- मप्र के जर्जर पुलों की होगी रिपेयरिंग

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
करीब दो महीने पहले रायसेन जिले में हुए पुल हादसे के बाद सरकार ने प्रदेश के सभी जर्जर पुलों की मरम्मत कराने का फैसला लिया था। सूत्र बताते हैं कि लोक निर्माण विभाग ने पूरे प्रदेश में ऐसे 45 पुलों को चिन्हित किया है जिनमें सुधार की जरूरत है। इसको लेकर मध्य प्रदेश सडक़ विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने इन्हें सुधारने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। करीब 28 करोड़ की राशि से इन पुलों की मरम्मत की जाएगी। इसके अलावा एमपीआरडीसी द्वारा प्रदेश के विभिन्न संभागों के ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को भी सुधारा जाएगा।
दरअसल, प्रदेश में जिन पुलों का निर्माण दशकों पहले हुआ था, उनमें से कई की स्थिति खराब हो गई है। प्रदेश के स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे के कई पुल जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में इन पुलों से अब हादसे भी हो रहे हैं। ऐसे में मप्र में हादसों का सबब बन रहे जर्जर पुलों की अब मरम्मत की जाएगी। इसको देखते हुए एमपीआरडीसी ने इन्हें सुधारने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। एमपीआरडीसी के अंतर्गत मौजूदा दुर्घटना प्रतिक्रिया प्रणाली और ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए निविदा जारी की गई है। इस परियोजना की अवधि 36 माह निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि रायसेन जिले के नयागांव इलाके के अंतर्गत आने वाले पिपरिया रोड पर बना पुराना पुल पिछले साल दिसंबर में ढह गया था। पुल के अचानक ढहने से पुल से गुजर रही दो बाइकें नीचे आ गिरी, जिस पर सवार 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसे एमपीआरडी पहले ही जर्जर घोषित कर चुका था। इसके बाद भी पुल से आवाजाही हो रही थी। इससे पुल ढह गया था। इसके बाद से एमपीआरडीसी और लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के सभी जर्जर पुलों को ठीक करने का काम शुरू कर दिया है।
कई निविदाएं जारी की गई
प्रदेश के विभिन्न संभागों में अत्यंत खराब स्थिति में पहुंचे पुलों की मरम्मत और रखरखाव के लिए भी कई निविदाएं जारी की गई खराब पुलों की मरम्मत के लिए 1.34 करोड़ रुपए की निविदा जारी की गई है, जिसकी कार्यवाही वर्षाकाल रहित 6 माह निर्धारित की गई है। इसी प्रकार नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा और रीवा संभाग के लिए 1.98 करोड़ रुपए की निविदा आमंत्रित की गई है। इंदौर संभाग में खराब श्रेणी के पुलों की मरम्मत के लिए 2.48 करोड़ रुपए की निविदा जारी की गई है, जिसकी कार्य अवधि 3 माह तय की गई है। वहीं जबलपुर-नरसिंहपुर-पिपरिया रोड (राज्य राजमार्ग-67) पर किमी 5/106 पर डायवर्जन रोड सहित 12 सेल बॉक्स के निर्माण के लिए 0.99 करोड़ रुपए की लागत से कार्य कराया जाएगा, जिसकी अवधि 6 माह रखती गई है। करीब 28 करोड़ की राशि से इन पुलों की मरम्मत की जाएगी। इसके अलावा एमपीआरडीसी द्वारा प्रदेश के विभिन्न संभागों के ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को भी सुधारा जाएगा।
सडक़ों का भी होगा सुधार
एमपीआरडीसी खराब हो चुकी सडक़ों को भी सुधार रहा है। इसके लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक से बनने वाली सडक़ें ज्यादा मजबूत और टिकाऊ रहेंगी। मप्र सडक़ विकास निगम ने इस तकनीक से प्रदेश की 10 सडक़ों के सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनके उन्नयन की शुरुआती लागत 50 करोड़ रुपए रखी गई है। प्रदेश की इन सडक़ों का सुधार संबंधित एजेंसी को 10 से 24 महीने के भीतर करना होगा। व्हाइट टॉपिग तकनीक में पुरानी सडक़ की ऊपरी परत को हटाकर कांक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। इसमें एम 40 ग्रेड सीमेंट और फाइबर बुरादा का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी परत 6 से 8 इंच तक मोटी होती है, जो सडक़ को मजबूत बनाती है।
मप्र में सुरक्षित होंगे स्टेट हाईवे
मध्य प्रदेश सडक़ विकास निगम (एमपीआरडीसी) एक्सीडेंट रिस्पांस सिस्टम (एआरएस) को अद्यतन करने जा रहा है। वर्ष 2014 में शुरू किए गए इस इंटीग्रेटेड सिस्टम के जरिये स्टेट हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में टोल फ्री नंबर 1099 के माध्यम से सहायता पहुंचाई जाती है। हर साल इस सिस्टम पर औसतन चार हजार फोन आते हैं। अभी एआरएस 2.0 पर काम किया जा रहा है। इसका नया वर्जन एआरएस 3.0 तैयार होने वाला है। इसे डायल 112, 108, 100 आदि से एकीकृत किया जाएगा ताकि दुर्घटना होने पर तुरंत ही घायलों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके। सिस्टम को अपग्रेड करने में एमपीआरडीसी द्वारा नौ करोड़ 25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। एमपीआरडीसी द्वारा इस सिस्टम से स्टेट हाईवे और मुख्य जिला सडक़ों पर होने वाली दुर्घटनाओं में सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही पूरा डेटाबेस भी रखा जाता है। एआरएस का मुख्य कार्य घटनास्थल का पता लगाना है। हाईवे पर लगे कैमरों या एंबुलेंस व पेट्रोलिंग वाहनों में लगे जीपीएस और सेंसर के माध्यम से दुर्घटना की जानकारी प्राप्त की जाती है। सूचना मिलते ही केंद्रीकृत काल सेंटर से कंप्यूटर एडेड डिस्पैच सिस्टम के जरिये दुर्घटनास्थल के सबसे पास मौजूद एंबुलेंस और पुलिस को तुरंत सूचित किया जाता है। इसके बाद सुनिश्चित किया जाता है कि दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के साथ ही सहायता प्राप्त हो सके। एआरएस की शुरुआत 28 दिसंबर, 2014 को की गई थी।
