
- अब सामान्य वन मंडलों में सर्वे के लिए उपयोग हो रहा एम-स्ट्राइप्स मोबाइल ऐप
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। देश में चल रही अखिल भारतीय बाघ गणना के तहत मध्य प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व के साथ ही सामान्य वन मंडलों में बाधों की गणना का काम शुरू हो चुका है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में 1 दिसंबर से 7 दिसंबर के बीच बाघों की गणना का काम पूरा किया जा चुका है, जबकि सामान्य वन मंडलों में बाघ गणना का काम जारी है। बता दें कि बाघ गणना का काम विभिन्न चरणों में दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक किया जाना है। बता दें कि मध्य प्रदेश में बाघों की गणना की तैयारी नवंबर 2025 से ही शुरू हो गई थी। जिसमें टाइगर रिजर्व के लिए 7 दिवस की गणना अवधि तय की गई थी, जिसमें पहले तीन दिनों तक मांसाहारी वन्य प्राणी (जैसे बाघ, तेंदुए) की ट्रैकिंग की गई, जबकि अगले 3 दिनों तक शाकाहारी जानवरों की गणना की गई। बाघ गणना का अंतिम 1 दिन जंगलों के अंदर पाई जाने वाली वनस्पतियों की मैपिंग और बफर व कोर एरिया में होने वाले मानवीय हस्तक्षेप को भी आंका गया है। गौरतलब है कि 2022 में हुई बाघों की गणना के अनुसार मध्य प्रदेश में 785 बाघ थे, जो देश में सर्वाधिक है। लेकिन पिछले वर्ष प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्व और सामान्य वन मंडलों में 55 बाघों की मृत्यु दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी चुनौती है। हालांकि मध्य प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि इस साल बाधों की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की जाएगी।
डिजिटल पेपरलेस तकनीक के साथ कलेक्ट हो रहे डीएनए सैंपल
इस बार बाघों की गणना पूरी तरह से सटीक हो और टाइगर रिजर्व के बाहर जीवन यापन करने वाले बाघों की जानकारी भी वन विभाग को मिले। इसके लिए तकनीक और विज्ञान के सहारे बाघों की गणना की जा रही है। इसके लिए वन विभाग एम स्ट्राइप मोबाइल एप का उपयोग कर रहा है। जिससे डाटा डिजिटली सुरक्षित रूप से शेयर किया जा सके, ताकि गड़बड़ी गुंजाइश कम रहे। पेपरलेस तकनीक होने से एक बार डाटा फीड हो जाने के बाद इसमें गड़बड़ी की गुंजाइश कम रहेगी। बाघों की संख्या जानने के लिए जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें खींची गई तस्वीरों के जरिए ही बाघों की गणना की जाएगी। साथ ही सामान्य वन मंडलों में बाघों विष्टा को एकत्रित कर उनसे डीएनए सैंपल इक_ा किए जाएंगे, ताकि गणना की सटीक तरीके से किया जा सके।
बाघों की गणना पर जोर
मध्टा प्रदेश में बायों की संख्या के लगातार बढऩे के बाद बाघ अपना क्षेत्र बनाने के लिए टाइगर रिजर्व और सामान्य वन मंडलों के बाहर भी कूच कर रहे हैं, जिससे बायों की सुरक्षा को खतरा पैदा होने के साथ ही मानव-बारा टकराहट बढऩे का भी अंदेशा है। यही कारण है कि बाघों की गणना को लेकर सामान्य वन मंडलों और उनके गलियारों पर विशेष व्यान दिया जा रहा है। ओबेदुल्लागंज सामान्दा वन मंडल में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य का बड़ा हिस्सा आता है, अक्सर रातापानी के बाय ओबेदुल्लागंज सामान्य वन मंडल के विभिन्न इलाकों में प्रवेश कर जाते हैं। इन्हीं बायों का मूवमेंट अवसर भोपाल सामान्य वन मंडल के इलाकों में भी होता है। ओबेदुल्लागंज के बगासपुर गांव और बिनेका वन परिक्षेत्र में बाधों की सक्रियता देखी गई है, जिसके चलते वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यही कारण है कि सामान्य वल मंडलों में बाघों की गणना की जा रही है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने भविष्य में कदम उठाए जा सके।
