लोकसभा चुनाव: विधानसभा के मतों से कांग्रेस में खुशफहमी

  • गौरव चौहान
कांग्रेस

विधानसभा चुनाव व लोकसभा चुनाव के मुद्दों से लेकर प्रत्याशियों तक की पसंद मतदाताओं की अलग-अलग होती है। यही वजह है कि इनके चुनाव परिणाम भी अलग ही आते हैं। इसके कई उदाहरण हर बाद सामने आते रहते हैं। इसके बाद भी प्रदेश में कांग्रेस खुशफहमी पाले हुए हैं। दरअसल प्रदेश में चार माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में जिन पांच सीटों की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को मतों के हिसाब से बढ़त मिली है, उससे कांग्रेस मानकर चल रही है कि इन सीटों पर पार्टी को जीत मिल सकती है। कांग्रेस नेता इन सीटों पर पार्टी को बढ़त के रुप में देख रहे हैं। यह सीटें प्रदेश के अलग-अलग इलाकोंं की हैं। दरअसल विधानसभा चुनावों में भाजपा को 163, कांग्रेस ने 66 और भारतीय आदिवासी विकास पार्टी को एक सीट मिली थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली बढ़त को भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बेहद गंभीरता से लिया है। यही वजह है भाजपा इन सीटों पर विशेष फोकस कर रही है। यही नहीं भाजपा उन 24 सीटों पर भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है जिन पर उसे विधानसभा चुनाव में बढ़त मिली थी। इधर, कांग्रेस का दावा है उसके द्वारा इस बार प्रदेश में बीते चुनावों की अपेक्षा अच्छा प्रदर्शन किया जाएगा। यही वजह है कि विशेष रणनीति बनाकर  दिग्गज नेताओं के साथ ही नए चेहरों को चुनाव में उतारा गया है। गौरतलब है कि इस बार प्रदेश में  कांग्रेस 28 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी की रणनीति उन सीटों पर विशेष ध्यान देने की है, जहां विधानसभा चुनाव में परिणाम उसके अनुकूल रहे हैं।
इन सीटों पर मिली थी बढ़त
मतों के अंतर के हिसाब से मुरैना लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को 21,024 मतों की भाजपा पर बढ़त मिली थी। इसी तरह से भिंड में 6,904 और ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में 23,250 मतों की बढ़त मिली थी। कांग्रेस ने इन तीनों सीटों पर नए चेहरे दिए हैं। इसी तरह छिंदवाड़ा में 96,646 और मंडला लोकसभा क्षेत्र में 16,082 मतों से कांग्रेस आगे रही थी। छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने सभी सात विधानसभा सीटें जीती थीं। हालांकि, अमरवाड़ा से विधायक कमलेश शाह विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य जनप्रतिनिधि भी भाजपा में आ चुके हैं। इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि इस बार कमलनाथ को बेटे नकुल के लिए परिवार के साथ अधिक मेहनत करनी पड़ रही है। मंडला में भाजपा ने आठ में से पांच सीटें जीती पर लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो कांग्रेस से पिछड़ गई। इसके उलट भाजपा ने खरगोन में तीन सीटें ही जीतीं ,पर उसे 1548 मतों की बढ़त मिली। यहां कांग्रेस ने पांच विधानसभा सीटें जीती थीं। बालाघाट में भाजपा और कांग्रेस बराबरी पर रहीं। यहां दोनों ने चार-चार विधानसभा क्षेत्रों में जीत प्राप्त की पर लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से भाजपा को 3,506 मतों की बढ़त मिली। इसी तरह धार लोकसभा में आने वाले पांच विधानसभा कांग्रेस और तीन पर भाजपा जीती लेकिन, मतों के अंतर में कांग्रेस पिछड़ गई। यहां 4,046 मतों से भाजपा को बढ़त मिली थी। नजदीकी मुकाबला होने के कारण कांग्रेस ने इन तीनों सीटों पर भी नए चेहरों पर दांव लगाया है।
इनका कहना है
ईवीएम का दुरुपयोग रोक दिया जाए तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस आधे से अधिक सीटें जीतेगी। भाजपा का तिलस्म भी टूटेगा। जनता पूरी तरह से भाजपा के विरुद्ध थी और रहेगी, मगर लोकतांत्रिक लूट की वजह से हमें निराशा हाथ लग रही है।
के के मिश्रा, कांग्रेस
सभी रिकॉर्ड ध्वस्त होंगे: भाजपा मोदी गारंटी के साथ सभी 29 लोकसभा सीटों पर आगे है। लोकसभा चुनाव में मतदाता राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में वोट करते हैं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में हमें 40 प्रतिशत मत मिले थे और उसके चार माह बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में 58 प्रतिशत मत मिले थे। इस बार मोदी जी की गारंटी के साथ सभी रिकॉर्ड ध्वस्त होंगे।
– आशीष अग्रवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी, भाजपा
भाजपा को कहां कितने मतों की बढ़त
विधानसभा चुनाव परिणाम के अनुसार देखा जाए तो कांग्रेस और भाजपा के बीच सर्वाधिक मतों का अंतर इंदौर लोकसभा क्षेत्र में रहा। यहां भाजपा को कांग्रेस की तुलना में 2,83,325 अधिक मत प्राप्त हुए थे। इसी तरह भोपाल में देखें तो 2,65,350, जबलपुर में 2,08, 636, विदिशा में 2,35,127, होशंगाबाद में 2,50,830 और उज्जैन में 1,77,151 मतों के अंतर से भाजपा आगे रही। राजगढ़ में भले ही भाजपा की बढ़त 1,71,811 वोटों की रही पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। टीकमगढ़, सतना और मंदसौर में  जहां विस चुनाव में भाजपा की बढ़त एक लाख मतों के भीतर रही है।

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