
- एसआईआर से बिगाड़ा राजनीतिक दलों का खेल
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) के बाद बड़ी संख्या में नाम कटने का मामला सामने आया है। प्रदेशभर में एसआईआर प्रक्रिया के जरिए 42 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इससे राजनीतिक पार्टियों की चिंता बढ़ गई है। सत्तारूढ़ भाजपा में तो इस बात को लेकर मंथन शुरू हो गया है कि आखिर ऐसी स्थिति कैसे निर्मित हो गई है। इसको लेकर गतदिनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने चिंता व्यक्त की।
प्रदेश में एसआईआर के पहले फेज में लाखों की संख्या में नाम कटने से भाजपा की चिंता बढ़ गई है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) की। इसमें सभी संभाग प्रभारी, एसआईआर की टीम और प्रमुख लोगों से सीधी बात की गई। प्रभारी ने कहा कि अभी तक मप्र का संगठन हर मामले की परफॉर्मेंस में नंबर एक रहता था, लेकिन एसआईआर में बुरी स्थिति हो गई है। वीसी में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी जुड़े।
प्रभारी ने दिखाई सख्ती
प्रभारी ने सख्त लहजे में यह भी कहा कि समय निकल रहा है। दूसरा फेज चालू है। 10 जनवरी तक यह प्रयास किया जाए कि एएसडी (अनुपस्थित या एबसेंट, स्थानांतरित या शिफ्टेड और मृत या डेथ ) में जो भी कमी रही है, उसे तुरंत पूरा किया जाए। एएसडी में ऐसे लोगों के नाम कट गए, जो वर्तमान में हैं तो उन्हें तुरंत जोड़ा जाए। विधायक और विधानसभा क्षेत्रों के हारे हुए प्रत्याशी अपनी जिम्मेदारी समझें। अब उन्हें सक्रिय होना होगा। करीब पौन घंटे चली वीसी में प्रभारी ने कहा कि 10 जनवरी तक ज्यादा से ज्यादा नाम जुड़वाने के प्रयास हो। साथ ही हर बूथ पर कम से कम 50 नए वोटर बनें। सभी को 6,7 और 8 नंबर फॉर्म भी देने की बात कही गई। वीसी के बाद दो डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को क्रमश: रीवा-शहडोल और उज्जैन जोन की जवाबदारी दी गई। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल को सागर, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह को जबलपुर व नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर जोन का जिम्मा दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने भोपाल व नर्मदापुरम जोन अपने पास रखा है।
डिजिटलाइजेशन पर उठाया सवाल
भाजपा में एसआईआर के संयोजक व विधायक भगवानदास सबनानी और प्रदेश मंत्री व सह संयोजक रजनीश अग्रवाल ने चुनाव आयोग को को ज्ञापन दिया। इसमें बड़ा आरोप लगाया गया है कि भाजपा को यह जानकारी कई बूथों से मिली है कि फॉर्म जमा करने के बाद भी डिजिटलाइज नहीं किया जा रहा है। जमा किए गए सभी फॉर्म की संख्या और डिजिटलाइज फॉर्म की संख्या की रोजाना जानकारी दी जाए। साथ ही जिन व्यक्तियों को नो-मैपिंग के प्रकरणों में सुनवाई के लिए प्रतिदिन बुलाया जा रहा है, उनकी सूची भी हमारे बीएलए-एक को दी जाए। ताकि इस श्रेणी के वोटरों को पहचान पत्र लेकर संबंधित अधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करने की सलाह दी जा सके। भाजपा ने आयोग से कहा कि सभी राजनैतिक दलों के बीएलए-2 के द्वारा प्रत्येक बूथ पर फॉर्म-6, 7 और 8 प्रस्तुत किए जा रहे हैं, उसका विवरण विधानसभा वार रोज देने की व्यवस्था की जाए। इससे जिन बूथ पर कार्य धीमा चल रहा है, वहां ठीक से काम किया जा सके।
