
- बड़े महकमे जनता की समस्याएं सुलझाने में पीछे
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश सरकार ने आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की थी। लेकिन विभागीय अफसरों की सुस्ती के कारण सीएम हेल्पलाइन खुद हेल्पलेस हो गई है। खासकर उन विभागों में बदहाली देखी जा रही है जिनसे जनता का जुड़ाव सबसे अधिक है। कृषि, स्कूल व उच्च शिक्षा, पीडब्ल्यूडी के साथ राजस्व और स्वास्थ्य जैसे बड़े महकमे जनता की समस्याएं सुलझाने में पीछे हैं, जिनसे जनता का सीधे जुड़ाव है। पीछे चलने वाले महकमों में ही हर माह एक लाख से अधिक शिकायतें रजिस्टर्ड हो रही हैं।
गौरतलब है कि सीएम हेल्पलाइन में हर माह आ रहीं हजारों शिकायतों के निपटारे के लिए सरकार ने ग्रेडिंग की व्यवस्था बनाई है। हाल ही में आई दिसंबर की रिपोर्ट में कई अहम विभाग पीछे रह गए हैं, तो ऊर्जा, पंचायत और नगरीय विकास ने टॉप 10 में जगह बनाकर रखी। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग लगातार शिकायतों के निपटारे में अव्वल चल रहा है। किसानों, स्कूल व उच्च शिक्षा, पीडब्ल्यूडी के साथ राजस्व और स्वास्थ्य जैसे बड़े महकमे पीछे हैं, जिनसे जनता का सीधे जुड़ाव है। हाल ही में शासन में उच्च स्तर पर बैठक में राजस्व विभाग के तहत आने वाली शिकायतों पर सवाल खड़े हुए थे। इसमें बंटवारा, नामांतर की शिकायतें भी पेंडिंग हैं। हर माह हो रही ग्रेडिंग ने भी इसकी पुष्टि की है।
दो समूह बनाकर विभागों की की मॉनिटरिंग
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की मॉनिटरिंग के लिए 54 विभागों को दो समूहों में बांटा गया है। पहले समूह में 30 विभाग रखे गए हैं, जो जनता से सीधे जुड़े हैं। इनमें शिकायतें भी हर माह हजार से ज्यादा हैं। दूसरे समूह में 24 छोटे विभाग रखे गए हैं, जिनमें शिकायतों की संख्या हजार से कम है। इन दोनों समूहों की हर माह ग्रेडिंग की जा रही है। दूसरे समूह में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग लगातार 90त्न अधिक शिकायतें निपटाकर टॉप पर बना हुआ है। इसमें संस्कृति, पर्यटन, उद्योग, एमएसएमई, एनवीडीए और भोपाल गैस त्रासदी टॉप 10 से बाहर हैं। बड़े विभागों के समूह में टॉप 10 में ऊर्जा, नगरीय विकास, खाद्य, पंचायत, वित्त, गृह व पीएचई जैसे विभाग हैं, जबकि पीडब्ल्यूडी, अजा-अजजा कल्याण, जीएडी, वन, स्वास्थ्य, स्कूल-उच्च और तकनीकी शिक्षा काफी पीछे हैं।
इस तरह से तय होती है विभागों की ग्रेडिंग
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निपटारें के आधार पर विभागों की ग्रेडिंग होती है। विभिन्न पैमानों पर आकलन कर उन्हें नंबर दिए जाते हैं। संतुष्टि के साथ बंद शिकायतों पर 60 प्रतिशत, 50 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों के निपटारे पर 10 प्रतिशत, निम्न गुणवत्ता से बंद शिकायतों को हल करने पर 10 प्रतिशत, जिन शिकायतों को नहीं देखा गया (नॉट अटेंडेंट), उन्हें हल करने पर 10 प्रतिशत और मान्य/अमान्य शिकायतों के निपटारे पर 10 प्रतिशत अंक दिया जाता है। दिसंबर में आई ग्रेडिंग में 30 बड़े विभागों के समूह में ऊर्जा पहले-दूसरे नंबर पर टिका रहा, वहीं टॉप 5 में नगरीय विकास भी रहा। वहीं 24 छोटे विभागों में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग लगातार अव्वल हैं, वहीं उद्योग, संस्कृति व पर्यटन विभाग पीछे हैं।
