नक्सल-मुक्त मप्र में अब विकास को मिलेगी नई रफ्तार

  • बालाघाट में होगा पहला बैगा महोत्सव

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र ने लगभग 35 साल नक्सलवाद का दंश झेला। यह एक बड़ी चुनौती थी, पर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और नक्सल विरोधी अभियान में शामिल जवानों की प्रतिबद्धता से 11 दिसंबर 2025 को नक्सलवाद प्रदेश के नक्शे से पूरी तरह मिटा दिया गया।  अब इससे प्रभावित क्षेत्रों में विकास को एक नई दिशा और एक नई रफ्तार मिलेगी। इसी कड़ी में मप्र की धरती से नक्सलवाद के खात्मे की उपलब्धि पर मप्र सरकार बड़े स्तर पर बैगा सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। बैगा सम्मेलन का आयोजन बालाघाट में किया जाना प्रस्तावित है। बालाघाट प्रदेश का सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिला रहा है। मप्र सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च, 2026 तय की है। केंद्र की ओर से निर्धारित समय सीमा से करीब साढ़े तीन महीने पहले नक्सलवाद मप्र के नक्शे से पूरी तरह मिटा दिया गया है। अब मप्र में आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश का पहला बैगा महोत्सव बालाघाट में आयोजित किया जाएगा, आयोजन अप्रैल में जिला मुख्यालय या आसपास के क्षेत्र में होने की संभावना है। इस महोत्सव में आदिवासी समाज से जुड़े केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग भी शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
नक्सल खात्मे के बाद पहला बड़ा आयोजन
प्रदेश सरकार नक्सल गतिविधियों के खात्मे के बाद यह पहला बड़ा आयोजन कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव  की पहल पर बैगा महोत्सव की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छा जताई है। केंद्र सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मार्च-अप्रैल तक का समय दिया था, लेकिन मप्र पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने तय समय से पहले ही बड़ी सफलता हासिल करते हुए कई नक्सलियों को मार गिराया और कई ने आत्मसमर्पण भी किया। गौरतलब है कि मप्र में वर्ष 1988 से 1990 के बीच नक्सल गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। प्रदेश में मंडला, डिंडौरी और बालाघाट नक्सल प्रभावित जिले रहे।  नक्सलियों को हथियार डालकर जीवन से जुडऩे का अवसर देने के लिए राज्य सरकार ने पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान प्रारंभ किया।  सरकार की इसी पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर दिसंबर, 2025 में करीब 2.36 करोड़ रुपए की इनामी राशि वाले 10 नक्सलियों ने पुलिस लाइन बालाघाट में सरेंडर कर दिया।  वर्ष 2025 में नक्सल विरोधी अभियानों में 16 मुठभेड़ों एक्सचेंज ऑफ फायर में 13 हार्डकोर नक्सली मारे गए और एक की गिरफ्तारी हुई।
आदिवासी क्षेत्रों को मिल सकती हैं बड़ी सौगातें
बैगा महोत्सव के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए कई विकास योजनाओं की घोषणा की जा सकती है। खासतौर पर बालाघाट और मंडला जैसे जिलों के लिए अलग रोडमैप तैयार किया गया है, जहां लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण विकास कार्य प्रभावित रहे। सरकार का उद्देश्य आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोडऩा और इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। हालांकि नक्सलियों के खिलाफ अभियान अभी समाप्त नहीं किया गया है और क्षेत्र में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। नक्सलवाद और लाल आतंक देश के हर हिस्से में विकास आधारित गतिविधियों में बाधक था। इससे आम लोगों में इसके कारण भय का माहौल होता था। यही वजह है कि नक्सलियों और नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मप्र सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष योजना बनाई है। सूत्रों का कहना है कि सूत्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार अब एक ऐसा तंत्र भी विकसित कर रही है, जिससे दोबारा मघ्र की धरती पर नक्सलवादी या अन्य अतिवादी मूवमेंट खड़े न हो पाएं। इसके लिए सभी पड़ोसी राज्यों के साथ भी जरूरी समन्वय किया जा रहा है।
शाह की सहमति पर तय होगी तारीख
 सूत्रों का कहना है कि सरकार अप्रैल में बैगा सम्मेलन आयोजित करना चाहती है, लेकिन अभी उसे केंद्रीय मंत्री शाह की ओर से हरी झंडी नहीं मिली है। अमित शाह की स्वीकृति मिलते ही बैगा सम्मेलन की तारीख फाइनल हो जाएगी। सीएम सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश में नक्सलवाद के सफाए का अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित डेडलाइन से पहले प्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे को मप्र सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है। यही वजह है कि सरकार बड़े स्तर पर बैगा सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है। सम्मेलन में एक लाख से ज्यादा लोगों को लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस सम्मेलन के जरिए एक तरफ सरकार जहां नक्सल प्रभावित मंडला, डिंडोरी और बालाघाट जिलों में लोगों को सकारात्मक संदेश देना चाहती है, वहीं सम्मेलन के जरिए आदिवासी समाज को साधने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के जरिए सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए उठाए गए कदमों से केंद्रीय मंत्री शाह को अवगत कराएगी।

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