- सागर जिले के शाहगढ़ और राहतगढ़ उप-डाकघरों का मामला

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
सागर जिले के शाहगढ़ और राहतगढ़ उप-डाकघरों में लाखों का घोटाला उजागर हुआ है। यहां जनता के भरोसे और सरकारी खजाने में सेंध लगाते हुए एक सब पोस्ट मास्टर और ग्रामीण डाक सेवक ने मिलकर 30 लाख रुपए से अधिक का गबन कर लिया। डाक विभाग द्वारा इसकी शिकायत सीबीआई को किए जाने के बाद एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) जबलपुर ने इस मामले में दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डाक विभाग ने घोटाला सामने आने पर सब पोस्ट मास्टर को निलंबित कर दिया है, जबकि ग्रामीण डाक सेवक की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी है। आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक डेटा और खातों में भी फर्जीवाड़ा किया। कुल मिलाकर दोनों ने डाक विभाग को 30 लाख 60 हजार 287 का नुकसान पहुंचाया। इस खुलासे के बाद अब इन दोनों डाकयरों के खाताधारक अपनी रकम वापस पाने के लिए भटक रहे हैं। सीबीआई ने डाक विभाग की शिकायत पर मोहनलाल और मुकेश के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 409, 420, 467, 468, 471 और 477 ए के साथ बीएनएस की धारा 61(2), 316(5), 318(4), 338, 336(3), 340 (2) और 344 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। दोनों कर्मचारी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में सीबीआई जुटी है। जांच एजेंसी यह भी जानकारी जुटा रही है कि लाखों के इस घोटाले में किसी अन्य डाककमी या एजेंट का हाथ तो नहीं।
लखनादौन नगर पालिका में दुकान आवंटन घोटाला: सिवनी जिले की लखनादौन नगर पालिका द्वारा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बनाई गई दुकानों की नीलामी और आवंटन में लाखों का घोटाला उजागर होने के बाद 23 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जबलपुर यूनिट ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों और प्रेसिडेंट इन काउंसिल के सदस्यों को भी धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के इस केस में आरोपी बनाया है। शिकायतकर्ता रविन्दर सिंह आनंद की शिकायत पर जांच के बाद इस भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में पाया गया है नगर पालिका के अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने दुकानदारों के साथ मिलकर 2020 से 2024 के बीच न केवल दुकानों की नीलामी में गोलमाल किया गया, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों को मनचाही दुकानें आवंटित कर दी। आरोपियों में छह तत्कालीन महिला पार्षदों के नाम भी शामिल हैं।
75 दुकानों का कब्जा बगैर राशि वसूले सौंपा: ईओडब्ल्यू की पड़ताल में सामने आया है कि नपा द्वारा निर्मित इन सभी 75 टुकानों की नीलामी में न तो पूरी राशि वसूली और न ही अनुबंध किया। इसके बाद भी चहेतों को दुकानों का कब्जा दे दिया गया। नियम के अनुसार, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित दुकानों को भी तीन बार नीलामी प्रक्रिया अपनाने के बजाय रसूखदारों को बांट दिया गया। नियम के अनुसार, अगर रिजर्व कैटेगरी के लिए तीन बार नीलामी में इस वर्ग का कोई आवेदन नहीं आता, तभी दुकानों का आवंटन सामान्य वर्ग को किया जा सकता है, लेकिन लखनादौन में इसके बजाय एमआईसी के सदस्य पार्षदों ने अपनी मर्जी से आरक्षित वर्ग की दुकान सामान्य वर्ग के आवेदक को दे दी।
फर्जी दस्तखत के जरिए लाखों की हेराफेरी
मामले का खुलासा तब हुआ जब सागर नॉर्थ डिवीजन के डाक निरीक्षक ने 26 फरवरी 2026 को सीबीआई को एक पत्र लिखा। इसमें डाक विभाग में 30 लाख की धोखाधड़ी की शिकायत की गई। इसके बाद सीबीआई ने जांच की, तो सामने आया कि इस घोटाले का मास्टरमाइंड वहां पदस्थ रहा सब पोस्ट मास्टर मोहनलाल अहिरवार है, जिसने अपने साथी ग्रामीण डाक सेवक मुकेश कुमार दुबे के साथ मिलकर यह साजिश रची। शाहगढ़ डाकघर में मोहनलाल और मुकेश ने मिलकर खाताधारकों के फर्जी हस्ताक्षर किए और विड्रॉल फॉर्म के जरिए 19 लाख 34 हजार 500 रुपए निकाल लिए। इतना ही नहीं, इन दोनों ने खाताधारकों के जो पैसे जमा कराने के लिए आए, उन्हें भी अकाउंट में न डालकर अपनी जेब में रख लिया। शाहगढ़ के बाद मोहनलाल की पोस्टिंग राहतगढ़ हुई, जहां उसने डाकघर के रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) और अन्य खातों में 11 लाख 25 हजार 787 रुपए की हेराफेरी की।
