खरमास बाद हो सकता है… मंंत्रिमंडल विस्तार

मोहन यादव
  • 18 जनवरी को दावोस जाने से पहले मुख्यमंत्री ले सकते हैं बड़ा निर्णय

 भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की कैबिनेट का खरमास बाद यानी जनवरी के दूसरे पखवाड़े में विस्तार होने की संभावना है। मंत्रिमंडल से तीन से चार मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। बताया जा रहा है कि दो साल के कार्यकाल की परफॉर्मेंस रिपोर्ट, आधार बनेगी। खराब परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। वरिष्ठ विधायकों की भी मंत्रिमंडल में एंट्री हो सकती हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में 8 विधायक मंत्री पर की शपथ ले सकते हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मकर संक्रांति पर्व के बाद 18 जनवरी को स्विटरलैंड के दावोस जाएंगे। वे वहां 23 जनवरी तक आयोजित वैश्विक आर्थिक कार्यक्रम में हिस्सेदारी लेंगे। भाजपा सूत्रों का कहना है कि यदि राजनीतिक समीकरण ठीक रहे तो मुख्यमंत्री के विदेश रवाना होने से पहले ही मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। यदि नए मंत्रियों के नाम और मौजूदा मंत्रियों को हटाने पर विरोध की स्थिति बनती है तो फिर मामला आगे खिसक सकता है।
गौरतलब है कि प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार कार्यकाल के दो साल पूरा कर चुकी है। नया साल शुरू होने के साथ ही मंत्रिमंडल के विस्तार एवं फेरबदल की अटकलें शुरू हो गई हैं। खबर है कि पिछले महीने सत्ता और संगठन के बीच निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर मंथन का दौर खत्म हो चुका है। इस महीने नियुक्तियां होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर केद्रीय नेतृत्व ने संकेत दे दिए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर रवाना होने से पहले शपथ होने के आसार हैं। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की समीक्षा बैठक में मंत्रियों और उनके विभागों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट सामने आई है। कुछ को अच्छे नंबर मिले है तो कुछ कमजोर निकले है। कमजोर परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में मुख्यमंत्री सहित 31 सदस्य डॉ. मोहन यादव मंत्रिमण्डल का हिस्सा है, विधानसभा में सदस्यों की संख्या के अनुपात में राज्य में सीएम सहित 35 मंत्री हो सकते है। ऐसे में 4 पद पहले से ही खाली है, जबकि 4 मौजूदा मंत्रियों से इस्तीफे लिए जा सकते है। इनमें से दो राज्यमंत्री तो इतने ही कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार के मंत्री हो सकते है। सूत्रों का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री अपने पास से कुछ विभागों को दूसरे मंत्रियों को देने के साथ ही विभागों में भी परिवर्तन कर सकते है। दरअसल सीएम अगले तीन साल तक पूरी तरह से मप्र को विकसित बनाने के मिशन पर और तेजी से काम करेंगे। इसके लिए वे मंत्रियों से भी उम्मीद करेंगे कि जिस मेहनत के साथ सीएम अपने संकल्पों को पूरा करने और मध्यप्रदेश के विकास को गति देने का काम कर रहे है, उसी तरह मंत्रियों को भी काम करना होगा।
डॉ. मोहन को मिल चुका है फ्री हैंड
 पिछले महीने ग्वालियर प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोहन सरकार की पीठथपथपाई थी। शाह के दौरे के बाद से ही मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों को बल मिला है। खबर है कि कुछ मंत्रियों को पार्टी नेतृत्व की ओर से संकेत भी मिले हैं। इनमें वे मंत्री शामिल हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जाना है और जिनके विभागों में तब्दीली होना है। हाल ही में सत्ता और संगठन के नेताओं की दिल्ली, भोपाल में हुई मुलाकातों को भी निगम मंडलों में नियुक्तियां और मंत्रिमंडल विस्तार से जोडकऱ देखा जा रहा है। पिछले महीने सरकार की 2 साल की उपब्धियां गिनाते समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार के सवाल पर जल्द ही निर्णय के संकेत दिए थे। साथ ही उन्होंने मंत्रियों की परफार्मेंस की भी बात कही थी। इधर मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना के चलते गृह विभाग की वाहन शाखा ने मंत्रियों के लिए वाहनों को इंतजाम करना शुरू कर दिया है।  सीएम डॉ. मोहन यादव के पास भाजपा विधायकों की परफार्मेंस से जुड़ी सूची भी है, जिसके आधार पर ही डॉ. यादव अपने मंत्रिपरिषद के नए सदस्यों के बारे में फैसला ले सकते है। चर्चा है कि जब भी फेरबदल होगा, तब 6 से 8 विधायकों को सीएम मंत्री पद की शपथ दिलवा सकते हैं। इनमें कुछ वरिष्ठ विधायक भी हो सकते है। साथ ही निर्णय लेते वक्त जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर भी गौर किया जाएगा। इधर मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद के संभावित फेरबदल के बाद नए सिरे से मंत्रियों को जिलों के प्रभार सौंपेगे। इसमें इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को छोडकऱ किसी भी मंत्री को दो जिलों का प्रभार नहीं दिया जाए। साथ ही जिन मंत्रियों को दो जिलों का प्रभार सौंपा जाएगा, उनकी दूरी मंत्रियों के गृह क्षेत्र से ज्यादा नहीं रहेगी। भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सलाह पर ही केन्द्रीय नेतृत्व मंत्रिपरिषद में बदलाव करेगी। इसमें सबसे बड़ा मापदंड मंत्रियों की परफार्मेस रहेगा। जिन्होंने दो साल में औसत से भी कम काम किया है या जिनकी वजह से सरकार और संगठन की किरकिरी हुई है, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना लगभग तय है, क्योंकि पार्टी अगले तीन साल तक ऐसे लोगों से बिल्कुल दूर रहना चाहती है, जिनकी कार्यशैली, गतिविधियां या दूसरे कारणों से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है।
केन्द्रीय नेतृत्व के पास मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले दिनों भोपाल और खजुराहो में मंत्रियों के विभागों की समीक्षा की है। इसके आधार पर मंत्रियों की रैटिंग तय की गई है। जिसे केन्द्रीय नेतृत्व के पास भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो इस पर कई चक्रों में मंथन किया जाएगा और उस पर 15 जनवरी के पहले अंतिम निर्णय भी हो जाएगा। कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर नितिन नवीन की नियुक्ति करने के बाद कुछ राज्यों में संगठन और सरकार स्तर पर बड़े फैसले होने का संकेत दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा संगठन की राष्ट्रीय स्तर की टीम में मध्यप्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। इनमें कुछ नेता ऐसे भी हो सकते हैं, जो वर्तमान समय में प्रदेश सरकार में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन नेताओं से मंत्री पद लेकर उन्हें संगठन में राष्ट्रीय महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। जानकारों का कहना है कि परफार्मेंस के आधार पर यदि विधायकों से मंत्री पद लिया जाएगा, तो मंत्री भी ऐसे विधायकों को बनाया जाएगा, जिनका दो साल का परफार्मेस अपने क्षेत्र में बेहतर रहा है और जिनके द्वारा केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का अपने क्षेत्र में बेहतर ढंग से क्रियान्वयन कराया है।

Related Articles