एआई से न्याय प्रक्रिया तेज करने पर किया मंथन

एआई
  • भोपाल में दो दिनी चीफ जस्टिस कॉन्फ्रेंस का समापन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी में आयोजित दो दिवसीय जस्टिस कांफ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। जहां सीजेआई समेत 25 हाईकोर्ट चीफ जस्टिस ने एआई से न्याय प्रक्रिया तेज करने पर मंथन पर जोर दिया। इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत समेत सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायाधीशों ने तकनीक के साथ न्यायिक कार्यों के भविष्य पर अपनी राय साझा की है। यह एकीकृत, कुशल और जन-केंद्रित न्यायपालिका केंद्रीत था। महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में एआई के उपयोग और इसके विकास को लेकर एक समिति का गठन किया है। दिसंबर 2025 में इसका पुनर्गठन किया गया है। यह समिति सुप्रीम कोर्ट और अधीनस्थ न्यायपालिका में एआई टूल्स को अपनाने, विकसित करने और इनके उपयोग के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा इसके अध्यक्ष हैं। भोपाल में हुई कॉन्फ्रेंस की थीम एकीकृत, कुशल और जन-केंद्रित न्यायपालिका रही।

कॉन्फ्रेंस में देशभर के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों ने डिजिटल नवाचार के माध्यम से भाषाई और भौगोलिक बाधाओं को तोडऩे पर विचार-विमर्श किया। इस कार्यक्रम में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के साथ एनजेए के डायरेक्टर जस्टिस अनिरुद्ध बोस और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशगण ने इसमें विचार रखे। जिसमें जस्टिस जेके महेश्वरी, पी. नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर जस्टिस बीबी नागरत्ना, जस्टिस दत्ता, जस्टिस जॉय माल्या बागची, जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली अहम रहे। कमोबश सबकी राय थी कि लंबित मुकदमों को निपटाने में एआई मददगार हो सकता है। मुकदमों की प्रक्रिया तेज करने में इसका इस्तेमाल होना चाहिए लेकिन फैसले में एआई की भागीदारी बिल्कुल न हो। फैसले तो पूरी तरह न्यायाधीशों के विवेकाधीन ही होने चाहिए।
परिजनों ने निहारी भोपाल की खूबसूरती
जस्टिस जहां कांफ्रेंस में व्यस्त थे। वहीं उनके परिजनों ने भोपाल और आसपास के पर्यटन स्थलों की खूबसूरती का आनंद लिया है। जिसमें भोपाल हाट पहुंचकर मेले का भ्रमण कर पसंदीदा सामग्री की खरीददारी भी शामिल है। भीमबैठका, भोजपुर के विख्यात शिव मंदिर और ट्राइबल म्यूजियम समेत ऐतिहासिक व दार्शनिक स्थलों का भी इनके द्वारा भ्रमण किया गया।

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