
- आज कैबिनेट के समक्ष होगा बजट प्रेजेंटेशन
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा। 18 फरवरी को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा बजट पेश करेंगे। संभावना जताई जा रही है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पिछले बजट के मुकाबले 10 प्रतिशत के आसपास वृद्धि होने के आसार हैं। इस बार मप्र सरकार का बजट 4.65 लाख करोड़ का हो सकता है। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में वित्त विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री और मंत्रियों के समक्ष आगामी बजट को लेकर प्रेजेंटेशन देंगे। बजट में मुख्यमंत्री के निर्देशों और मंत्री के सुझावों के आधार पर जरूरी संशोधन और नए प्रावधान किए जाएंगे। इसके बाद बजट फायनल होगा।
जानकारी के अनुसार, मप्र सरकार की वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। बजट को फाइनल करने के लिए वित्त विभाग के अधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं। मप्र सरकार विधानसभा में 18 फरवरी को बजट पेश करेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पिछले बजट के मुकाबले 10 प्रतिशत के आसपास वृद्धि होने के आसार हैं। इस बार मप्र सरकार का बजट 4.65 लाख करोड़ के नजदीक हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले इस बार बजट में सबसे कम वृद्धि होने की संभावना है। मप्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 4.21 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया था। मप्र सरकार पर वर्तमान में करीब 4.75 लाख करोड़ का कर्ज है।
साल-दर-साल बढ़ रहा बजट
मप्र सरकार के बजट में साल-दर-साल बढ़ोतरी हो रही है। पिछले चार वर्षों में मप्र के बजट में करीब 1.80 लाख करोड़ की वृद्धि हुई है। मप्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2221-22 में 2.41 लाख करोड़ का बजट पेश किया था, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट 4.21 लाख करोड़ था, जो पिछले बजट से 16 प्रतिशत ज्यादा था। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बजट 3.65 लाख करोड़ था, जो पिछले बजट से 15 प्रतिशत ज्यादा था। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजट 3.14 लाख करोड़ था, जो पिछले बजट से 13 प्रतिशत ज्यादा था।
किसानों को कई सौगातें, नौकरियों की भरमार
सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, और इसकी झलक बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का बजट 70,000 करोड़ रुपए के आसपास हो सकता है। पिछली बार भी कृषि विभाग के बजट में 13 हजार करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी कर इसे 58 हजार करोड़ किया था। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन के लिए प्रत्येक जिले में एक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी। 7.5 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन की सिंचाई का टारगेट तय किया है। इसके अलावा उद्योगों और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए बजट में करीब 22 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया जाएगा। बजट में सिंहस्थ-2028 के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जा सकती है। बजट में न कोई नया कर लगाया जा रहा है और न ही किसी कर की दर बढ़ाने का प्रस्ताव है। बजट सत्र के दौरान विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा। अनुपूरक बजट की राशि फायनल हो गई है। अनुपूरक बजट का आकार 5 हजार करोड़ से ज्यादा का होगा। शहरी क्षेत्रों में परिवहन को सुगम और सस्ता बनाने के लिए सहकार टैक्सी सेवा शुरू करने की घोषणा की जा सकती है। सहकारिता विभाग की यह योजना ओला और उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों का एक सहकारी विकल्प प्रदान करेगी। इसका संचालन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) और अन्य बड़ी सहकारी समितियों के जरिए होगा। चूंकि यह एक सहकारी मॉडल होगा, इसलिए ड्राइवरों को किसी कंपनी को कमीशन नहीं देना होगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा और राइड्स मौजूदा टैक्सियों की तुलना में सस्ती होंगी। कमीशन मुक्त होने से ड्राइवरों की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। योजना की शुरुआत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से होगी, और सफलता के बाद इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।
केंद्रीय करों में कटौती दिखेगा असर
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गत एक फरवरी को संसद में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया था। आम बजट में केंद्रीय करों में मप्र की हिस्सेदारी घट गई है। मप्र को अब तक केंद्रीय करों के हिस्से में 7.850 प्रतिशत राशि मिलती थी, इसे घटाकर 7.347 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे हर साल मप्र को केंद्रीय करों के हिस्से में करीब 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय करों से मप्र को जो 1 लाख 11 हजार 613 करोड़ मिलने थे, इसे भी घटाकर 1 लाख 9 हजार 348 करोड़ कर दिया है। यानी मौजूदा साल में भी मप्र को 2265 करोड़ कम मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 1 लाख 12 हजार 133 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। रिवाइज आंकड़े से तुलना करें, तो मप्र की हिस्सेदारी सिर्फ 520 करोड़ ही बढ़ रही है। मप्र सरकार का वित्त विभाग अपने बजट को फायनल करने के लिए केंद्रीय बजट पर बारीकी से नजर रखे था। केंद्रीय करों में मप्र की हिस्सेदारी में 0.50 प्रतिशत की कटौती का सीधा असर मप्र के बजट पर पडऩे के आसार हैं। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हर पांच साल बाद जब भी नए फायनेंस कमीशन का गठन होता है, तो उस साल बजट तैयार करने में मुश्किलें सामने आती हैं, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं रहता कि केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा बढ़ेगा या घटेगा। ऐसे ही केंद्र से राज्यों में मिलने वाली विभिन्न प्रकार की ग्रांट को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। यही वजह है कि इस बार मप्र सरकार के वित्त विभाग को बजट तैयार करने में काफी मशक्कत करना पड़ी है। ऊपर से केंद्रीय बजट में मप्र के केंद्रीय करों के हिस्से में कटौती कर दी गई।
