मुख्यमंत्री मोहन यादव का दावोस दौरा 2 दिनों के लिए टला

मुख्यमंत्री मोहन यादव
  • बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के शपथ ग्रहण समारोह में होंगे शामिल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्विट्जरलैंड के दावोस में वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम-2026 में हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री के दावोस प्रवास के शेड्यूल में परिवर्तन हो गया है। सीएम अब 20 जनवरी को दावोस के लिए रवाना होंगे। वे सम्मेलन में शामिल होने के बाद 22 जनवरी को भारत वापस आएंगे। पूर्व में प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 18 जनवरी को दावोस रवाना होना था और 23 जनवरी को उनके भारत आने का प्रोग्राम था। दअसल, गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की अधिसूचना जारी की गई है। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी को सिंगल नॉमिनेशन दाखिल करेंगे। यही वजह है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दावोस दौरे की तारीखों में बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दावोस दौरे के माध्यम से मप्र मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, रसायन उद्योग और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक उद्योग जगत से संवाद कर उन्हें मप्र आमंत्रित करेंगे। इस वर्ष वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम की थीम ए स्पिटि ऑफ डायलॉग रखी गई है, जो सहयोग और साझेदारी पर आधारित विकास मॉडल को रेखांकित करती है। इसी भावना के अनुरूप मप्र अपनी सहभागिता के साथ दावोस में निवेश-केंद्रित संवाद, नीति प्रस्तुतिकरण और रणनीतिक साझेदारियों पर फोकस करेगा। लगभग पांच वर्षों बाद राज्य सरकार की औपचारिक भागीदारी को वैश्विक मंच पर मप्र की नई आर्थिक ऊर्जा और प्रशासनिक तत्परता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दावोस में मप्र की सहभागिता के दौरान एमपीआईडीसी के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि, पर्यटन विभाग और नीति सलाहकार सक्रिय रूप से वन-टू-वन मीटिंग्स, सेक्टोरल राउंडटेबल्स और कॉर्पोरेट सत्रों में भाग लेंगे। वैश्विक सीईओ और अध्यक्षों के साथ बैठकों में औद्योगिक विस्तार, निर्यात क्षमता और रोजगार सूजन पर चर्चा होगी।
निवेश को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को भोपाल में पत्रकारों से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दावोस यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा, सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री वास्तव में मप्र में निवेश लाने में सफल हो पाएंगे? जानकारी के अनुसार दावोस में अडानी, इंडियन ऑयल सहित कई देशी कंपनियों के साथ समझौते किए जा रहे हैं। जब ये कंपनियां भारतीय हैं, तो फिर समझौते देश में ही क्यों नहीं किए गए? दावोस जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है। कि विदेशी निवेश न मिलने की स्थिति में देशी कंपनियों को विदेश ले जाकर समझौते किए जा रहे हैं, ताकि यह दिखाया जा सके कि विदेश से निवेश लाया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यह प्रयास हो सकता है, लेकिन प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि बीमारू कहे जाने वाले प्रदेश को आत्मनिर्भर मप्र कब बनाया जाएगा? सिंघार ने आगामी विधानसभा बजट सत्र को लेकर सरकार से सवाल किया कि क्या वह किसानों के लिए एमएसपी, खाद की उपलब्धता और कर्ज माफी जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय लेगी?
दावोस एजेंडे के प्रमुख आकर्षण
दावोस एजेंडे में ऊर्जा और रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में अडानी समूह के साथ मुरैना विद्युत वितरण से जुड़े एमओयू, अडानी डिफेंस के साथ रक्षा उत्पादन में सहयोग, स्विट्जरलैंड की शिवाग एजी को औद्योगिक भूमि आवंटन, डीपी वल्र्ड (यूएई) के साथ स्ट्रेटेजिक लॉजिस्टिक्स हब और फ्रांस की सानोफी द्वारा भोपाल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके साथ ही वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम के सहयोग से मप्र में सेंटर फॉर फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन की स्थापना का प्रस्ताव भी इस दौरे का प्रमुख आकर्षण है।

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