कांग्रेस में अमित शर्मा की सनातन राजनीति

  • हमीदिया कॉलेज की छात्र राजनीति से कर्मचारियों की आवाज तक का विचारशील सफर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनकी पहचान भाषणों से नहीं, बल्कि साहस, संवेदना और सच के साथ खड़े होने से बनती है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव अमित शर्मा ऐसे ही नेता हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत हमीदिया कॉलेज की छात्र राजनीति से की और कम उम्र में संगठन, जनप्रतिनिधित्व और सामाजिक संघर्ष के अनेक दायित्व निभाते हुए आज कांग्रेस में एक सनातन-प्रेमी, मानवतावादी और निर्भीक स्वर के रूप में स्थापित हुए हैं।
हमीदिया कॉलेज से राजनीति की पहली पाठशाला
भोपाल के प्रतिष्ठित हमीदिया कॉलेज में अध्ययन के दौरान अमित शर्मा की राजनीतिक चेतना आकार लेने लगी। छात्र राजनीति में एनएसयूआई के माध्यम से उन्होंने छात्रों के मुद्दों को मजबूती से उठाया और अपनी नेतृत्व क्षमता के बल पर कॉलेज प्रेसिडेंट बने। यहीं से उन्होंने यह सीखा कि राजनीति केवल सत्ता का रास्ता नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस है। स्टूडेंट पॉलिटिक्स के बाद अमित शर्मा भोपाल जिला यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बने। इस भूमिका में उन्होंने युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों के सवाल—शिक्षा, रोजगार, लोकतांत्रिक अधिकार—को संगठन के केंद्र में रखा। उनका कार्यकाल एक ऐसे युवा नेता के रूप में याद किया जाता है जिसने संगठन को सडक़ से जोडक़र रखा।
राकर्मचारी का बेटा- कर्मचारियों की आवाज
अमित शर्मा की राजनीति की जड़ें केवल संगठन में नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक संस्कारों में भी हैं। वे स्वयं एक कर्मचारी के पुत्र हैं—और यही कारण है कि कर्मचारियों, शिक्षकों और मध्यमवर्गीय परिवारों की पीड़ा को वे केवल सुनते नहीं, खुद जीते हैं। जब भोपाल में स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर पर्यावरण का हवाला देते हुए कर्मचारियों के मकान तोड़ने की बात सामने आई, तब अमित शर्मा ने बिना किसी संकोच के इस निर्णय का विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर रोजी-रोटी और छत छीनना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कर्मचारियों और शिक्षकों की आवाज को सडक़ों से लेकर मंच तक बुलंद किया और यह साबित किया कि उनकी राजनीति सत्ता के साथ नहीं, सच और इंसान के साथ खड़ी होती है।
पार्षद और युवा आयोग-नीति से जमीन तक
पार्षद के रूप में अमित शर्मा ने शहरी समस्याओं, जनहित और सामाजिक न्याय के सवालों पर सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद मध्य प्रदेश युवा आयोग के सदस्य के रूप में उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों को नीति निर्माण के स्तर पर रखा— जो उन्हें एक विचारशील और समाधान-केंद्रित नेता के रूप में स्थापित करता है।
सनातन धर्म और सच की राजनीति
गौ-हत्या का विषय हो, सनातन परंपराओं पर हो रहे प्रहार हों या शंकराचार्य जी से जुड़े प्रश्न—अमित शर्मा ने हर मुद्दे पर बिना किसी राजनीतिक भय के सच को सच कहा। उनके लिए सनातन धर्म का अर्थ है— करुणा, सत्य, अहिंसा और मानवता, न कि दिखावा या विभाजन।
भोपाल में युवाओं के बीच अलग पहचान
आज भोपाल की राजनीति में अमित शर्मा युवा चेहरों की एक अलग पहचान बन चुके हैं। वे उन गिने-चुने नेताओं में हैं जिन्हें युवा वर्ग केवल नेता नहीं, बल्कि अपनी आवाज मानता है। युवा नेतृत्व के बीच वे एक ऐसे सशक्त नेतृत्व समूह का हिस्सा हैं, जो भविष्य की राजनीति को संवेदनशील, सच्ची और जमीन से जुड़ी बनाना चाहता है। हमीदिया कॉलेज की छात्र राजनीति से लेकर भोपाल जिला यूथ कांग्रेस अध्यक्ष, पार्षद, मध्य प्रदेश युवा आयोग के सदस्य और आज प्रदेश महासचिव तक का अमित शर्मा का सफर केवल पदों की श्रृंखला नहीं है। यह उस राजनीति की कहानी है जो सनातन मूल्यों, मानवीय संवेदना और निर्भीक सच के साथ आगे बढ़ती है। कांग्रेस में अमित शर्मा की सनातन राजनीति आज की राजनीति में उस स्वर का नाम है, जो धर्म को नफरत नहीं, बल्कि मानवता का आधार मानता है- और विकास को इंसान के खिलाफ नहीं, इंसान के साथ खड़ा करता है।

Related Articles