आयुष्मान योजना में गड़बड़ी कर किया करोड़ों का आर्थिक घोटाला

आयुष्मान योजना
  • पोर्टल से हटाई जरूरी जानकारी…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल में निजी अस्पताल द्वारा आयुष्मान योजना में गड़बड़ी कर करोड़ों रुपए का आर्थिक घोटाला किया गया है। वर्ष 2023 में सबसे पहले यह मामला सामने आया था। अब फिर एक बार भोपाल में पांच अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने पांच निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से सस्पेंड कर दिया है और सात दिन के भीतर अस्पताल संचालकों को उन पर लगे गंभीर आरोपों का जवाब देना होगा, यदि जवाब संतोषजनक नहीं दिए गए तो अस्पतालों को सूची से बाहर कर दिया जाएगा। दरअसल निजी अस्पतालों द्वारा बार बार आयुष्मान योजना में की जा रही आर्थिक गड़बड़ी की मुख्य वजह स्वास्थ्य विभाग का नरम रवैया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वह पोर्टल बंद कर दिया गया है, जिस पर निजी अस्पताल की तमाम जानकारी उपलब्ध रहती है। जिसमें अस्पताल संचालक का नाम, अस्पताल में मौजूद परमानेंट चिकित्सकों के नाम, नर्सिंग स्टाफ के नाम, रेट लिस्ट और सुविधाओं का ब्यौरा।
वेबसाइट पर अधूरी जानकारी
स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के अलावा आयुष्मान भारत निरामयम योजना की वेबसाइट पर भी अधूरी जानकारी है। वेबसाइट पर योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल का नाम तो दिया गया है, लेकिन आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल में कौन कौन सी बीमारियों का इलाज मिलेगा, यह नहीं बताया गया। इसका नुकसान तब होता है जब किसी अस्पताल में मरीज इलाज के लिए पहुंचता है और अस्पताल वाले मरीज की बीमारी योजना में न होने का हवाला देकर मरीज से नकद रुपए ऐंठ लेते हैं।
2023 में हुआ था घोटाला
आयुष्मान में सबसे पहले वर्ष 2023 में यह मामला सामने आया था। उस समय स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीन साल में कुल एक हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया था। इसमें 200 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था। इस मामले में आयुष्मान योजना कार्यालय मप्र द्वारा कार्रवाई करते हुए 120 निजी अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया था। हालांकि समय गुजरने के साथ उक्त 120 अस्पतालों में से कई अस्पताल नाम बदलकर फिर से योजना के तहत सूचीबद्ध हो चुके हैं। यह भी एक संयोग है कि मप्र आयुष्मान भारत निरामयम कार्यालय को फर्जीवाड़ा नियंत्रण के लिए देश में नंबर का अवार्ड दिया गया है। हाल ही में यह सम्मान मिला है। मप्र आयुष्मान कार्यालय द्वारा एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है जो निजी अस्पतालों की गड़बड़ी को तुरंत पकड़ लेता है, जिसमें इलाज के नाम पर की गई धांधली और अनियमित बिलिंग शामिल है।
निलंबित 5 अस्पतालों को एक सप्ताह में देना है जवाब
दो दिन पहले आयुष्मान मप्र द्वारा भोपाल के जिन 5 अस्पतालों को निलंबित किया है। उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है कि वह 7 अपना जवाब प्रस्तुत करें। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो अस्पताल को डि-इम्पैनल्ड कर दिया जाएगा, यानी यह अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत मरीज का इलाज नहीं कर सकेंगे। गड़बड़ी रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में हमें देश में बेहतर कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया है। जिन अस्पतालों पर हाल ही में कार्रवाई हुई है, उन्हें जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

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