बड़ा तालाब 30 साल में 10 वर्ग किमी हुआ छोटा

बड़ा तालाब
  • 2500 से ज्यादा कब्जे, छोड़ा जा रहा सीवेज

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भोपाल व सीहोर की सीमा में 31 वर्ग किलोमीटर में फैले बड़े तालाब के किनारों पर लंबे समय से अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। इनमें बड़े फार्म हाउस के साथ कोठियां और बंगले तक शामिल हैं, लेकिन हर बार प्रशासन की कार्रवाई झुग्गियों तक ही सिमट कर रह जाती है। शहर की लाइफ लाइन बड़ा तालाब 30 साल में 10 वर्ग किलोमीटर छोटा हो गया और जिम्मेदार जिला प्रशासन, नगर निगम के अधिकारी आंख बंद कर बैठे रहे। इनमें से कई जगहों से तो सीवेज सीधे तालाब में छोड़ा जाता है। खासकर तालाब के आसपास बनी व्यावसायिक इमारतों और मैरिज गार्डनों से गंदगी सीधे तालाब में मिल रही है। जबकि इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोन बैंच 7 अक्टूबर को ही इन सभी अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश जारी कर चुकी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी इन अतिक्रमणों को बिना नोटिस दिए ही हटाने के आदेश दिए हैं, लेकिन जिला प्रशासन और नगर निगम अमला फिर भी इन निर्माणों पर कार्रवाई नहीं कर सका है। अब तक केवल भदभदा के सामने स्थित 250 झुग्गियों को ही हटाया गया है। इसके अलावा प्रेमपुरा स्थित 25 झुग्गियों को हटाने के नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि सूरज नगर व सेवनिया गोंड सहित कई बड़े निर्माण तालाब किनारे हो गए हैं। इंदौर रोड पर भी तालाब के कैचमेंट एरिया, बैंक वाटर एरिया में भी निर्माण हुए हैं। पर न तो अधिकारी यहां सर्वे करने पहुंचे और न ही अतिक्रमणों को चिन्हित किया गया।
यह है नियम: भोपाल के बड़े तालाब तक सीहोर से पानी की आपूर्ति करने वाली कोलांस नदी के आसपास के 250 मीटर क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट माना गया है और यहां पर निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसी तरह से नगर निगम सीमा के भीतर बड़े तालाब के 50 मीटर पास तक निर्माण प्रतिबंधित है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह सीमा 250 मीटर है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कई निर्माण तालाब के फुल टैंक लेवल के भीतर ही कर दिए गए हैं। अतिक्रमण के ज्यादातर मामलों में देखा जाए तो इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जबकि जमीन का डायवर्जन कराकर आवासीय और औद्योगिक निर्माण किए जा रहे हैं। तालाब किनारे ही अपशिष्टों को डंप भी किया जा रहा है।
बड़े तालाब से रोज 12 लाख लोगों को पीने के लिए मिल रहा पानी
बड़े तालाब के पानी से ही भरने वाला कलियासोत डैम भी इन अतिक्रमणों से अछूता नहीं है। जबकि इस डैम के जरिए ही शहर की 4,588 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है। दूसरी ओर बड़े तालाब व छोटी झील का कुल वेटलैंड का 3946.33 हेक्टेयर क्षेत्र भी अतिक्रमण और प्रदूषण से अछूता नहीं है। बड़े तालाब से रोज 12 लाख लोगों को पीने का पानी मिल रहा है। बड़ा तालाब 15 से ज्यादा प्रजाति की मछलियों का आवास भी है। यहां घडिय़ाल, मगरमच्छ और संरक्षित प्रजाति के कछुए और अन्य जीव पाए जाते हैं। तालाब में 2,500 से अधिक प्रवासी पक्षी, 266 स्थानीय प्रजातियों के 35 हजार पक्षियों का आशियाना है। तालाब करीब 361 वर्ग किमी में फैला हुआ है। लेकिन इसके बाद भी तालाब में सीवेज छोड़ा जा रहा है, जो मानवीय आबादी के साथ अन्य जीव जंतुओं का जीवन भी खतरे में पड़ता है। इसके अलावा 700 से ज्यादा वनस्पतियां और 36 तितलियों की प्रजातियों को भी प्रदूषण से नुकसान हो रहा है।

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