
- संरक्षण के बावजूद घडिय़ालों की संख्या में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
चंबल नदी पर बने चंबल सेंक्चुरी क्षेत्र में घडिय़ालों के कई बच्चों की लोकेशन मगरमच्छों के पेट के अंदर मिलने के बाद मगरमच्छों द्वारा उनका शिकार किए जाने के खुलासे ने विशेषज्ञों की बैचेनी बढ़ा दी है। घडिय़ालों के बच्चों को इस क्षेत्र में ट्रांसमीटर लगा कर छोड़ा गया था, जिससे इसका खुलासा हो सका कि मगरमच्छों ने घडिय़ालों के बच्चों को अपना शिकार बना लिया है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार जिस चंबल नदी को देश में घडिय़ालों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है, वहीं अब उनके बच्चों की जान खतरे में हैं।
चंबल घडिय़ाल सेंक्चुरी के अभी हाल ही में निगरानी सर्वे में खुलासा हुआ है कि तीन साल तक के 120 सेंटीमीटर लंबे घडिय़ाल लगातार मगरमच्छों के हमले का शिकार हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार वन विभाग की गो एंड रिलीज योजना के तहत घडिय़ालों पर लगाए गए रेडियो ट्रांसमीटर से इसकी पुष्टि हुई है। ट्रांसमीटर सही सलामत मिले, लेकिन उनकी लोकेशन नदी में नहीं, बल्कि मगरमच्छों के पेट से ट्रेस हुई। बताया गया है कि जब जांच आगे बढ़ी तो मगरमच्छों के मल से घडिय़ालों के अवशेष मिलने से इसकी स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई। सूत्रों ने बताया कि चंबल सेंक्चुरी में पहली बार इसे आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है। जानकारी में बताया गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों सहित जलीय जीव विशेषज्ञ की टीम अब यह पता लगाने के प्रयास में लगी है कि आखिर घडिय़ालों का सबसे सुरक्षित स्थान कैसे उनकी शिकारगाह बनता जा रहा है।
७ साल पहले से शिकार की जानकारी
इसके अलावा वयस्क मगरमच्छ तीन साल तक के घडिय़ालों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस बात का खुलासा मद्रास कोको डायल बैंक ट्रस्ट की रिपोर्ट में भी हुआ है। सूत्रों के अनुसार चंबल नदी के घडिय़ालों पर मगरमच्छ हमले ओर शिकार की जानकारी वन विभाग को करीब आठ साल पहले ही वर्ष 2017-18 में हीं मिल चुकी थी लेकिन इसे लंबे समय तक दबाए रखा गया।
सबसे अनुकूल थी चंबल नदी
कहा गया है कि देश में घडिय़ालों के सुरक्षित सरंक्षण के लिए जब नदियों का अध्ययन किया गया तो चंबल नदी को सबसे स्वच्छ और अनुकूल पाया गया। साफ पानी और उपयुक्त, प्राकृतिक वातावरण में ही घडिय़ाल बेहतर तरीके से जीवित रह पाते हैं। इसी आधार पर 1978 और 79 में मुरैना जिले के देवरी गांव के समीप देवरी घडिय़ाल सेंक्चुरी की स्थापना की गई। वन विभाग सूत्रों के अनुसार 2025 की गणना के अनुसार सेंक्चुरी में घडिय़ालों की संख्या बढकऱ दो हजार 462 तक पहुंच गई जबकि सेंक्चुरी की स्थापना बाद 1978-79 में नदी में मात्र 75 घडिय़ाल छोड़े गए थे।
