एमपी में सरकार ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नियम जारी किए…

  • डेवलपर को 80 प्रतिशत भूमि और अनिवार्य पंजीयन शर्त

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राज्य शासन ने मध्य प्रदेश एकीकृत टाउनशिप नियम 2026 जारी कर दिए हैं। नए नियमों के तहत इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने वाले डेवलपर को नगर एवं ग्राम निवेश विभाग में पंजीयन कराना होगा और प्रस्तावित परियोजना के लिए कम से कम 80 प्रतिशत भूमि का स्वामित्व हासिल करना अनिवार्य होगा। पांच लाख से अधिक आबादी वाले भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में टाउनशिप प्रस्तावों पर निर्णय शासन स्तर की समिति करेगी। पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों में कलेक्टर की अध्यक्षता में साधिकार समिति अनुमोदन देगी।
66 वर्ग मीटर तक अफोर्डेबल आवास का प्रावधान
नियमों में अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत अधिकतम 66 वर्ग मीटर तक के आवास निर्माण की अनुमति दी गई है। परियोजना स्थल एक ही स्थान पर होना चाहिए। केवल राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग या प्रमुख जिला मार्ग से विभाजित स्थिति में छूट रहेगी। डेवलपर के पंजीयन के लिए संचालक नगर एवं ग्राम निवेश को पंजीयन अधिकारी बनाया गया है। आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। 15 दिन के भीतर आवेदन स्वीकृत या निरस्त किया जाएगा। निरस्तीकरण की स्थिति में 20 प्रतिशत कटौती के बाद शुल्क वापस होगा। पंजीयन शुल्क 50 हजार रुपए और नवीनीकरण शुल्क 25 हजार रुपए तय किया गया है। पंजीयन पूरे राज्य में मान्य रहेगा। डेवलपर को शपथ पत्र देना होगा कि वह किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं है। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी सदस्य होंगे। अन्य जिलों में कलेक्टर अध्यक्ष होंगे और संबंधित स्थानीय अधिकारी सदस्य रहेंगे। बड़े जिलों में नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय नोडल एजेंसी होगा, जबकि अन्य में संयुक्त संचालक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
भूमि अधिग्रहण में प्रशासनिक सहयोग का प्रावधान
डेवलपर को कम से कम 80 प्रतिशत भूमि स्वयं प्राप्त करनी होगी। शेष भूमि के लिए आवश्यकता होने पर प्रशासनिक सहयोग लिया जा सकेगा। पारस्परिक सहमति के माध्यम से भूमि एकत्र करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
10 से 20 हेक्टेयर न्यूनतम भूमि की शर्त
नियमों के अनुसार पांच लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में एकीकृत टाउनशिप के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में यह सीमा 20 हेक्टेयर तय की गई है। स्थानीय निकाय सीमा या योजना क्षेत्र में 40 हेक्टेयर या अधिक क्षेत्रफल वाली परियोजनाओं के लिए कम से कम 30 मीटर चौड़ी सडक़ अनिवार्य होगी। बड़े शहरों में विकास योजना सडक़ की चौड़ाई 24 मीटर निर्धारित की गई है।

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