
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश सरकार अब सरकारी कर्मचारियों से जुड़े उन नियमों में बदलाव की तैयारी में है, जो लंबे समय से कर्मचारियों के लिए परेशानी और असुरक्षा का कारण बने हुए थे। राज्य सरकार दो अहम नियमों में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आ सकती है, जिससे हजारों मौजूदा और भावी कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। पहला नियम दो बच्चों की अनिवार्यता से जुड़ा है, जिसके चलते कई कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी। दूसरा नियम कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि को लेकर है, जहां वर्षों तक नियमितीकरण का इंतजार कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ाता रहा। सरकार अब इन दोनों नियमों को व्यावहारिक और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकारी सूत्रों का दावा है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से सलाह लेने के बाद नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे जल्द ही राज्य मंत्रिपरिषद के सामने मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। यदि कैबिनेट से हरी झंडी मिलती है, तो यह बदलाव न सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों बल्कि आने वाले समय में भर्ती होने वाले कर्मचारियों के लिए भी बड़ी राहत साबित होगा। खास बात यह है कि यह संशोधन जनसंख्या के ताजा आंकड़ों और अन्य राज्यों के फैसलों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, जिससे सरकार का यह कदम नीतिगत रूप से भी मजबूत माना जा रहा है।
दो बच्चों के नियम में क्या है मौजूदा प्रावधान
मप्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए दो बच्चों की नीति 26 जनवरी 2001 को लागू की गई थी। तत्कालीन सरकार ने बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए यह नियम बनाया था। इसके तहत यदि किसी अभ्यर्थी के तीन बच्चे होते हैं, तो वह सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता है। वहीं, सेवा में रहते हुए तीसरे बच्चे के जन्म की स्थिति में कर्मचारी की सेवा समाप्त किए जाने का प्रावधान रखा गया था।
