सत्ता और संगठन का फोकस ‘जी राम जी’ पर

  • राजनीतिक नियुक्तियों की चाह रखने वाले नेताओं को करना होगा अभी और इंतजार

गौरव चौहान
जब से केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी रामजी)किया है तब से कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष भाजपा और उसकी सरकार पर हमलावर हो गया है। ऐसे में जी राम जी योजना की खूबियां जनता को बताने के लिए मप्र सरकार के साथ भाजपा संगठन भी मैदानी मोर्चे पर सक्रिय हो गया है। सत्ता और संगठन का पूरा फोकस ‘जी राम जी’ पर होने के कारण फिलहाल निगम-मंडलों, बोर्डो में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों पर अघोषित विराम-सा लग गया है। ऐसे में राजनीतिक नियुक्तियों की चाह रखने वाले नेताओं को अभी और इंतजार करना होगा।
गौरतलब है कि प्रदेश में करीब 2 साल से भाजपा नेता राजनीतिक नियुक्तियों की आस लगाए हुए हैं। लेकिन किसी न किसी कारण टलते जा रही है। सरकार और संगठन ने फिलहाल निगम-मंडलों की नियुक्तियों को होल्ड पर रखा है। एक दर्जन से अधिक निगम-मंडलों में नियुक्तियों के नाम फाइनल होने के बाद इन्हें रोक दिया है। दरअसल सरकार और संगठन का फोकस अभी वीबी-जी रामजी को लेकर है। इस योजना के फायदे जनता तक पहुंचाने के लिए आयोजन किए जा रहे हैं। इसके चलते फिलहाल निगम-मंडलों की नियुक्तियों को रोक दिया है।
हरी झंडी मिलने के बाद फिर रुकी नियुक्तियां
गौरतलब है कि राजनीतिक नियुक्तियों के लिए पिछले तीन महीने से बैठकों का दौर चल रहा है। निगम-मंडल, बोर्ड सहित अन्य राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से भी हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन इन नियुक्तियों अब रोक दिया है। दरअसल सरकार और संगठन की पहली प्राथमिकता जी रामजी योजना है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो दिन पहले पत्रकारवार्ता का आयोजन किया था। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इसी योजना को लेकर प्रदेश के दौर पर हैं। उन्होंने इस आयोजन से जुड़ी जानकारी रतलाम में मीडिया के सामने रखी। सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में इस योजना को लेकर बैठकें करने का टारगेट भी नेताओं को दिया है। भाजपा इस योजना से जुड़ी हर जानकारी जनता तक पहुंचाना चाहती है। इसको लेकर कार्यकर्ताओं को घर-घर तक योजना के फायदे पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है। सरकार और संगठन इस योजना को घर-घर तक पहुंचाने के काम में अभी जुटे हुए हैं।
आयोगों, निकायों में नियुक्तियों की तैयारी
उधर, प्रदेश के आयोगों, जनश्चागीदारी समितियों और नगरीय निकायों में नियुक्तियां करने की तैयारी चल रही है। मप्र पीड़ितों के न्याय दिलाने के लिए गठित आयोग सालों से खाली पडे हैं। इनमें पदाधिकारी और सदस्यों की नियुक्तियां नहीं हो पाईं। इसको देखते अब सरकार सबसे पहले आयोगों में नियुक्ति की तैयारी कर रही है। प्रदेश में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य अनुसूचित जाति आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य सूचना आयोग, मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग, मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग में ज्यादातर में पद खाली पड़े हैं। इनमें से कुछ आयोगों में नियुक्ति की तैयारी शुरू हो गई है। वहीं प्रदेश के 500 से अधिक सरकारी कॉलेजों में वर्ष 2022 में जनभागीदारी समितियों में नियुक्तियां की गई थी। इनका कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। पिछले साल 3 नवंबर को 300 से अधिक जनभागीदारी समितियों का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। अन्य कॉलेजों की जनभागीदारी समितियों का कार्यकाल भी जल्द पूरा हो जाएगा। इसके चलते सरकार ने जनभागीदारी समितियों में भी नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जनभागीदारी समितियों का कार्यकाल तीन साल के लिए होता है। पहले चरण में 100 से अधिक कॉलेजों में जनभागीदारी समितियों की नियुक्तियां होगी। अन्य कॉलेजों में सांसद-विधायकों के बीच सहमति नहीं बनने से नियुक्तियां अटकी हुई है। वहीं प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति होना है। पहले चरण में 30 नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति सूची फाइनल हो चुकी है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर नगर निगमों में 12- 12 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे, जबकि मुरैना, सिंगरौली, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, उज्जैन, सागर, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, रतलाम, कटनी नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन की नियुक्तियां की जाना है। इसके अलावा 99 नगर पालिकाओं में से लगभग 70 नगर पालिकाओं में 6-6 एल्डरमैन और 264 में से लगभग 180 नगर परिषदों में 4-4 एल्डरमैन के नाम तय करने की कवायद जारी है। दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर निगमों में 12-12 एल्डरमैन नियुक्त किए जा सकते है। नगर पालिकाओं में यह संख्या कम होती है। इन नियुक्तियों में विधायकों की पसंद का ध्यान रखा जाएगा। इन नियुक्तियों के लिए विधायकों से उनकी पसंद के नाम भी मांगे गए है।

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