56,414 करोड़ के निवेश में हीरे के साथ सोना भी मिलेगा

  • माइनिंग कॉन्क्लेव में हुई निवेश की बारिश

गौरव चौहान
 भोपाल। कटनी जिले में खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पहली बार मिनरल कॉन्क्लेव का आयोजन हुआ। इस आयोजन की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आयोजन में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के लगभग 2 हजार उद्योगपतियों ने भाग लिया और कटनी की खनिज संपदा को लेकर अपार संभावनाएं भी बताई। प्रदेशभर में खनिज क्षेत्र को लेकर जबरदस्त संभावनाओं का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक 56,414 करोड़ से ज्यादा निवेश प्रस्ताव सामने आ चुके हैं। यानी माइनिंग कॉन्क्लेव में निवेश की जमकर बारिश हुई। जिससे हीरे के साथ सोना भी मिलेगा।
 कॉन्क्लेव के दौरान बड़े उद्योगपतियों ने कटनी को निवेश की नई सौगातें दीं। सिंघल बिजनेस ग्रुप ने 15 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। रमणी पावर ने 1850 करोड़ का निवेश करने की बात कही। महाकौशल ग्रुप ने 90 करोड़ का निवेश प्रस्ताव रखा है। प्रदेश में निवेश की संभावनाएं 56,414 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बताई जा रही हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। सीएम ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध मध्यप्रदेश में अब हीरे के साथ सोना भी मिलेगा। सीएम ने कहा कि राज्य की बेहतरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और खनिज उद्योगों को नई नीतियों से सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह भी बताया कि कटनी को एक और बड़ी सौगात मिलने वाली है। आगामी 25 अगस्त को कटनी और पन्ना जिले को मेडिकल कॉलेज का तोहफा मिलेगा। कटनी का यह आयोजन प्रदेश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हो सकता है।
सीएम ने उद्योगपतियों से किया वर्चुअल संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माइनिंग कॉन्क्लेव में देश-विदेश के उद्योगपतियों से वर्चुअल संवाद किया। इस दौरान उद्योगपतियों ने प्रदेश की खनन नीति की सराहना कर इसे निवेश अनुकूल बताया। सीएम ने राजीव मुंद्रा (कोलकाता), जेपी अग्रवाल (श्रीलंका), विवेक भाटिया (दिल्ली), वी साईराम (कोचीन) व थॉमस चेरियन (हैदराबाद) से चर्चा की। उद्योगपतियों ने कहा कि मप्र की सरल और सहज औद्योगिक नीतियों ने निवेश प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। विवेक भाटिया ने कहा कि भारत में मध्यप्रदेश को बिल्कुल अलग नजरिए से देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीआईआई से जुड़ी 100 से अधिक माइनिंग कंपनियां प्रदेश में निवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं। वी साईराम ने बताया कि उनकी कंपनी देश के कुल कोयला उत्पादन का 18 प्रतिशत योगदान देती है और सिंगरौली क्षेत्र कोयला उत्पादन का बड़ा केंद्र बन चुका है। थॉमस चेरियन ने क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता पर कहा कि मप्र इस दृष्टि से देश के लिए महत्वपूर्ण है और आदित्य बिरला समूह सरकार के साथ साझेदारी को तैयार है।
उद्योगपतियों ने साझा किए अनुभव
हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के चेयरमैन संजीव कुमार सिंह ने कहा कि भारत में तांबे के उपयोग का प्राचीन इतिहास है और मध्यप्रदेश तांबा उत्पादन में अग्रणी बन सकता है। कंपनी ने राम मंदिर निर्माण के लिए 32 टन कॉपर दान किया है। माइन वेयर एडवायजर के एमडी कौशिक बोस ने बताया कि उनकी कंपनी राज्य में 450 करोड़ का निवेश कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त किया। वहीं कटनी जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि आधारित प्रदेश की छवि को बदलते हुए औद्योगिक विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि पहले उद्योग की चर्चा में गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों का नाम लिया जाता था. लेकिन अब मध्यप्रदेश भी इस सूची में तेजी से जुड़ रहा है। खजुराहो सांसद वीडी शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती रत्नगर्भा है और कटनी में आयोजित यह कॉन्क्लेव प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि कटनी में माइनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाए ताकि युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिल सकें।
मप्र ऐसा राज्य, जहां हर खनिज उपलब्ध
प्रमुख सचिव खनिज संसाधन उमाकांत उमराव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का इकलौता राज्य है जहां लगभग हर खनिज उपलब्ध है। प्रदेश हीरा, सोना, कॉपर, लाइमस्टोन और ग्रेफाइट के उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि देश के दिल मध्यप्रदेश में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। यहां खनिजों के दोहन के लिए आवश्यक अधोसंरचना और कुशल मानव संसाधन दोनों मौजूद हैं। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में 1 लाख एकड़ से अधिक लैंड बैंक और बिजली की अधिशेष उपलब्धता है। कॉन्क्लेव में राज्य शासन ने क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और संवर्धन के लिए कोल इंडिया लिमिटेड सहित कई संस्थानों के साथ एमओयू किए। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और रिमोट सेंसिंग तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के समझौते शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भोपाल के साथ खनिज अनुसंधान के लिए भी एमओयू हुआ। कटनी का यह माइनिंग कॉन्क्लेव न केवल निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है बल्कि प्रदेश को खनन क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में ठोस कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार निवेशकों के हर वादे को पूरा करेगी और प्रदेश को औद्योगिक मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाएगी।

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