केंद्र को नहीं भाया मप्र का सोलर मोहल्ला प्रोजेक्ट

सोलर मोहल्ला प्रोजेक्ट

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना उपभोक्ताओं को बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने का अवसर प्रदान करता है। इस योजना से न केवल उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भारी बचत होगी, बल्कि सौर ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना को और आसान बनाने के लिए मप्र सरकार ने सोलर पैनल का मोहल्ला मॉडल बनाया है। इस मॉडल को   बनाकर प्रदेश सरकार ने अनुमति के लिए केंद्र को भेजा था। लेकिन केंद्र सरकार ने मप्र के सोलर मोहल्ला प्रोजेक्ट को खारिज कर दिया है। मप्र नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का कहना है कि भारत सरकार ने यूटिलिटी लैंड एग्रीगेशन मॉडल का प्रस्ताव लौटा दिया है, इसमें जो आपत्तियां की गई थीं, उन्हें हटाकर नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर पुन: भारत सरकार को भेज रहे हैं।
गौरतलब है कि  प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में सब्सिडी किसे देंगे, इसकी स्पष्टता न होने से सोलर पैनल के मोहल्ला माडल को केंद्र ने खारिज कर दिया। मप्र के इस यूटिलिटी लैंड एग्रीगेशन (यूएलए) प्रस्ताव को खारिज करने के पीछे तर्क दिया गया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में अभी ग्राउंड माउंटेड सिस्टम (जमीन-आधारित प्रोजेक्ट) की अनुमति नहीं है, केवल घर की छत पर ही प्रोजेक्ट लगाया जा सकता है। वहीं अगर हितग्राही की छत पर सोलर पैनल नहीं लगता तो इसकी सब्सिडी किसे दी जाएगी, यह बात भी प्रस्ताव में स्पष्ट नहीं है। बता दें कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर तीन किलोवाट (केवी) तक के सोलर सिस्टम लगवाने पर 40 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, जो 30,000 से 78,000 रुपये तक हो सकती है। पीएम सूर्य घर योजना में सब्सिडी संरचना इस प्रकार है: एक किलोवाट तक 30,000 रुपये सब्सिडी, दो किलोवाट तक 60,000 रुपये सब्सिडी और तीन किलोवाट या उससे अधिक पर 78,000 रुपये तक की अधिकतम सब्सिडी दी जाती है।
मोहल्ले में  लगाया जाना था बड़ा प्रोजेक्ट
मप्र नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के यूटिलिटी लैंड एग्रीगेशन के मोहल्ला माडल में किसी एक व्यक्ति के घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के बजाय मोहल्ला चिन्हित कर उसके पास बड़ा प्रोजेक्ट लगाया जाना प्रस्तावित था। उससे उत्पादित बिजली को बैटरी स्टोरेज कर घरों में मांग के अनुरूप आपूर्ति की जाती। प्रस्ताव में बिजली कंपनियां या स्टेट नोडल एजेंसी द्वारा अपने खर्च पर सोलर प्रोजेक्ट लगाने और घरों में मांग के अनुसार बिजली सप्लाई की तैयारी थी। राज्य सरकार को इस पूरे प्रोजेक्ट से प्रदेश में 3,500 मेगावाट सोलर ऊर्जा उत्पादन की संभावना थी। ग्राउंड माउंटेड सिस्टम एक सौर ऊर्जा प्रणाली है जिसमें सोलर पैनलों को छत पर लगाने के बजाय, जमीन में स्टील के खंभों या बीम के सहारे लगाया जाता है, जिससे पैनलों को सूर्य की दिशा के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। इसका रखरखाव भी आसान है और बड़े इंस्टालेशन की क्षमता होती है, खासकर उन जगहों के लिए जहां छत पर जगह कम हो या अनुपयुक्त हो। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में रूफटाप सोलर स्टेंडडर्स में व्यक्ति अपनी जेब से खर्च करता है और सब्सिडी का लाभ लेता है। इससे उसकी बिजली का बिल कम हो जाता है। यहाँ मप्र सरकार का प्रयास है कि बिजली कंपनी अपने खर्च से प्रोजेक्ट लगाए और घरों को बिजली सप्लाई करे।

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