- पीएम स्वनिधि योजना के तहत बढ़ाई गई ऋण वितरण की अवधि

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र समेत देशभर में हाथठेला और रेहड़ी चलाकर अपना जीवन यापन करने वाले स्ट्रीट वेंडरों को पीएम स्वनिधि योजना के तहत 50 लाख नए स्ट्रीट वेंडरों को सस्ता और सुलभ कर्ज देने का लक्ष्य रखा गया है। इनके साथ कुल 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडरों को पीएम स्वनिधि योजना के तहत कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि बैंक पथ विक्रेताओं को लोन देने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। यही वजह है कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश के पथ विक्रेताओं द्वारा बैंकों में लोन के लिए किए गए 17 लाख 60 हजार 100 आवेदनों में से एक लाख 89 हजार 185 आवेदन लौटा दिए गए। जो 14 लाख 67 हजार 843 आवेदन स्वीकार किए गए, उनमें भी 1,00,012 को मंजूरी नहीं दी गई है और 32,034 लोन वितरण लंबित है। हालांकि 14 लाख 35 हजार 809 आवेदनों में बैंकों से लोन वितरण हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर पथ विक्रेताओं के लिए पीएम स्वनिधि योजना-2.0 शुरू की गई, ताकि वे बैंक से ऋण लेकर स्वरोजगार स्थापित कर सकें। लेकिन पथ विक्रेताओं को लोन देने में बैंक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इधर, प्रदेश के 11 जिले ऐसे हैं, जहां पीएम स्वनिधि योजना की स्थिति बेहद खराब है। यहां बैंकों ने 52,574 आवेदन लौटा दिए हैं। जिसके चलते अब छोटे व्यापारियों की दिलचस्पी इस योजना में नहीं रह गई है, जबकि इसकी राशि में भी इजाफा कर दिया गया है। पहली बार में दस के स्थान पर अब 15 हजार दिए जा रहे हैं और दूसरी बार में 20 के स्थान पर 25 हजार है। हालांकि बैतूल, आगर मालवा, हरदा, रतलाम, मंदसौर, बड़वानी, रीवा, पांढुर्णा, सतना और छिंदवाड़ा जिले में पीएम स्वनिधि योजना के तहत पथ विक्रेताओं को बैंकों से 99.50 प्रतिशत से लेकर 83.79 प्रतिशत लोन के आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव मप्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग संजय दुबे का कहना है कि कुछ प्रकरणों में व्यक्ति नहीं पहुंचता है तो कुछ प्रकरणों में लोन के लिए आवश्यक दस्तावेजों पूरी नहीं होते हैं। इस स्थिति में बैंकों द्वारा ऐसे आवेदनों लौटा दिए जाते हैं। मप्र में स्थिति बेहतर है, पीएम स्वनिधि योजना में 75 प्रतिशत प्रकरणों में बैंकों ने लोन दिया है। समय-समय पर इस प्रकरणों की समीक्षा की जाती है और बैंकों को निर्देश दिए जाते हैं कि वे सत प्रतिशत प्रकरणों में लोन स्वीकृत करें।
योजना में किया गया बदलाव
स्ट्रीट वेंडर शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक ऋण, सामाजिक सुरक्षा और बाजार तक पहुंच की कमी का सामना करना पड़ता है। पुनर्गठित पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य इन बाधाओं को दूर कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। यही कारण है कि योजना के दायरे और अवधि दोनों का विस्तार किया गया है। बीते 27 अगस्त 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएम स्वनिधि योजना के पुनर्गठन को मंजूरी दी है। इसके तहत ऋण वितरण की अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है। इस दौरान योजना पर 7,332 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। नई योजना में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए कैशबैक की व्यवस्था की गई है। नियमित डिजिटल खरीदारी पर सालाना 1,200 रुपये तक और थोक खरीदारी पर अतिरिक्त कैशबैक मिलेगा। इससे वेंडरों को न केवल त्वरित ऋण मिलेगा, बल्कि वो डिजिटल पेमेंट को लेकर भी सशक्त बनेंगे। समय पर ऋण चुकाने वालों को यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जाएगी। वर्तमान में पीएम स्वनिधि के तहत पहली किस्त में 15 हजार, दूसरी किस्त में 25 हजार और तीसरी किश्त में 50,000 रुपये का लोन दिया जाता है।
कोविड के बाद छोटे व्यापारियों के लिए वरदान
नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना आजीविका, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत आधार साबित हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जून 2020 में शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य सडक़ किनारे कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं को आर्थिक मजबूती देना है। भोंडवे ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान ठप पड़े व्यवसायों को दोबारा शुरू करने के लिए यह योजना वरदान साबित हुई। समय के साथ यह केवल ऋण योजना न रहकर स्ट्रीट वेंडरों को पहचान, सम्मान और औपचारिक आर्थिक व्यवस्था से जोडऩे का माध्यम बन गई है।
