- राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर संगठन पर दबाव

गौरव चौहान
मप्र में भाजपा के नेताओं का निगम-मंडलों में नियुक्ति का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। इन नियुक्तियों को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिए है। असल में मोहन सरकार को भी दो साल होने जा रहे हैं, लेकिन निगम-मंडल में नई नियुक्तियों के लिए कतार में खड़े कार्यकर्ताओं का इंतजार बढ़ता जा रहा है। इस बीच प्रदेश में एक बार फिर निगम-मंडलों में नियुक्तियों का मामला फिर चर्चा में आ गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कुछ नामों पर आपत्ति होने के कारण मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से बात करके हरी झंडी लेने वाले हैं।
जानकारी के अनुसार, राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर संगठन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इस बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष खंडेलवाल ने सत्ता और संगठन में नियुक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि जिन नामों पर आपत्ति है, उनके बारे में दिल्ली से निर्णय होगा। भोपाल में आयोजित भाजपा के प्रशिक्षण महाअभियान के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्तियों की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। खंडेलवाल के अनुसार, लगभग 30 से 40 निगमों और मंडलों में नियुक्तियों की तैयारी पूरी हो चुकी है और जल्द ही नामों की घोषणा की जाएगी। उन्होंने बताया कि संगठन के खाली पदों को भरना पहली प्राथमिकता है। इसमें जिला प्रभारियों, विभिन्न प्रकोष्ठों, कार्यसमिति और मोर्चों का गठन शामिल है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संगठन जितना मजबूत होगा, पार्टी की राह उतनी ही आसान होगी। उन्होंने यह भी कहा कि निगमों-मंडलों में केवल सीमित लोगों को जगह मिलती है, लेकिन पार्टी अपने लाखों कार्यकर्ताओं के हितों का ध्यान रख रही है।
नियुक्ति की कवायद अब अंतिम दौर
सूत्रों के अनुसार, वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी शिष्टाचार भेंट कर सकते हैं। प्रदेश में भाजपा सरकार बने सवा दो साल हो चुके हैं। लंबे समय से निगम, मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों की बात उठ रही है। इसकी कवायद अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बुधवार-गुरुवार को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल के साथ चर्चा की। विधानसभा चुनाव-2023 के बाद से ही निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर संगठन पर दबाव है। पहले तो लोकसभा चुनाव के बाद राजनीतिक नियुक्तियां करने की योजना थी लेकिन भाजपा के संगठन चुनाव फिर प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में विलंब के कारण मामला टलता रहा। बिहार चुनाव के बाद राजनीतिक नियुक्तियों का मामला आगे बढ़ा लेकिन फिर भी कोई निर्णय नहीं हो पाया।
एक साथ ही नियुक्तियां की जाएंगी
फिर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद राय बनी की एक साथ ही नियुक्तियां की जाएंगी। यह भी बताया जा रहा है अधिकतर नाम तय हो गए हैं, पर केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी नहीं मिली थी। गौरतलब है कि विधानसभा व लोकसभा चुनाव के दो साल बाद भी निगम-मंडलों, प्राधिकरणों व आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियां न होने से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में आक्रोश के चलते मामला फिर गरमा गया है। जनवरी 2026 में 12 प्रमुख नियुक्तियां तय की गई थीं, लेकिन उस समय सारी नियुक्तियां एकमुश्त करने और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों के कारण प्रक्रिया अटकी रही।
