घाटे में मूंग बेचने को मजबूर सरकार

  • अभी भी गोदामों में भरा है 9.37 लाख मीट्रिक टन मूंग

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र सरकार हर साल किसानों से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद रही है। लेकिन विडंबना यह है कि उस मूंग को बाजार में खरीदने वाला नहीं मिल पा रहा है। इसे खुले बाजार में बेचने के लिए मार्कफेड कई बार टेंडर जारी कर चुका है, लेकिन खरीदने वाले व्यापारी आगे नहीं आ रहे हैं। इस कारण प्रदेश के कई गोदामों में 3 साल से 9.37 लाख मीट्रिक टन मूंग डंप है। आलम यह है कि किसानों से खरीदे गए मूंग का भाव नहीं मिलने के कारण सरकार उसे घाटे में बेचने को मजबूर हो रही है। साल 2022 में सरकार ने 208 करोड़ के नुकसान पर मूंग बेचा है। जानकारों का कहना है कि बाजार में मूंग के दाम कम होने से इसे लेने के लिए कारोबारी सामने नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा बाजार में मूंग की क्वालिटी ज्यादा बेहतर होती है। ताजी मूंग हर साल बाजार में आ जाती है। इसके चलते कारोबारी इसे लेने के लिए ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। बाजार और मार्कफेड के मूंग की दरों में 500 से 1000 रुपए तक का अंतर होता है।

जानकारी के अनुसार सरकार के लिए मूंग सिरदर्द बनती जा रही है। किसानों को साधने के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार ने चुनाव से पहले मूंग खरीदी का निर्णय लिया था। इसे खुले बाजार में बेचने के लिए मार्कफेड कई बार टेंडर जारी कर चुका है, लेकिन खरीदने वाले व्यापारी आगे नहीं आ रहे हैं। सिर्फ वर्ष 2022 में एमएसपी पर खरीदी गई मूंग ही पूरी से बिकी है। इसमें भी सरकार को 208 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। वर्ष 2023, 2024 और 2025 की करीब दस लाख मीट्रिक टन मूंग अभी गोदामों में ही रखी है। गौरतलब है कि मूंग बेचने की दरें मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी करती है। यह कमेटी समय-समय बाजार भाव की समीक्षा कर इसके रेट ऊपर नीचे करती रहती है। बाजार में वर्ष 2025 की मूंग के रेट 65 सौ रुपए प्रति क्विटल है। इसके चलते इन दरों पर कारोबारी मूंग लेने के लिए तैयार नहीं हैं। कमेटी ने जिन दरों पर मूंग बेचने की अनुमति दी है उसके अनुसार 2025 में 7,500 रूपए प्रति क्चिटल, 2024 में 6,500 रूपए प्रति क्विंटल और 2023 में 5,500 रुपए प्रति क्विंटल  का भाव है। वर्ष 2022 से 2025 तक 23.86 लाख मी.टन मूंग खरीदी गई है। सरकार ने 14.49 लाख मी.टन मूंग बेची है। वहीं  अभी तक गोदामों में 9.37 लाख मी.टन मूंग रखी है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में 208 करोड़ और वर्ष 2023 में 300 करोड़ रूपए के आर्थिक नुकसान संभावित हैं।

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