बजट सत्र में दिखेगा भाजपा की सामूहिकता का दम

  • सदन में भाजपा कांग्रेस का सामना करने के लिए तैयार

गौरव चौहान
मप्र विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है। सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने पूरी तैयारी की है। दरअसल, कांग्रेस को उम्मीद है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान भाजपा के नेताओं के बीच मनमुटाव देखने को मिला है उससे सरकार को घेरने में आसानी होगी। लेकिन सत्र से पहले ही जिस तरह सत्ता और संगठन में एकरूपता देखने को मिली है उससे बजट सत्र के दौरान भाजपा की सामूहिकता का दम देखने को मिलेगा। दरअसल, सीएम डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मुलाकात से भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि पार्टी अब एकजुट होकर कांग्रेस को घेरेगी।  कैलाश विजयवर्गीय संसदीय मंत्री भी हैं। सत्र से लेकर राज्यसभा के चुनाव तक संसदीय कार्य मंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यह भी कारण हो सकता है कि कैलाश विजयवर्गीय से समय की नजाकत को पहचाना हो और एकता के लिए स्वयं पहल की हो।
गौरतलब है कि चाहे यूजीसी के समानता विनियम से उपजी स्थिति हो या फिर ब्राह्मण बेटियों को लेकर असभ्य बयान पर आईएएस संतोष वर्मा पर कार्रवाई को लेकर भाजपा में दो ध्रुव बने हुए थे, लेकिन विधानसभा के बजट सत्र शुरू होने से पहले स्थिति बदल गई है। अब सत्ता और संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी में सब ठीक है। कहीं कोई मतभेद नहीं है। इंदौर के दूषित जल कांड के बाद बनी स्थिति पर सड़क से लेकर संगठन तक पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया है। इसी घटना की वजह से विवाद में आए नगरीय विकास एवं आवास और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और सरकार के बीच जो दूरी नजर आ रही थी, वह भी 14 फरवरी को समाप्त होती दिखी। कुल मिलाकर अब भाजपा विधानसभा में एकजुट होकर कांग्रेस का सामना करने के लिए तैयार हो गई है। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में न आने से संगठन और सरकार दोनों ने ही राहत की सांस ली है। विधानसभा में भी सरकार विजय शाह मामले के अदालत में होने की बात कहकर जवाब देने से बच जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को बदलकर सरकार ने विषाक्त कफ सीरप कांड मामले में कार्रवाई का संदेश देने का प्रयास किया है।
विजयवर्गीय लौटे मुख्यधारा में
कैलाश विजयवर्गीय का समर्पण या विराम एक महीने से सरकारी कामकाज से दूर रहकर नाराजगी जाहिर करने वाले कैलाश विजयवर्गीय का 14 फरवरी  को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से मिलना समर्पण का संदेश है या अभी सियासी विराम है, यह स्पष्ट होना है। कई माह से उनकी मुख्यमंत्री से अनबन चर्चा में थी। इंदौर में उनके विधानसभा क्षेत्र में भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के बाद तो उन्होंने खुद को बिलकुल अलग-थलग कर लिया था। कैलाश विजयवर्गीय संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते से भी मिले पर उन्होंने मुख्यमंत्री या केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर कोई मध्यस्थता नहीं की। माना जा रहा है कि ऐसे में अलग-थलग पड़े कैलाश विजयवर्गीय खुद मुख्यमंत्री से मिलने पहुंच गए। उन्होंने भले ही यह संदेश दिया कि हमारे बीच कोई गिले-शिकवे नहीं हैं। लेकिन व्यवहार के विपरीत उनका झुकना ही सारी कहानी बयां कर रहा है। उन्होंने मंत्रीपद बचाना ही उचित समझा और समझौतावादी नीति पर अमल कर लिया।  किसी भी मंत्री की मुख्यमंत्री से भेंट सामान्यतया होती रहती है लेकिन इस विषय पर बाहर कोई चर्चा नहीं होती। कई माह से उनकी मुख्यमंत्री से अनबन चर्चा में थी।

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