
-मप्र के नए संगठन महामंत्री की तलाश में जुटा संघ
गौरव चौहान
मप्र भाजपा संगठन की पिछले चार वर्षो से कमान संभाल रहे हितानंद को संगठन महामंत्री के पद से हटाने के बाद अब अगले प्रदेश संगठन महामंत्री के नाम को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। वहीं हिताननंद को प्रदेश सह बोद्धिक प्रमुख बनाए जाने के साथ ही प्रदेश संगठन महामंत्री का काम क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल को दे दिया गया है। यानी जब तक ननए संगठन महामंत्री की नियुक्ति नहीं हो जाती है जामवाल इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। जानकारों की मानें तो नई नियुक्ति तक जामवाल संगठन से जुड़े छोटे-बड़े निर्णयों के लिए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मार्गदर्शन देंगे। चर्चा तो यह भी है कि जब तक इस पद के लिए उपयुक्त नाम नहीं मिल जाता, तब तक इस दायित्व को क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल स्वयं संभाले रहेंगे।
माना जा रहा है कि संघ ने अगले प्रदेश संगठन महामंत्री के नाम को लेकर नाम तय कर लिया है लेकिन अभी घोषणा नहीं की जाएगी। इसके पीछे जो कारण बताए जा रहे है वह यह है कि अगर अजय जामवाल इस पद का दायित्व पूर्ण रूप से संभालने के लिए तैयार हो जाते है तो संघ उन्हें ही पूर्ण दायित्व सौप सकता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों संघ की इंदौर में हुई विशेष बैठक के बाद संघ के क्षेत्र संचालक ने नए दायित्वों को लेकर घोषणा की थी, जिसमें हितानंद शर्मा को क्षेत्र रह बौद्धिक प्रमुख बनाए जाने की घोषणा की थी। शर्मा का केन्द्र जबलपुर रहेगा। इनके अलावा सुरेन्द्र मिश्रा प्रचारक पूर्व सैनिक सेवा परिषद, मुकेश त्यागी प्रचारक ग्राहक पंचायत और ब्रजकिशोर भार्गव प्रचारक क्षेत्र गौ सेवा प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी थी। हितानंद शर्मा की संघ की वापसी के बाद अब मप्र भाजपा के संगठन महामंत्री पद पर कौन आएगा, इसे लेकर कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है।
संघ नया प्रयोग करने के प्रयास में
इसके अलावा संघ यह भी सोच कर चल रहा है कि अगर प्रदेश में संगठन महामंत्री के पद की जरूरत नहीं हुई तो फिर इस पद पर किसी को नहीं लाया जाएगा। इसके पीछे जो कारण बताए जा रहे है वह यह है कि पिछले करीब चार-पांच वर्षो से राजस्थान में भी संगठन महामंत्री का पद खाली है और ऐसे में भाजपा ने दो वर्ष पूर्व सत्ता में वापसी की है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि संघ को लगाता है कि मप्र में भी भाजपा को प्रदेश संगठन महामंत्री के बगैर चलाया जा सकता है। तो फिर नए व्यक्ति को इस पद पर लाने से कोई फायदा नहीं होगा। खबर यह भी चर्चा में है कि भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री जैसे पद पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहती, क्योंकि कई बार इन नेताओं पर भाजपा का दायित्व संभालने के उपरांत भाई भतीजावाद का आरोप लगने लगता है। जानकारों का कहना है कि भाजपा के इस कदम पर संघ की भी सहमति है। संघ के निर्देश के उपरांत जिस तरह से संभागीय संगठन महामंत्री और प्रदेश सह संगठन मंत्री के पद समाप्त किए गए थे, उसी तरह अब प्रदेश संगठन महामंत्री का पद भी समाप्त करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि ये सब 22 फरवरी को नागपुर की संभावित संघ की बैठक के उपरांत ही साफ हो पाएगा कि मध्यप्रदेश को अगला प्रदेश संगठन महामंत्री मिलेगा या नहीं और यदि मिलेगा, तो कौन होगा। इससे पहले प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री रहे सुहास भगत की भी वापसी संघ में हुई थी। उनकी संघ में वापसी 2022 में हुई थी। इससे पहले हितानंद शर्मा ने उनके साथ सितम्बर 2020 से बतौर सह संगठन महामंत्री के रुप में दायित्व संभाला। इससे पहले संगठन महामंत्री रहे कप्तान सिंह सोलंकी, माखन सिंह और अरविन्द मेनन जैसे नेताओं की संघ में वापसी नहीं हुई थी, बल्कि भाजपा संगठन ने उन्हें दूसरे दायित्व सौंपे थे, तो कप्तान सिंह सोलंकी राज्यसभा सांसद और फिर राज्यपाल जैसे पद पर आसीन हुई थे।
अब नए सिरे से जतानी होगी निगम-मंडल की दावेदारी
इधर संगठन महामंत्री बदले जाने के बाद प्रदेश के निगम मंडल में पद पाने की उम्मीद लगाए कई दावेदार नेता बैचेन हो गए है, क्योंकि इनमें से कई नेताओं ने संगठन महामंत्री शर्मा से अपनी दावेदारी जताई थी और उन्हें उम्मीद थी, कि उनके संगठनात्मक सक्रियता के बारे में हितानंद शर्मा उनकी पैरवी भोपाल से लेकर दिल्ली तक करेंगे। लेकिन जैसे ही शर्मा की जिम्मेदारी बदली, ये दावेदार नेता बैचेन हो गए है। इनमें से कुछ नेताओं ने पिछले दो दिनों में भोपाल से लेकर दिल्ली तक नए सिरे से अपने लिए संभावनाएं तलाशना शुरु कर दी है। इधर सूत्रों का कहना है कि दिल्ली ने भी एक बार फिर से राज्य सरकार ने निगम मंडलों के लिए उपयुक्त कार्यकर्ताओं की बड़ी सूची लाने को कहा है, जिससे एक बार में ही सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए दिल्ली से हरी झंडी दी जा सके।
