कमजोर विवेचना से नहीं बच पाएंगे नशे के कारोबारी

  • हर केस पर नजर रखेगी टास्क फोर्स…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए अब पुलिस की कार्रवाई के साथ विवेचना की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जाएगी। नशे के कारोबार में पकड़े गए आरोपित कमजोर जांच या साक्ष्यों की कमी का फायदा उठाकर अदालत से राहत न पा सकें, इसके लिए प्रदेश स्तर पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) गठित करने की तैयारी है। पुलिस मुख्यालय ने इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। प्रस्तावित टास्क फोर्स गिरफ्तारी, साक्ष्य संकलन और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत करने तक की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। एएनटीएफ का गठन एडीजी नारकोटिक्स की अध्यक्षता में किया जाना प्रस्तावित है। इसके तहत दो शाखाएं काम करेंगी। इनमें एक शाखा विवेचना से जुड़े मामलों की निगरानी करेगी, जबकि दूसरी प्रशासनिक और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर काम करेगी। नए मामलों के साथ पहले से लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की जाएगी। जहां जरूरत होगी, वहां विवेचना अधिकारियों को विधिक सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी रहेगी।
गिरफ्तारी से चार्जशीट तक जांच की होगी समीक्षा
नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में केवल आरोपितों को पकडऩा ही पर्याप्त नहीं होगा। पुलिस को अदालत में आरोप साबित करने के लिए मजबूत साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन भी सुनिश्चित करना होगा। इसी उद्देश्य से प्रस्तावित टास्क फोर्स प्रत्येक प्रकरण की विवेचना की समीक्षा करेगी। इसमें देखा जाएगा कि आरोपित की गिरफ्तारी से लेकर साक्ष्य जुटाने और न्यायालय में आरोप पत्र पेश करने तक किसी स्तर पर कोई कमी तो नहीं रह गई। विवेचना में खामियां मिलने पर उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। पुराने मामलों की भी निगरानी होगी, ताकि लंबित प्रकरणों में जांच की स्थिति का आकलन किया जा सके।
नारकोटिक्स शाखा में तकनीकी विशेषज्ञों की होगी भर्ती
नशे के अवैध कारोबार की जांच में तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने नारकोटिक्स शाखा में पांच नए पद सृजित करने का प्रस्ताव भेजा है। इनमें साइबर विशेषज्ञ और डेटा एंट्री मैनेजर जैसे पद शामिल हैं। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। वर्तमान में नारकोटिक्स शाखा में कुल 255 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 144 पद रिक्त बताए गए हैं। रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने की भी योजना है।
2029 तक नशामुक्त मप्र का लक्ष्य
तीन अक्टूबर को भोपाल दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोपालकों के सम्मेलन में कहा था कि 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्यप्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी निर्धारित समयसीमा से पहले प्रदेश को नशामुक्त बनाने की बात कह चुके हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित करने का सुझाव दिया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की नारकोटिक्स शाखा ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की। अब प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिलने के बाद टास्क फोर्स के गठन, तकनीकी पदों की स्वीकृति और संसाधनों की उपलब्धता पर आगे की कार्रवाई होगी।

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