द पर्याप्त प्रबंध कराने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि ऐसा नहीं होने पर वे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित निवास के समक्ष उपवास पर बैठेंगे। उन्होंने लिखा कि यह कितनी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि देश के कृषि मंत्री के अपने ही गृह राज्य में किसान एक अदद बोरे के लिए तरस रहे हैं। आरोप लगाया कि वर्तमान प्रदेश सरकार और केंद्रीय कृषि मंत्री के बीच चल रही कथित राजनीतिक अदावत और वर्चस्व की लड़ाई की कीमत प्रदेश के किसानों को चुकानी पड़ रही है। इस अंतर्कलह के कारण ही राज्य सत्ता केंद्र सरकार पर किसानों के हक के लिए कोई दबाव ही नहीं बना पा रही है। वहीं चुनावी वादे के बावजूद किसानों से 2700 में गेहूं भी नहीं खरीदा जा रहा है।
