
- रबी सीजन में 21,300 मेगावाट तक पहुंच सकती है मांग
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में रबी सीजन के दौरान किसानों को नियमित बिजली देने की तैयारी ने बिजली कंपनियों के सामने आपूर्ति का दबाव बढ़ा दिया है। कम बारिश से जल विद्युत उत्पादन प्रभावित होने और कोयले की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच बिजली की मांग और उपलब्ध उत्पादन में करीब 3 हजार मेगावाट का अंतर बताया जा रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में बिजली आपूर्ति का संतुलन बनाए रखना चुनौती बन सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती शुरू होने के बाद अब शहरी क्षेत्रों की आपूर्ति को लेकर भी आशंका जताई जा रही है।
प्रदेश में फिलहाल बिजली की मांग 12 से 13 हजार मेगावाट के बीच है, जबकि उपलब्ध उत्पादन करीब 12 हजार मेगावाट बताया जा रहा है। दूसरी ओर, रबी सीजन में सिंचाई के लिए किसानों को 10 घंटे बिजली देने के निर्देश हैं। वितरण कंपनियों के अनुमान के मुताबिक, इस दौरान अधिकतम मांग 21,300 मेगावाट तक पहुंच सकती है। मालवा-निमाड़ क्षेत्र में ही बिजली की मांग 8,200 मेगावाट से अधिक रहने का अनुमान है। मांग में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार और बिजली कंपनियों ने अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था शुरू कर दी है।
पंजाब से खरीदी बिजली, दूसरे राज्यों से भी बातचीत
बिजली की कमी को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश ने पंजाब से प्रतिदिन 550 मेगावाट बिजली खरीदना शुरू किया है। इसके साथ ही जरूरत पडऩे पर अन्य राज्यों से भी शॉर्ट टर्म आधार पर बिजली खरीदने की तैयारी की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि घरेलू उत्पादन के भरोसे बढ़ती मांग पूरी करना आसान नहीं होगा। हालांकि, अतिरिक्त बिजली खरीदने से आपूर्ति का अंतर कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन रबी सीजन में मांग कितनी तेजी से बढ़ती है और दूसरे राज्यों से कितनी बिजली उपलब्ध हो पाती है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
जल विद्युत संयंत्रों पर कम बारिश का असर
कम बारिश का असर प्रदेश के प्रमुख जल विद्युत संयंत्रों के उत्पादन पर पड़ा है। गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और मणिखेड़ा जैसे संयंत्रों में पानी की उपलब्धता उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। बारिश कम होने से इन परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली प्रभावित होने की स्थिति बनी है।इसके अलावा कोयले की उपलब्धता भी बिजली उत्पादन के लिए अहम है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली संयंत्रों को कोयले की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और पूरी क्षमता से काम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का प्रयास है कि उत्पादन में किसी अतिरिक्त बाधा के कारण बिजली की उपलब्धता और न घटे।
ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती, शहरों की बारी?
जानकारी के अनुसार, एक अक्टूबर से कई ग्रामीण और छोटे शहरी क्षेत्रों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। रबी फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को प्राथमिकता देने के कारण आपूर्ति का प्रबंधन और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी बीच दिसंबर से राजधानी भोपाल सहित दूसरे शहरी क्षेत्रों में भी कटौती की आशंका जताई जा रही है। कुछ अनुमानों में चार से छह घंटे तक कटौती की बात कही जा रही है, हालांकि इसका कोई आधिकारिक शेड्यूल अभी सामने नहीं आया है। अंतिम स्थिति बिजली की उपलब्धता, मांग और वैकल्पिक खरीद पर निर्भर करेगी।
किसानों को प्राथमिकता, आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुताबिक, सरकार का प्रयास है कि उत्पादन में कमी के बावजूद शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती न करनी पड़े। इसके लिए संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने, कोयले की आपूर्ति नियमित रखने और जरूरत पडऩे पर अतिरिक्त बिजली खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में किसानों को पर्याप्त बिजली देना प्राथमिकता है। वहीं, मध्यप्रदेश बिजली वितरण कंपनी के सीएमडी ऋषि गर्ग के अनुसार, उत्पादन और मांग के बीच अंतर कम करने के लिए पंजाब से बिजली खरीद शुरू की गई है। जरूरत पडऩे पर दूसरे राज्यों से भी बिजली खरीदी जाएगी। कंपनी का कहना है कि असाधारण परिस्थितियों को छोडकऱ कटौती से बचने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल बिजली संकट की चुनौती उत्पादन बढ़ाने के साथ मांग का प्रबंधन करने की है। रबी सीजन में किसानों को निर्बाध सिंचाई आपूर्ति देने और शहरों में कटौती रोकने के लिए सरकार को अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता, कोयले की नियमित आपूर्ति और जल विद्युत उत्पादन की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी।
