
- किसान संघ की मांग पर भू-अर्जन नीति में बड़े बदलाव के संकेत
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सरकारी परियोजनाओं के लिए ली जा रही जमीन को लेकर किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। सरकारी परियोजनाओं में ली जा रही जमीन को लेकर किसानों का गुस्सा अब सरकार तक पहुंच गया है। कम मुआवजा, पुरानी गाइडलाइन और अनदेखी के आरोपों के बीच सरकार नए भू-अर्जन मॉडल पर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। दरअसल, किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि योजना-परियोजना में आई किसान की जमीन का मुआवजा कलेक्टर गाइड लाइन नहीं बल्कि बाजार मूल्य के आधार पर दिया जाए। सरकारी परियोजनाओं में जाने वाली जमीनों के बदले अब मध्य प्रदेश के किसानों को भी महाराष्ट्र, हरियाणा समेत अन्य राज्यों की तरह मुआवजा मिलेगा। अभी जमीनों का बाजार मूल्य की तुलना में कम मुआवजा दिया जा रहा है। किसान नाराज है। इसे देखते हुए सरकार मुआवजा बढ़ाने की तैयारी में है।
गौरतलब है कि विकास कार्यों के साथ-साथ किसान और निजी भू स्वामियों के हितों को ध्यान रखते हुए, भू-अर्जन की व्यवस्था बनाने के लिए मुख्यमंत्री. डा. मोहन यादव ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप की समिति बनाई है, जिसकी बुधवार को पहली बैठक मंत्रालय में हुई। इसमें भारतीय किसान संघ की प्रदेश इकाई ने मुआवजे की गणना कलेक्टर गाइड लाइन के स्थान पर बाजार दर और गुणांक दो तक करने की मांग रखी।
बैठक में हुई भू-अर्जन मॉडल को लेकर चर्चा
मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई प्रदेश स्तरीय समिति ने मंत्रालय में किसान संगठनों व उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। सुझाव मांगे और कमियों पर बात की। अन्य राज्यों में प्रभावी भू-अर्जन मॉडल और यहां मिलने वाली मुआवजा राशि पर भी बातचीत की। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि यह समिति की पहली बैठक थी। इसमें बिना कोई प्रस्ताव रखे सभी के साथ खुलकर चर्चा हुई है। बैठक के अलावा 30 जनवरी तक सभी पक्षों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। इन सभी सुझावों के आधार पर समिति आगे का निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की इच्छा है कि विकास के काम हों, लेकिन इसके साथ किसानों और जिनकी जमीन विकास कामों में आती हैं, उन्हें मुआवजे की राशि बेहतर मिले। दरअसल, आंध्रप्रदेश में सवा से डेढ़, कर्नाटक में डेढ़ तक, हरियाणा में सवा से पौने दो और महाराष्ट्र में डेढ़ से दो गुणांक तक है यांनी जो कलेक्टर या बाजार दर होगी उसमें निर्धारित गुणांक लगातार मुआवजा तय किया जाएगा। सौ प्रतिशत सांत्वना राशि और संपत्ति या फसल के औसत मूल्य को मिलाकर यह तय होना चाहिए। कलेक्टर गाइड लाइन के स्थान पर बाजार दर से गणना होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में कलेक्टर गाइड लाइन में मामूली वृद्धि होती है। जबकि, बाजार दर कलेक्टर गाइड लाइन से कई गुना होती है।
बैठक में आए व्यवहारिक सुझाव
इंफ्रस्ट्रक्चर से जुड़े कामों में मुआवजे की राशि में विसंगति को लेकर कई निर्माण कार्यों में ब्रेक लगा है। इसे दूर करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप की एक कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी की किसान संगठनों, सीआईआई और विधायकों के साथ मुआवजे की राशि को लेकर बैठक की गई। मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि विकास की योजनाओं और खासतौर से आधारभूत संरचना से जुड़े कामों में तेजी के लिए भूमि की उपलब्धता जरूरी होती है। यह भूमि निजी क्षेत्र और शासकीय भी हो सकती है। लेकिन जब किसानों और अन्य लोगों की जमीन पर विकास के कार्य करने होते हैं तो मुआवजे की राशि को लेकर विसंगति आती है। मुख्यमंत्री की इच्छा है कि विकास के काम तो हों, लेकिन इसके साथ भूमि स्वामी को पर्याप्त मुआवजा मिल सके। मुआवजे की राशि की गणना की पद्धति में जो फैक्टर काम करता है वह अभी एक है। इसको बढ़ाने के लिए किसानों, उद्योग चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स और जनप्रतिनिधियों के साथ अच्छी बैठक हुई और इसमें बहुत व्यवहारिक सुझाव आए हैं।
बाजार दर से मुआवजा की मांग
मध्य प्रदेश में तेजी के साथ अधोसंरचना विकास किया जा रहा है। निवेश लाकर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं लेकिन इसमें बड़ी बाधा भू-अर्जन है। कम मुआवजा मिलने के कारण किसान तैयार नहीं होते हैं। अधिग्रहण का विरोध होता है। इसके कारण सडक़, सिंचाई और औद्योगिक विकास के कई प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में हो रहे विलंब को लेकर भारत सरकार ने भी चिंता जताई। बैठक में राजस्व विभाग की ओर से भू-अर्जन के प्रविधानों को लेकर जानकारी दी गई। बताया गया कि छह हजार करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। भारतीय किसान संघ के प्रांताध्यक्ष कमल सिंह आंजना सहित अन्य पदाधिकारियों ने किसानों का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह बहुत कार है। भारत सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम में गुणांक दो तक का प्रविधान रखा है। बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि हमने खुले मन से सभी पक्षों की बातें सुनी है। अधोसंरचना विकास कार्यों को गति देने के लिए भूमि की उपलब्धता आवश्यक होती है। मुआवजे को लेकर विसंगतियां सामने आई हैं। मुख्यमंत्री की मंशा है कि विकास कार्य तेजी के साथ हों और किसानों को भी लाभ हो, इसके लिए मुआवजा राशि की गणना पद्धति में गुणांक एक है। उसे बढ़ाने की दृष्टि से किसान, व्यापारी संगठनों के सुझाव आ जाएं, इसके लिए समिति बनाई है। किसान संगठन, चेंबर आफ कामर्स और विधायकों के व्यावहारिक सुझाव आए हैं। अध्ययन करके समिति जल्द अपने सुझाव सरकार को सौंप देगी।
मुआवजे को लेकर अटकी कई परियोजनाएं
प्रदेश में मुआवजे में विसंगति के आरोपों को लेकर कई बड़ी परियोजनाएं अटकी हुई हैं। बुरहानपुर की सबसे बड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना पांगरी बांध के प्रभावित किसान पिछले 3 सालों से इसको लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां किसान भूमि की कीमत का दोगुना मुआवजा और अनुग्रह राशि दिए जाने की मांग कर रहे हैं। यही स्थिति कई और प्रोजेक्ट की है। प्रदेश में जमीन मुआवजे की गणना भूमि के बाजार मूल्य, शहरी और ग्रामीण जमीन के स्थान, भूमि के प्रकार यानी वह सिंचित है या फिर असिंचित, भूमि पर मौजूद पेड़, मकान, कुंए आदि के आधार पर होती है। इसमें मार्केट वैल्यू को मल्टीप्लायर फैक्टर आदि से जोडकऱ मुआवजा की राशि तय की जाती है।
