150 बेड कम होने के बाद भी किया गया 400 के हिसाब से भुगतान

जेपी अस्पताल
  • जेपी अस्पताल में 16.42 लाख का मेडिकल वेस्ट घोटाला

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कभी प्रदेश के मॉडल जिला अस्पताल में गिना जाने वाला जेपी अस्पताल अब बदहाली की नई मिसाल बन चुका है। तीन साल पहले जेपी अस्पताल में 400 बिस्तर थे, लेकिन अब यह संख्या 250 पर सिमट गई है। हैरानी की बात यह है कि 150 बेड कम होने के बाद भी यहां प्रबंधन की मिली भगत से मेडिकल वेस्ट का काम करने वाली एजेंसी को 16.42 लाख रुपए से अधिक का फर्जी भुगतान किया गया है। मामला सामने आने के बाद जहां एक ओर प्रबंधन चुप है, वहीं सीएमएचओ ने जांच की बात कही है। जानकारी अनुसार जिला अस्पताल जेपी में पहले 400 बिस्तर थे लेकिन 2023 में काटजू अस्पताल शुरू होने पर यहां से 150 बिस्तर शिफ्ट कर दिए गए थे। तब से जेपी अस्पताल में केवल 250 बिस्तर ही शेष रह गए। इसके बावजूद मेडिकल बेस्ट का निस्तारण करने वाली एजेंसी 250 की जगह 400 बिस्तरों के हिसाब से ही शुल्क ले रही है।
    जेपी अस्पताल का पूरा संचालन आउटसोर्सिंग के भरोसे है। जिला मेडिकल बोर्ड की जिम्मेदारी किसी डॉक्टर की नहीं, बल्कि एक आउटसोर्स कंपनी के पास है। सफाई से लेकर मेडिकल स्टोर और फाइल सेक्शन तक सब ठेके पर हैं। अस्पताल की गंदगी और बदइंतजामी के बावजूद ठेकेदारों को पूरे भुगतान किए जा रहे हैं। इस संदर्भ में  सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि मैंने कुछ समय पहले ही पदभार लिया है। इस बारे में जानकारी नहीं है। आपने बताया है तो मैं इस मामले को दिखवाता हूं। यदि गड़बड़ी है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
    विस्तर कम हुए पर अनुबंध पुराना
    स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी अनुसार मेडिकल बेस्ट निस्तारण के नाम पर जेपी अस्पताल में प्रति बिस्तर 10 रूपए प्रतिदिन का भुगतान तय है। इस तरह 150 बिस्तरों के आधार पर प्रतिदिन 1,500 का भुगतान किया गया। इस हिसाब से तीन साल में यह टाशी करीब 16.42 लाख तक पहुंच गई। बड़ी बात यह है कि इधर काटजू अस्पताल में भी 150 बिस्तरों के हिसाब से मेडिकल वेस्ट निस्तारण का भुगतान किया जा रहा है। जेपी अस्पताल में पिछले तीन साल से निरंतर भुगतान किया गया, लेकिन किसी ने इसे नहीं रोका। जेपी अस्पताल में मेडिकल वेस्ट निपटारे का अनुयंध इंडिया वेस्ट मैनेजमेंट प्रालि से किया गया है। जो कि टेंडर के माध्यम से हुआ था। इस कंपनी से अनुबंध के समय जेपी अस्पताल में 400 बिस्तर थे। ऐसे में 2023 में बिस्तरों की संख्या कम होने पर स्वास्थ्य विभाग और कंपनी दोनों को अनुबंध और भुगतान व्यवस्था में संशोधन करना था। लेकिन कंपनी फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा नहीं किया गया। मामले में जेपी अस्पताल के वर्तमान अधीक्षक डॉ. संजय जैन से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल बंद था। जेपी अस्पताल में मेडिकल वेस्ट सहित सभी प्रकार का भुगतान सिविल सर्जन व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की देखरेख में होगा है। बीते तीन साल में यहां बार अधिकारी रहे, लेकिन किसी ने इस फर्जीवाड़े पर ध्यान नहीं दिया। 

Related Articles