
- पीडब्ल्यूडी के 14 इंजीनियरों के फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की जांच लंबित
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में 400 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद लंबित हैं। इनमें से 136 मामले में अकेले लोक निर्माण विभाग से संबंधित हैं। वर्तमान में विभाग के 14 इंजीनियरों की जाति को लेकर जांच जारी है। इनमें प्रमुख अभियंता से लेकर उपयंत्री तक शामिल हैं। विभाग ने इनके जाति प्रमाणपत्र जांच के लिए उच्च स्तरीय छानबीन समिति के पास भेजा है, लेकिन वर्षों बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। जांच में देर के कारण तो कई अधिकारी ही सेवानिवृत्त हो गए। ऐसे में अभी तक वे कार्रवाई के दायरे से बाहर है। एक मामले में तो तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव ने भी नोटशीट लिखी थी कि मामला बेहद गंभीर है, इसकी जांच करानी चाहिए। लेकिन जब तक विभाग में नोटशीट पहुंची तब तक संबंधित अभियंता सेवानिवृत्त हो गए। मामले में अब तक न जांच पूरी हो पाई और न ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकी। कई मामलों में दस्तावेज परीक्षण में देरी के चलते फाइलें ही आगे नहीं बढ़ पाईं। वहीं कई इंजीनियर जांच के दौरान ही सेवानिवृत्त हो गए। कुछ तो न्यायालय से स्टे ले आए हैं और नौकरी पर बने हुए हैं। पीडब्ल्यूडी अकेला ऐसा विभाग है, जहां के 136 इंजीनियरों के खिलाफ छानबीन समिति के पास शिकायतें लंबित हैं। जिन बड़े अधिकारियों के जाति प्रमाण पत्र की शिकायतें लंबित हैं, उनमें एससी वर्मा मुख्य अभियंता कोर्ट से स्टे ले आए और उनकी जांच ही शुरू नहीं हुई।
न जांचं पूरी और न कार्रवाई
तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री भी लिख चुके हैं नोटशीट, फिर भी न जांच पूरी हुई न कार्रवाई, पदोन्नत/सेवानिवृत होने के कारण कई मामलों में कार्रवाई लंबित, जांच प्रक्रिया वर्षों से चल रही, कई अधिकारी कोर्ट से स्टे लेकर सेवा में बने। जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक मंगलवार को छानबीन समिति की बैठक होती है। मामलों की जांच सतत प्रक्रिया है। जो जाति प्रमाण पत्रों जांच में फर्जी पाए जाते हैं उन्हें निरस्त कर संबंधित विभाग संबंधित शासकीय सेवक पर कार्रवाई के लिए लिखा जाता है।
