राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की सीट पर होगा खेला!

राज्यसभा चुनाव
  • भाजपा के रणनीतिकार तीसरी सीट के लिए जरूरी वोट की जुगाड़ में जुटे

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में जून की तपती-जलती गरमी में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा के कब्जे वाली दो सीटों पर तो वही होगा जो भाजपा चाहेगी, लेकिन कांग्रेस के कब्जे वाली एक सीट पर खेला होने की संभावना बढ़ गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इस एक मात्र सीट को लेकर कांग्रेस में दावेदारों की होड़ लगी हुई है। ऐसे में गुटबाजी और भितरघात की संभावना बढ़ गई है। इसको देखते हुए भाजपा के रणनीतिकार तीसरी सीट को भी कब्जाने के लिए जरूरी वोट की जुगाड़ में जुट गए हैं।
गौरतलब है कि जून में जिन तीन सीटों पर चुनाव होना है उनमें दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। एक सीट पर कांग्रेस के भीतर जबरदस्त घमासान और संग्राम की स्थिति बनी हुई है। 19 जून को खाली हो रही दिग्विजय सिंह वाली सीट को लेकर कांग्रेस में कई दावेदार सामने आ गए हैं, जिससे पार्टी में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के खाते वाली एक सीट पर हैं, जिसके लिए पार्टी नेतृत्व ने अभी से 8 विपक्षी विधायकों को टटोलना शुरु कर दिया है, तो कांग्रेस में इस सीट के लिए नेताओं के बीच खींचतान जारी है। मप्र विधानसभा की संख्या बल के आधार पर सत्ता पर बैठी भाजपा खाली हो रही अपनी दोनों सीट आसानी से जीत लेगी, जबकि कांग्रेस को भी उनकी एक सीट मिलना तय है, बशर्ते उनके विधायक सेंधमारी से बचे रहे।
गड़बड़ा रहा है कांग्रेस का गणित
दरअसल कांग्रेस को इस एक सीट के लिए 58 विधायकों की जरुरत है और मौजूदा समय में उनके 65 विधायक है। इनमें से बीना विधायक निर्मला सप्रे पहले से ही भाजपा के खेमे की मानी जा रही है, तो श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के राज्यसभा में वोट डालने के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की पाबंदी लगी हुई है। ऐसे मैं 63 विधायक ही कांग्रेस के पास बचते है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस से जुडे एक अन्य विधायक के न्यायालयीन प्रक्रिया का लाभ उसे मिल सकता है। इस तरह कांग्रेस के पास राज्यसभा के लिए 62 वोट ही बचते है। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के खाते वाली राज्यसभा सीट अपनी झोली में डालने के लिए पार्टी के रणनीतिकार मिशन 8 (आठ विधायक) पर काफी समय से काम कर रहे है। इसमें उन्हें पहले से ही दो से तीन विधायकों का लाभ मिलना लगभग तय है। ऐसे में अब उन्हें 5 विधायकों की जरुरत होगी। पार्टी सूत्रों का दावा है कि जिस तरह से कांग्रेस में आपसी खींचतान मची हुई है, उससे उनके लिए यह संख्या जुटाना मुश्किल नहीं होगा। पिछले दिनों 5 राज्यों के लिए हुई राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग की गई है। ऐसा मध्यप्रदेश में हो सकता है।
दिग्गजों की राजनीति समझ से पर
पिछले कुछ महीनों से खाली हो रही कांग्रेस के खाते एक सीट को लेकर मप्र में कांग्रेस के नेताओं में जमकर खींचतान देखने को मिल रही है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक जब भी इस विषय पर चर्चा हुई तो एक नहीं कई दावेदार सक्रिय दिखाई दिए। नेताओं को अलग-अलग बयानों ने कांग्रेस की खींचतान को भी उजागर किया है। पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने आप को इस दौड़ से बाहर बताते हुए मौजूदा राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह को फिर से भेजे जाने से इंकार नहीं किया, तो पूर्व सीएम कमलनाथ द्वारा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दिए गए डिनर को भी राज्यसभा चुनाव से जोडकऱ देखा गया। वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता सज्जन सिंह वर्मा ने भी कांग्रेस के खाते की मानी जा रही इकलौती सीट से राज्यसभा जाने की इच्छा जता दी है। उन्होंने पत्रकारों से सवाल पर साफ कहा कि उनके मन में भी उच्च सदन तक पहुंचने की इच्छा है, लेकिन उन्हें मालूम है कि उनके लिए यह राह आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं का प्रदेश भर में मजबूत नेटवर्क है, उनके राज्यसभा पहुंचने से अन्य नेताओं की राजनीतिक जमीन कमजोर पड़ जाएगी। वर्मा ने कहा कि यदि उनके जैसे नेता राज्यसभा पहुंचते हैं, तो कई अन्य नेताओं की दुकानदारी बंद हो जाएगी। अब सज्जन वर्मा के इस बयान ने कांग्रेस की खींचतान में आग में घी डालने का काम किया है।

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