सभी विभागों के खर्चों पर रहेगी वित्त विभाग की कड़ी निगरानी

  • बजट खर्च को लेकर विभागों को जारी की गई नई गाइडलाइन
  • गौरव चौहान
वित्त विभाग की कड़ी निगरानी

मप्र सरकार पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। विकास कार्यों को गति देने के लिए सरकार को हर महीने कर्ज लेना पड़ रहा है। इस कारण सरकार भारी-भरकम कर्ज के बोझ तले दबती जा रही है। मप्र सरकार पर वर्तमान में 5.25 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है, जबकि सरकार का बजट 4.38 लाख करोड़ है। इसको देखते हुए सरकार ने नए वित्तीय वर्ष के शुरू होते ही विभागों पर फिजूलखर्ची न करने की पाबंदी लगाते हुए बजट खर्च करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।  इसके साथ ही वित्त विभाग हर विभाग के खर्च पर नजर भी रखेगा।
गौरतलब है कि एक अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है। मप्र सरकार के वित्त विभाग ने सभी विभागों को पूरी बजट राशि आवंटित कर दी है। साथ ही मप्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट खर्च को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। वित्त विभाग ने इस संबंध में नई गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार विभागों को आवंटित की गई बजट राशि को खर्च करने के लिए सख्त अनुशासन का पालन करना होगा। वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि अब पहले जरूरत, फिर खर्च की नीति पर काम होगा। नई व्यवस्था के मुताबिक विभागों को राजस्व और पूंजीगत मदों में 100 प्रतिशत बजट तो मिलेगा, लेकिन खर्च तय प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकेगा। खासतौर पर नई योजनाओं में बिना मंजूरी के पैसा खर्च नहीं किया जा सकेगा। पहले सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति लेना होगी और उसके बाद वित्त विभाग की अनुमति मिलने पर ही राशि का उपयोग किया जा सकेगा।
साल के खर्च को चार हिस्सों में बांटा
सरकार ने इस बार पूरे साल के खर्च को चार हिस्सों यानी तिमाहियों में बांट दिया है। हर विभाग को अपनी जरूरत के हिसाब से तिमाही-वार खर्च तय करना होगा। यदि कोई विभाग समय पर यह सीमा तय नहीं करता है, तो उसे स्वत: हर तिमाही में 25 प्रतिशत खर्च की अनुमति ही मिलेगी। हालांकि वेतन, मजदूरी, छात्रवृत्ति, न्यायालयीन भुगतान, प्राकृतिक आपदा, ऋण अदायगी जैसे जरूरी खर्चों को इस सीमा से बाहर रखा गया है, ताकि जरूरी काम प्रभावित न हों। सरकार ने यह भी स्पष्ट स्पष्ट किया है कि पुराने बकाया भुगतान को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा। जब तक पुराने दायित्व पूरे नहीं हो जाते, तब तक नए खर्चों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कोषालय से राशि तभी निकाली जा सकेगी, जब वास्तविक देयता बन चुकी हो, यानी सिर्फ बजट उपलब्ध होने के आधार पर राशि निकालना संभव नहीं होगा। केंद्र प्रवर्तित योजनाओं को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है।
बजट से सहायता नहीं मिलेगी
सरकारी उपक्रमों और निगमों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने लेखे समय पर बंद करें, अन्यथा उन्हें बजट से सहायता नहीं मिलेगी। साथ ही उन्हें अपना लाभांश भी इसी वित्तीय वर्ष में सरकार के खाते में जमा करना होगा। सरकार ने यह भी तय किया है कि यदि किसी विभाग के बजट में बचत होती है, तो उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर वापस करना होगा, ताकि उस राशि का उपयोग अन्य जरूरी कार्यों में किया जा सके। वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जिन योजनाओं में बजट से बचत की संभावना हो, वहां विभाग समय पर समीक्षा कर 31 दिसंबर, 2026 तक हुए व्यय के आधार पर 15 जनवरी, 2027 से पहले बजट समर्पण की कार्यवाही सुनिश्चित करें, जिससे बची हुई राशि का उपयोग अन्य विभागों की जरूरत की पूर्ति में किया जा सके।

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