
- एक्शन मोड में सरकार…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश की मोहन यादव सरकार अपने कार्यकाल के दो साल पूरा करने पर एक्शन मोड में आ गई है। सरकार ने अगले तीन साल का एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। जिसमें मौजूदा साल को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का लक्ष्य है। साथ ही सरकार ने विभागों द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की निगरानी करना शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 50 करोड़ से ज्यादा लागत वाले लगभग सभी निर्माण कार्य (सडक़ नहीं) की रिपोर्ट संबंधित विभागों से मांगी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में विभागीय अधिकारियों की बैठक में कहा कि निर्माण कार्य समय पर गुणवत्ता के साथ पूरा कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। विभाग प्रमुख इसकी नियमित समीक्षा करें। हाल ही में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बड़ी लागत वाले निर्माण कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट मांगी है। जिसमें पूछा है कि कार्य की लागत कितनी है, संबंधित एजेंसी का का नाम। कार्य पूर्ण होने की संभावित तिथि है। यदि कार्य तय तिथि तक पूरा नहीं हो पाया है। उसका कारण भी बताने को कहा है। बताया गया कि वर्तमान में सांदीपनी स्कूल (सीएम राइज), कॉलेज भवन, स्वास्थ्य मिशन द्वारा बनाए जा रहे चिकित्सा भवन, विभागों के नवीन कार्यालय, जिलों में सरकारी भवनों के अलावा पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के प्रोजेक्ट, मप्र हाउसिंग बोर्ड के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। नगरीय विकास विभाग और लोक निर्माण विभाग के अनुसार इन निर्माणीधीन एजेंसियों के ज्यादातर प्रोजेक्ट तय समय पर पूरे होने की गति से नहीं चल रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत संचालित परियोजनाओं की भी जानकारी चाही गई है।
प्रतिनुियक्ति पर जमे इंजीनियरों की होगी वापसी
अलग-अलग विभाग में निर्माण कार्य से जुड़ी इकाइयों में ज्यादातर इंजीनियर प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं। कुछ एजेंसियों के इंजीनियरों के खिलाफ संबंधित विभाग एवं मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायतें पहुंच रही हैं। जिनमें लोक निर्माण विभाग के नियंत्रण वाली एजेंसियों के इंजीनियरों की शिकायतें ज्यादा हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र, पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन, मप्र गृह निर्माण मंडल, इंदौर विकास प्राधिकरण, भोपाल विकास प्राधिकरण के अलावा अन्य प्राधिकरणों में निर्माण कार्यों से जुड़े इंजीनियरों की शिकायतें हैं। नगरीय विकास विभाग के नियंत्रण में चल रहे पीएम आवासों के निर्माण में देरी की सबसे ज्यादा शिकायतें है।
