आदिवासी क्षेत्रों में समग्र विकास कार्यों पर जोर

आत्मनिर्भर
  • 89 विकासखंडों में सिंचाई परियोजनाओं के लिए मांगी कार्ययोजना

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में सरकार हर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाने की नीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में सरकार का फोकस आदिवासी क्षेत्रों में समग्र विकास पर है। इसके लिए मोहन सरकार आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए मंत्रियों के माध्यम से प्रस्ताव मंगाकर उन्हें मंजूरी देगी और शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार पर फोकस करेगी। इसी तारतम्य में जल संसाधन विभाग ने प्रदेश के सभी आदिवासी विकासखंडों में सिंचाई परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। विभाग ने इन विकासखंडों में तीन साल में कराए जाने वाले कार्यों की कार्य योजना मांगी है।
मप्र  में सरकार का फोकस आदिवासियों के आर्थिक सशक्तिकरण पर है। इसके लिए सिंचाई क्षेत्र का विस्तार करने की तैयारी है। जल संसाधन विभाग ने सभी 89 आदिवासी बहुल ब्लाक में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना मैदानी अधिकारियों से मांगी है। इसमें जोर छोटी-छोटी जल संरचनाएं बनाने पर है, क्योंकि वन क्षेत्र होने के कारण बड़ी परियोजनाओं में परेशानी आती है। अभी आदिवासी क्षेत्रों में परंपरागत खेती होती है, जो कम लाभप्रद है। सिंचाई सुविधा मिलने से आदिवासी भी उन्नत खेती कर सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। सामान्यतः आदिवासी परंपरागत खेती करते हैं, जो तुलनात्मक रूप से कम लाभप्रद होती है। जबकि, उद्यानिकी फसलें आमदनी बढ़ाने का बड़ा माध्यम भी है, इसलिए कृषक कल्याण वर्ष में विभाग ने सभी मैदानी अधिकारियों से 89 आदिवासी ब्लाक में सिंचाई सुविधा के विस्तार को लेकर तीन वर्ष की कार्ययोजना मांगी है। प्रस्ताव जनप्रतिनिधियों के साथ स्थानीय लोगों से संवाद करके तैयार किए जान हैं।
एक साल में छह लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य
प्रदेश में सिंचाई क्षमता के विस्तार को लेकर नर्मदा घाटी और जल संसाधन विभाग काम कर रहे हैं। एक वर्ष में छह लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता में वृद्धि के लक्ष्य पर काम चल रहा है। पांच साल में इसे 100 लाख हेक्टेयर पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके लिए बड़ी परियोजनाओं पर तो काम हो ही रहा है, छोटी-छोटी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता में लिया जाएगा। आदिवासी क्षेत्रों में वन क्षेत्र ज्यादा होने के कारण बड़ी परियोजनाएं बनाने में परेशानी भी आती है। भूमि अधिग्रहण में तमाम प्रक्रियाएं होती हैं जिससे काम प्रभावित होता है। वहीं, सिंचाई की सुविधा न होने से आदिवासी क्षेत्र में फसल उत्पादन भी प्रभावित होता है। किसान उन्नत खेती भी नहीं कर पाते हैं, जबकि उद्यानिकी फसलों की संभावना अन्य क्षेत्रों की तुलना में यहां अधिक रहती है। विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजौरा का कहना है कि प्रदेश में सिंचाई सुविधा का विस्तार हो रहा है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्ष में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हेक्टेयर पहुंचाने का है। आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी परियोजना बनाने में स्थान की उपलब्धता, अधिग्रहण की समस्या आदि कारणों से कठिनाई होती है इसलिए फोकस ऐसी परियोजनाओं पर है जिनसे एक से दो हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो जाए।

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