सदन के भीतर विधायकों को साधने और फ्लोर मैनेजमेंट की कवायद

सदन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र 16 फरवरी से विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। इस बीच मप्र सरकार एक महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्ति की तैयारी में जुटी है। दरअसल, विधानसभा में मुख्य सचेतक का पद भरने जा रही है, जो सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन और दलीय अनुशासन के लिए काफी अहम माना जाता है। इस पद पर नियुक्ति के साथ ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया जाएगा, जिसके चलते यह नियुक्ति और भी अहम हो गई है। गौरतलब है कि अभी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ही विधानसभा में मुख्य सचेतक की भूमिका भी निभाते आए हैं, लेकिन नए मुख्य सचेतक की नियुक्ति होने से उनका भार भी कम कर दिया जाएगा। उक्त पद के लिए भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के नाम पर विचार किया जा रहा है।
दरअसल, बजट सत्र में भाजपा विधायक अपनी ही सरकार को कठघरे में न खड़ा करें या असहज स्थिति पैदा न करें, इसके लिए पार्टी मुख्य सचेतक की नियुक्ति करने की तैयारी कर रही है। दरअसल, पिछले सत्रों में सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट में भाजपा विधायक दल को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अब तक मुख्य सचेतक जैसी जिम्मेदारी संसदीय कार्य मंत्री के रूप में कैलाश विजयवर्गीय निभा रहे थे, लेकिन इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत के बाद एक बयान से विवाद के चलते उन्होंने सरकारी कामकाज से दूरी बनाई हुई है। इसी वजह से भाजपा संगठन चिंतित है कि आगामी बजट सत्र व अन्य सत्रों के दौरान कोई असहज करने वाली स्थिति न बने। विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरने वाले भाजपा विधायकों ने सरकार को कई बार संकट में डाला है। बजट सत्र में ऐसी कोई परिस्थिति न बने, इसके लिए इन विधायकों से पहले ही मिलकर संबंधित विभाग के मंत्री उनके प्रश्नों का संतोषजनक जवाब देंगे ताकि वे सदन में सरकार को घेरने वाले प्रश्न न कर सकें। इतना ही नहीं भाजपा विधायकों को यह भी बताया जाएगा कि विधानसभा सत्र के दौरान सदन में कौन से सवाल उठाने हैं और कौन से नहीं। दरअसल, पिछले वर्ष विधानसभा सत्र के दौरान आलोट से भाजपा विधायक डा. चिंतामणि मालवीय ने आरोप लगाए थे कि उज्जैन में सिंहस्थ की जमीन पर कालोनाइजरों की नजर है। सदन में इस पर हंगामा हुआ। विपक्ष के कई सदस्यों ने भाजपा विधायक की बातों का समर्थन कर दिया था। इसके अलावा जल जीवन मिशन में घोटाले पर भी विपक्ष के साथ भाजपा विधायकों ने भी सदन में सवाल किए थे, जिससे सरकार की किरकिरी हुई थी।
सीएम और प्रदेशाध्यक्ष लेंगे फैसला
अभी सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट की पूरी जिम्मेदारी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कंधों पर है। अब मुख्य सचेतक की नियुक्ति करके उनके कार्यभार को बांटा जाएगा, जिससे सरकार सदन में और अधिक मजबूती के साथ अपना पक्ष रख सकेगी। इस नियुक्ति पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच विचार-विमर्श के बाद ही लगेगी। विधानसभा या संसद में मुख्य सचेतक का पद केवल एक औपचारिक नियुक्ति नहीं है। यह किसी भी राजनीतिक दल का वह प्रमुख पदाधिकारी होता है, जो सदन के भीतर पार्टी के सभी सदस्यों को बांधकर रखता है। इसकी भूमिका पार्टी नेतृत्व और विधायकों के बीच एक पुल की तरह होती है।

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