- पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम बोले- विपत्ति आती है तो लोग पुलिस पर भरोसा करते हैं
- गौरव चौहान

भोपाल। के लाल परेड ग्राउंड पर पुलिस स्मृति दिवस परेड के मौके पर नए शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सीएम डॉ मोहन यादव शामिल हुए। कार्यक्रम में डीजीपी कैलाश मकवाना, एसीएस डॉ राजेश राजौरा सहित पुलिस विभाग के तमाम अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम में पुलिस जवानों ने शहीद पुलिस जवानों और अफसरों को सलामी दी। सीएम ने कहा- कर्तव्य की बलिबेदी पर प्राणों का उत्सर्ग करने वालों से हमें प्रेरणा मिलती है। एक साल में 11 जवानों का हमारे बीच से जाने का कष्ट है लेकिन हमारे लिए कर्तव्य के भाव से व्यवस्थाओं के समर्पण से गर्व का क्षण भी है। हम अपने जवानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए वे हमें सदैव प्रेरणा देते रहेंगे। मध्य प्रदेश को शांति का टापू कहा जाता है। पुलिस की सतर्कता और समर्पण का प्रतीक है कि हमारे पुलिस जवान आदर्श वाक्य देशभक्ति जनसेवा को चरितार्थ कर रहे हैं। ये उसी का प्रतिफल है। प्रदेश में चाहे नक्सल समस्या हो, माफिया विरोधी कार्रवाई हो, साइबर अपराध नियंत्रण, जनजागरूकता अभियान में दृढ़ता से पुलिस जवान ड्यूटी करते दिखते हैं।
विपत्ति आती है तो लोग पुलिस पर भरोसा करते हैं
सीएम ने कहा- जब भी कोई विपत्ति आती है तो लोग पुलिस पर भरोसा करते हैं, डायल 100 या 112 याद आता है। पुलिस स्वास्थ्य, अग्निशमन, साइबर राहत, महिला बाल विकास, प्राकृतिक आपदा, सडक़ दुर्घटना में एकमेव सहारा पुलिस का होता है। पुलिस का मनोबल बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। मैं स्वयं बालाघाट गया था जब नक्सल विरोधी मूवमेंट में हमारे जवानों ने आउट ऑफ टर्म प्रमोशन हासिल किया। 64 अधिकारियों और जवानों के बीच मैंने नक्सलवादी मूवमेंट में आपका हौसला बढ़ाने का काम किया था।
विधायक की जान बचाने वाले पीएसओ की तारीफ की
सीएम ने कहा- पुलिस छोटे-छोटे त्वरित और अच्छे उदाहरण प्रस्तुत करती है। मुझे एक घटना याद आती है। इंदौर में हमारे विधायक मधु वर्मा की हार्ट अटैक के कारण हालत सीरियस हो गई थी। उनके साथी जवान जो मूलत: उनकी सुरक्षा में था उन्होंने उनकी जान बचाई। कृत्रिम सांस देकर पंपिंग करते हुए जब हार्ट की स्थिति खराब होती है तब त्वरित गति से अस्पताल पहुंचाया। और अपने एमएलए की जान बचाई और हमें पुलिस पर गर्व करने का मौका दिया। ऐसे छोटे छोटे प्रयोग लेकिन हिम्मत और युक्ति बुद्धि से जो काम करते हैं उनकी सराहना होनी चाहिए। हमारे बीच में से कोई शहादत देता है तो सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी दिखाई देना चाहिए। हमने उस भावना को व्यक्त करते हुए एक करोड़ की आर्थिक सहायता देते हुए उस भावना को व्यक्त किया।
डीजीपी ने बताया क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस
कार्यक्रम में डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा- 21 अक्टूबर देश की अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बलिदान की स्मृति का दिन है। 21 अक्टूबर 1959 को 16 हजार फीट की ऊंचाई पर लद्दाख के दुर्गम हॉटस्पिंग्स में उपनिरीक्षक करम सिंह के नेतृत्व में सीआरपीएफ की गश्ती दल की टुकड़ी के दस जवान चीनी सेना के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। उन्हीं की कर्तव्य परायणता और राष्ट्ररक्षा के लिए किए गए सर्वोच्चय बलिदान की स्मृति में देश की सभी पुलिस इकाईयां पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाती हैं। हमारी पुलिस के जवानों ने कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और गोवा से लेकर नागालैंड तक अपनी सेवाएं और शहादत दी हैं। इस वर्ष अपने कर्तव्य पथ पर हमारे 11 जवानों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया है। डीजीपी ने कहा- 21 अक्टूबर 1959 से 31 अगस्त 2025 तक एमपी के कुल 1009 जवान और अधिकारी कर्तव्य की बेदी पर शहीद हुए। सभी शहीदों के परिवारों की रक्षा और कल्याण हमारा दायित्व है। मुख्यमंत्री जी स्वयं पुलिस विभाग के हितों के लिए संवेदनशील हैं। मध्य प्रदेश पुलिस हर स्थिति में शांति सुरक्षा और विकास को सुदृढ बनाए रखने के लिए संकल्पित है।
सीएम ने पुलिस की बहादुरी के उदाहरण दिए
सीएम ने कुछ मामलों का जिक्र करते हुए कहा- बीते साल में डेढ़ करोड़ के इनामी दस नक्सलियों का समापन करते हुए हमारा मान बढ़ाया। जयपुर सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों की गिरफ्तारी हो या आतंकवादी तत्वों पर कड़ी कार्रवाई हो ये सब आपके उत्कृष्ट उम्दा और पराक्रम शाली उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 2026 तक नक्सली मूवमेंट के खात्मे का जो संकल्प लिया है। हम इसमें सफल होंगे। बालाघाट में पुलिस ने एकल सुविधा केन्द्र शुरू करके उनकी सुरक्षा और विकास का मजबूत माहौल बनाया है। अवैध हथियारों के निर्माण, संग्रहण और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। गौ तस्करी और गौवध करने वालों पर पुलिस के माध्यम से प्रशासन की जो सख्ती हो रही है, वो तारीफ योग्य है। कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से गुड टच बैड टच, बाल अधिकार पोषण, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों में प्रशिक्षण दे रहे हैं। डिजिटल युग में चुनौतियां अपार हैं, ऐसे में इनसे निपटने के लिए साइबर सेल, साइबर फोरेंसिक, डेटा एनालिसिस जीपीएस जैसी तकनीकों पर त्वरित कार्रवाई हो रही है।
