
- ऑल इंडिया सर्विसेज के रिटायर्ड अफसरों के पेंशन पर बड़ा फैसला
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में ऑल इंडिया सर्विसेज के रिटायर्ड अफसरों को मिलने वाली पेंशन खर्च पर एक बड़ा फैसला हुआ है, यह पैसा अब मप्र अब केंद्र सरकार से लेगा, जो क्लेम के रूप में वापस लिया जाएगा। जिसमें रिटायर होने के बाद मप्र में ही रहने वाले अधिकारी की पेंशन के साथ-साथ कई और चीजों को भी शामिल किया जाएगा, जिसमें ग्रेच्युटी और अर्नलीव भी शामिल होगी, यानि जो लोग मप्र से बाहर रह रहे हैं, उन्हें भी ग्रेज्युटी और अर्नलीव क्लेम मिलेगा। वित्त विभाग की तरफ से इस प्रस्ताव पर काम शुरू हो गया है, जिसमें पैसे का आंकलन किया जा रहा है जो केंद्र सरकार को क्लेम के रूप में भेजा जाएगा।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार को भेजा जाने वाला क्लेम 350 करोड़ रुपए का हो सकता है। क्लेम की राशि के आंकलन का काम पेंशन डायरेक्टोरेट को दिया गया है, जिसमें केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की तरफ से 2008 में बने डेथ कम रिटायरमेंट बेनीफिट रूल्स के लिए पेंशन रूल्स को भी रिवाइज कर दिया गया था। इसमें कहा गया था कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की पेंशन खर्च की जिम्मेदारी भारत सरकार अपने हाथ में लेगी। तब मप्र ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
पेंशन का भार मप्र से हट जाएगा
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में जाकर इसका लाभ लेने की तैयारी की है। साफ है कि 2008 के बाद रिटायर होने वाले अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के पेंशन का भार मप्र से हट जाएगा। मप्र 2008 से लेकर अभी तक के पेंशन खर्च की राशि एकमुश्त क्लेम करने वाला है। ऐसा होने से मप्र में रिटायर होने वाले अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के पेंशन का जो भार अब तक मप्र के खजाने पर आ रहा था, वह दूर हो जाएगा। मप्र सरकार अब इस राशि के लिए केंद्र सरकार को एकमुश्त क्लेम करने की तैयारी में है। जो शुरुआती आंकलन के मुताबिक 350 करोड़ रुपए के आसपास बनता दिख रहा है। इसके लिए अधिकारियों के 10 साल का डेटा जुटाया जा रहा है। 2008 के बाद से सभी रिटायर कर्मचारियों का डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। इसमें जो भी क्लेम बनेगा उसका पैसा केंद्र सरकार देगा। खास बात यह है कि पेंशन के मामले में सुरक्षित ट्रांजेक्शन जरूरी होता है, ऐसे में इस मामले में मप्र सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को एग्रीगेटर बैंक नियुक्त किया है, जहां सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का पैसा सीधे एसबीआई के पास जाएगा। इसके बाद अगर किसी को अपना पैसा दूसरे बैंक में ट्रांसफर करवाना है तो वह एसबीआई से इसे ट्रांसफर करवा सकते हैं।
