- मध्यप्रदेश में बजट सत्र के बाद कई अधिकारियों का भी कटेगा पत्ता

गौरव चौहान
मप्र में चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद सरकार एक और बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करने जा रही है। इस सर्जरी में जिला कलेक्टर और कमिश्रर बदले जाएंगे। गौरतलब है कि अभी हाल ही में सरकार ने आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की है। अब बताया जा रहा है कि बजट सत्र के बाद बड़े स्तर पर तबादले किए जाएंगे। यानी 6 मार्च के बाद ही तबादलों की बड़ी सूची जारी की जाएगी।
गौरतलब है कि सरकार मैदानी अफसरों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट बनवा रही है। उसके आधार पर तबादले किए जाएंगे। अभी हाल ही में सरकार द्वारा की गई प्रशासनिक सर्जरी अभी अधूरी है, जो सत्र खत्म होने के बाद पूरी होगी। इसमें 12 से 20 फीसदी जिलों के कलेक्टरों का तबादला लगभग तय है। ये बदलाव केंद्र व राज्य की जनता से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं व परियोजनाओं की प्रगति के आधार पर तय होने वाले जिलों के परफार्मेंस के आधार पर की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव कार्यालय ने जिलों के परफार्मेंस से जुड़ा एक रोडमैप तैयार कर लिया है।
सबसे पहले खराब रिपोर्ट वाले बदले जाएंगे
बताया जाता है कि सरकार को कुछ ऐसे कलेक्टरों के तबादले करने हैं, जिनकी रिपोर्ट अच्छी नहीं है। इसका आकलन मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव द्वारा कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस करके दिए गए निर्देशों के पालन प्रतिवेदन के आधार पर किया गया है। दरअसल, मुख्य सचिव अनुराग जैन दो बार कलेक्टर-कमिश्नरों के कामकाज का आकलन विभिन्न आधारों पर करा चुके हैं। रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयार भी कर ली है। सूत्रों का कहना है कि पहले तैयारी एसआईआर का काम पूरा होने के बाद तबादले करने की थी लेकिन अब बजट सत्र के बाद मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर पर परिवर्तन किया जाएगा। प्रदेश के इस समय 44 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। 14 अधिकारी तो 2024 और 2025 में ही प्रतिनियुक्ति पर गए हैं। इसका असर प्रदेश में संवर्ग प्रबंधन पर भी पड़ रहा है। सचिव स्तर के अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से विभाग देने पड़े हैं क्योंकि अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की कमी है। इस वर्ष केवल एक अधिकारी एम सेलवेंद्रन ही प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नत हुए। वहीं, कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनके पास दो-तीन विभागों का दायित्व है।
तबादले में कई संदेश
सरकार ने 13 फरवरी की आधी रात को जो तबादला किया है उसमें स्वास्थ्य, कृषि और आबकारी जैसे विभाग के प्रशासनिक मुखिया समेत 11 अफसर बदले लेकिन इन्हें और बड़ी जिम्मेदारी भी दे दी। एक तरह से इन विभागों को और मजबूत बनाने के प्रयास हुए तो इसके लिए जिन अफसरों को हटाया, उनका कद भी घटने नहीं दिया। स्वास्थ्य विभाग सीधे तौर पर जनता से जुड़ा है। पूर्व में यह विभाग ज्यादातर अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के पास रहा है। नीचे भी कई अनुभवी आइएएस अफसर रहे। लेकिन बीते कुछ समय से इसका जिम्मा प्रमुख सचिव संदीप यादव को दिया गया और इसी बीच स्वास्थ्य में एक के बाद कई घटनाएं हो गईं। सरकार को लगा कि यहां और कसावट लाई जाए इसलिए प्रमुख सचिव को हटाकर फिर से विभाग अपर मुख्य सचिव के हवाले करते हुए वरिष्ठ अफसर अशोक बर्णवाल को जिम्मा दिया। वहीं प्रमुख सचिव संदीप यादव को वन जैसा बड़ा विभाग दिया, जिसमें भारतीय वन सेवा के कई नामी अफसर काम कर रहे हैं। सरकार कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कामों को और तेज करने के लिए उमाशंकर भार्गव जैसे जल्दी परिणाम लाने वाले आइएएस को संचालक बनाया। उधर खजाने भरने वाले विभागों में शामिल आबकारी का जिम्मा जनसंपर्क आयुक्त रहे दीपक सक्सेना को दिया।
कई कलेक्टरों पर लटकी तलवार
बजट सत्र के बाद एक और सर्जरी की जो तैयारी की जा रही है उसमें कई कलेक्टरों पर तलवार हुई है। जानकारी के अनुसार, सरकार कई पैमानों पर अफसरों की परफॉर्मेंस का आकलन कर रही है।प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी व ग्रामीण, परिवार कल्याण से जुड़ी केंद्रीय योजनाएं, धरती आबा ग्राम उत्कृष्ट अभियान जैसी योजनाओं व अभियानों में कई जिलों ने बेहतर काम नहीं किया है। जबकि केंद्र अपनी सभी योजनाओं व अभियानों की सीधे निगरानी कर रहा है। कुछ काम तो पीएम प्रगति पर भी निगरानी में है। वहीं कई जिले पिछड़े हैं। इनके कारण राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति खराब होना। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला, किसान और गरीबों के कल्याण के की योजनाओं में 40 से 50 प्रतिशत जिलों में नामांतरण व बंटवारे के काम बहुत अटके हुए हैं। मुख्य सचिव कार्यालय में सभी जिलों का परफॉर्मेस तैयार है। कई जिलों की परफॉर्मेस विभिन्न कारणों से बिगड़ी हुई है। रबी व खरीफ सीजन में रीवा, भिंड, दतिया, नर्मदापुरम व रायसेन जैसे कई जिलों में खाद वितरण व्यवस्था ठीक नहीं थी। किसानों को परेशान होना पड़ा। वहीं स्कूल शिक्षा पर बेहतर काम के दावे के बीच कई जिलों में सरकारी स्कूलों में बच्चों के पंजीयन तेजी से कम हो रहे हैं। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ी है तो कुछ जिलों में वन भूमि पर भी अतिक्रमण के मामले पूर्व की तुलना में बढ़ गए हैं। सडक़ दुर्घटना व प्रशासनिक अनदेखियों में होने वाली घटनाएं, इनमें कई लोगों की जाने जा रही है। इसे कई जिले रोक नहीं पा रहे हैं। जिलों में प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल नहीं है। इससे विकास काम प्रभावित हो रहे। कई जिलों से शिकायतें मिलीं। कई जिलों में अवैध खनन रुक नहीं रहा। नर्मदा व चंबल किनारे के जिले शामिल हैं। कुछ छोटी नदियों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कई जिलों से जुड़ी शिकायतें तो वरिष्ठ स्तर पर भी संज्ञान में आ चुकी हैं।
सचिव और अपर कलेक्टर भी बदलेंगे
कुछ सचिव स्तर के अधिकारियों को नए दायित्व दिए जाएंगे तो कुछ अन्य अधिकारियों को भी बदला जाएगा। मैदानी स्तर पर कलेक्टर के साथ अपर कलेक्टर भी बदले जाएंगे। इसमें वे अधिकारी भी शामिल होंगे जिन्हें ढाई साल से अधिक समय एक स्थान पर हो गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी नरहरि भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के इच्छुक हैं। उन्हें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से हरी झंडी भी मिल चुकी है। इसके पहले सचिव स्तर के अधिकारी श्रीमन शुक्ला और स्वतंत्र कुमार सिंह भी लाइन में हैं।
