फसल बीमा कराने में किसानों की रुचि नहीं, पांच साल में केवल 11 लाख ने ही कराया

फसल बीमा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सुरक्षा कवच प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अऋणी किसानों की रुचि नहीं है। यह स्थिति तब है, जब प्रीमियम बेहद कम है। सरकार द्वारा किसानों को लगातार प्रोत्साहित करने के बाद भी स्थिति यह है कि प्रदेश में वर्ष 2021 से अब तक 11 लाख अऋणी किसानों ने ही बीमा कराया है। जबकि, ऋणी किसानों की संख्या सीजन दर सीजन बढ़ती जा रही है। इस श्रेणी में बीते पांच वर्ष में सवा सात करोड़ से अधिक किसानों का बीमा हुआ। दरअसल, बीमा के प्रति अऋणी किसानों की अरुचि का कारण उसकी जटिल प्रक्रिया और क्लेम मिलने में देरी है। 2016 में प्रदेश के सीहोर जिले के शेरपुरा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की थी। इसमें ऋणी और अऋणी दोनों श्रेणी के किसान शामिल किए गए, लेकिन अऋणी किसानों की रुचि बीमा कराने में नहीं है।
ऐच्छिक है, योजना में विसंगति भी हैं
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बीमा योजना पूरी तरह से ऐच्छिक है, इसलिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता है। वहीं, भारतीय किसान संघ के प्रांताध्यक्ष कमल सिंह आंजना का कहना है कि योजना में कई विसंगतियां हैं, जिन्हें ठीक किया जाना आवश्यक है।
एक साथ तीन साल का मिला बीमा
लाख 28 हजार 67 किसानों को एक साथ तीन साल की बीमा राशि 1,383 करोड़ अगस्त 2025 में दी गई। इसमें वित्त वर्ष 2023-24 के रबी, 2024 के खरीफ और वर्ष 2024-25 के रबी सीजन की विभिन्न फसलों की बीमा राशि शामिल है।

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