एसआईआर की पूरी प्रक्रिया होने तक… नियुक्तियों पर रोक!

एसआईआर
  • अगले सप्ताह निगम मंडल की पहली सूची जारी होने की चर्चा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के निगम मंडलों की राजनीतिक नियुक्तियों की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। कहा जा रहा है कि खरमास खत्म होते ही सूचियां जारी होने लगेगी। लेकिन खबर यह भी है कि एसआईआर में मंत्रियों से लेकर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी नए सिरे से तय की गई है, ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया होने तक निगम मंडलों की नियुक्तियों को रोका जा सकता है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में निगम मंडल, प्राधिकरण और आयोग सहित कई सरकारी संस्थाओं में अध्यक्ष उपाध्यक्ष के पद से लेकर सदस्यों तक की राजनीतिक नियुक्तियां की जानी है। इसके लिए प्रदेश से लेकर दिल्ली और संघ स्तर पर भी मंथन पूरा हो चुका है। कहा जा रहा है कि खरमास शुरु होते ही सरकार एक दर्जन से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां करने की सूची जारी कर देगी। इसके उपरांत फरवरी माह में शेष सूचियां जारी होगी। लेकिन इन संभावनाओं के बीच सूत्रों से आ रही खबर नियुक्तियों को कुछ दिनों के लिए टाल सकती है। कहा जा रहा है कि जिस तरह से प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है और जिस तरह से प्रदेश भर में मतदाता सूची से नाम काटे गए है, उससे भाजपा चितिंत है और इसके लिए वरिष्ठ नेताओं और सरकार के मंत्रियों को स्वयं मैदान संभालने को कहा गया है। बताया गया है कि मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों के अलावा उनके खुद के गृह क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है, कि वे स्वयं इस बात की पुष्टि करें कि उनके मतदाताओं के नाम किसी कारण वश सूची से पृथक तो नहीं हो रहे है। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के सामने यह बात रखी गई है कि यदि राजनीतिक नियुक्तियां शुरु हो जाएगी, तो एसआईआर के काम में लगा पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रभावित हो सकता है, जिससे एसआईआर को लेकर तय लक्ष्य पूरा नहीं होगा। ऐसे में जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, तब तक नियुक्तियों की सूचियों को जारी नहीं किया जाए।
एक दर्जन नाम पर सहमति की खबर
इधर प्रदेश में 12 निगम मंडलों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए नामों की पहली सूची पर मुहर लगा दी गई है। जिसे 14 जनवरी के उपरांत जारी किया जा सकता है। इस सूची में भाजपा के उन बड़े नेताओं को कैबिनेट या राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त पद देने की तैयारी की जा रही है, जो कभी मंत्री व वजनदार पदों पर काम कर चुके है। इनमें संघ करीबी माने जाने वाले सहकारिता मंत्री रहे अरविंद सिंह भदौरिया, कृषि मंत्री कमल पटेल, कांग्रेस से भाजपा में आकर मंत्री बनें रामनिवास रावत और निगम अध्यक्ष रही चुकी केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक इमरती देवी के अलावा कुछ मौजूदा वरिष्ठ विधायकों के नाम इस सूची में शामिल बताए जा रहे है।
कुछ को मंत्री बनने की उम्मीद
सूत्रों का कहना है कि पहली सूची में कुछ ऐसे विधायकों को नाम भी निगम मंडल, प्राधिकरण व आयोग के अध्यक्ष उपाध्यक्ष पदों के लिए तय जाने जा रहे है, जिन्हें अभी भी प्रदेश मंत्रिमण्डल के विस्तार में खुद के मंत्री बनने की उम्मीद है, तो बतौर मंत्री रहे उपचुनाव हार चुके रामनिवास रावत को भरोसा कि उनके चुनाव को लेकर चल रही न्ययायिक प्रक्रिया के जरिए उन्हें न्याय मिलेगा। ऐसे में वे फिलहाल निगम मंडल में राजनीतिक नियुक्ति के पक्ष में नहीं है।

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