बिल्डर्स नहीं मान रहे रेरा के आदेश न ग्राहकों को पजेशन दे रहे, न हर्जाना

रेरा
  • 21 जिलों के दो हजार लोगों के फंसे 312 करोड़ रुपए

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भू संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) का डर बिल्डरों के मन से खत्म हो गया है। बिल्डर्स रेरा के आदेश को नहीं मान रहे है। हद तो यह है कि उन्होंने अनुबंध के बाद भी समय पर ने तो ग्राहकों को मकान का पजेशन दे रहे हैं और न ही हर्जाना। गौरतलब है कि प्रदेश में रेरा का गठन वर्ष 2017 में हुआ। इसके बाद से प्रभावित लोगों द्वारा बिल्डरों के खिलाफ शिकायतें की जा रही हैं। वर्ष 2020 से रेरा ने बिल्डरों के खिलाफ आदेश पारित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इन चार-पांच वर्ष के अंदर 2 हजार लोगों की राशि बिल्डरों से वापस कराने के आदेश रेरा ने दिए हैं।
राजधानी भोपाल के राम सहोदर बाघमारे ने पांच साल पहले राधा बिल्डर से 40 लाख रुपए कीमत का घर बुक कराया था। लेकिन अनुबंध के अनुसार बिल्डर ने मकान बनाकर नहीं दिया। इस मामले को लेकर बाघमारे ने रेरा में अपना पक्ष रखा। भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने फैसला देते हुए कलेक्टर को आदेश दिए कि बिल्डर से अतिरिक्त राशि की वसूली की जाए। यह मामला अकेले राम सहोदर का नहीं है, बल्कि अपने सपनों का घर बुक करने वाले दो हजार से ज्यादा लोग हैं, जिन्हें बिल्डरों ने वायदे के अनुसार न मकान बनाकर दिया और न ली गई एडवांस राशि वापस की। ऐसे वादाखिलाफी करने वाले बिल्डरों से कलेक्टर भी वसूली करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। भोपाल, इंदौर जबलपुर सहित 21 जिलों के कलेक्टरों को को 312 करोड़ रुपए वसूल कर यह राशि आवास बुक करने वालों को लौटाना है।
कोर्ट के फैसलों के खिलाफ न्यायालयों में अपील
रेरा के फैसले का पालन नहीं करने पर घर बुक कराने वाले सौ से अधिक लोग कोर्ट पहुंचे हैं। कोर्ट ने कई बिल्डरों को लोगों की राशि वापस करने के फैसले सुनाए हैं। बताया जाता है कि कोर्ट के फैसलों के खिलाफ कई बिल्डरों ने हाईकोर्ट सहित अन्य न्यायालयों में अपील की है। भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा)के सचिव डीव्ही सिंह का कहना है कि  रेरा ने 2017 के बाद से समय पर सुनवाई कर बिल्डरों को राशि वापस करने के आदेश दिए हैं। कई बिल्डर रेरा के आदेशों को नहीं मान रहे हैं, जिनके खिलाफ कलेक्टरों को वसूली के संबंध में आदेश पारित किया गया है। कोलार निवासी भोपाल मनीष तिवारी मयूरी बिल्डर ने मकान बुक करने के दौरान जो वादा किया था, उसके अनुसार घर नहीं दिया, मकान देने में भी एक वर्ष देर कर दी। रेरा ने मेरे पक्ष में फैसला दिया। बिल्डर इसका पालन नहीं कर रहा है। आयुष बिल्डर के रमेश सिंह का कहना है कि मकान बुक करते समय लोग अनुबंध और शर्तों को ठीक से नहीं देखते हैं। रेरा में चले जाते हैं, रेरा मकान बुक करने वालों की तरफ फैसला देता है। जहां तक समय में मकान नहीं देने के बात है मकान बुक कराने वाले कई बदलाव कराते हैं। इसके करण प्राजेक्ट लेट हो जाता है।

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