- सरकार की सख्ती और योजनाएं भी नाकाम…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
सरकार बाल विवाह जैसी कुरीति को खत्म करने के लिए सख्त रुख अपनाए हुए है। लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के तहत हर माह योजनाबद्ध गतिविधियां आयोजित होने के बावजूद बाल विवाह के मामले कम होने के बजाय बढ़ रहे हैं। मप्र सरकार के पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से लेकर 2025 तक करीब 2550 बाल विवाह के मामले दर्ज हैं। सरकार द्वारा जारी जिलेवार डेटा में यह भी सामने आया कि प्रदेश के कुछ जिले इस समस्या से विशेष रूप से प्रभावित हैं। राजगढ़, गुना, देवास, रतलाम और छतरपुर वे जिले हैं, जहां बाल विवाह के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। आंकड़े बताते हैं कि बाल विवाह को रोकने की दिशा में और अधिक प्रभावी, कठोर और व्यापक कदम उठाने की जरूरत है।
इस साल 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर एक बार फिर से बाल विवाह का मुद्दा विशेष रूप से चर्चा में आया है। राज्य सरकार ने गत 6 अप्रैल को सभी कलेक्टरों को अक्षय तृतीया के दिन बाल विवाह रोकने को लेकर निर्देश जारी किए हैं, क्योंकि यह देखा गया है कि इस अवसर पर बाल विवाहों की संख्या में खासी वृद्धि होती है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 में प्रदेश में बाल विवाह के 366 मामले (जहां लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम थी) सामने आए थे। इसके मुकाबले वर्ष 2025 में बाल विवाह की संख्या बढकर 538 हो गई। इस तरह पांच साल में बाल विवाह के मामला में डेढ़ गुना वृद्धि हुई।
चिंताजनक आंकड़े
गौरतलब है कि अक्षय तृतीया व देव उठनी एकादशी पर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। नुक्कड़ नाटक, बाल चौपाल, कार्यशाला, रैलियां की जाती हैं। जिला व ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें, सूचना दल, उइन दस्ता, कंट्रोल रूम और नियंत्रण कक्ष गठित किए जाते हैं। इसके बाद जो तस्वीर सामने आई है, वह चिंतित करने वाली है। जानकारी के अनुसार, इस समस्या से निपटने के लिए प्रदेश में बाल विवाह निषेध अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत सुनियोजित कार्यक्रमों के अनुसार नियमित रूप से गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। लेकिन बाल विवाह के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2021 में बाल विवाह के मामले बढ़कर 436 हो गए। वहीं 2022 में 519, 2023 में 528, 2024 में 529 और 2025 में अब तक 538 मामले तक पहुंच गए।
इस बार भी सरकार के कड़े निर्देश
गत 6 अप्रैल को कलेक्टरों को महिला-बाल विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों में बाल विवाह रोकने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। निर्देशों में कहा गया है कि अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को मनाई जाएगी और इस दिन राज्य भर में बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में बाल विवाह की संभावना को देखते हुए प्रशासन को कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा। स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों द्वारा जागरूकता रैलियां आयोजित की जाएंगी। गांवों में 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों की सूची बनाई जाएगी। उनके परिवारों को परामर्श दिया जाएगा और उन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। बाल विवाह रोकने के लिए हर ग्राम और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्व सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे। बाल विवाह की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।
